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सेल्फ मेडिकेशन से फंगस इंफेक्शन का दायरा बढ़ा
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जम्मू। सेल्फ मेडिकेशन (डॉक्टरी परामर्श के बिना दवाओं का नियमित सेवन) से राज्य में ट्राईकोफायटान रुबरम नामक फंगस इंफेक्शन का दायरा बढ़ गया है। पंजाब और उत्तर प्रदेश में आमतौर पर आने-जाने वाले या फिर वहां के लोगों के संपर्क में रहने वाले लोग फंगस इंफेक्शन की चपेट में ज्यादा आ रहे हैं।
कैंसर, मधुमेह और दूसरे अन्य रोगों से पीड़ितों में नियमित असंतुलित दवाओं के सेवन से फंगस का खतरा बढ़ा है। बरसात के मौसम में यह समस्या अन्य किसी मौसम के मुकाबले ज्यादा होती है। फंगस इंफेक्शन के जड़ से खात्मे के लिए दो हफ्ते के इलाज को अब कई मरीजों को छह माह या एक साल तक का समय लग रहा है।
केस 1 - आरएस पुरा का 30 वर्षीय दलजीत सिंह अक्सर छोटी की बीमारी पर एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन करता रहा। इन एंटीबायोटिक दवाओं से कोर्स को कभी पूरा नहीं किया गया। नतीजतन धीरे धीरे शारीरिक क्षमता कमजोर हो गई और अब फंगस ने जकड़ लिया है। फंगस पर भी चार हफ्ते से इलाज चल रहा है। लेकिन एंटीबायोटिक पूरी तरह से काम नहीं कर रही हैं। डाक्टरों के अनुसार पहले से इतनी एंटीबायोटिक लेने से शरीर पर एंटीबायोटिक का असर नहीं हो रहा है।
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केस 2 - सांबा निवासी मीनाक्षी शर्मा ने त्वचा पर छोटे रोगों के इलाज के लिए बिना डाक्टरी परामर्श अधिक असंतुलित दवाओं का सेवन किया। नतीजतन चेहरा को बिगड़ा, शरीर में फंगस इंफेक्शन ने भी पकड़ लिया है। अब हालत यह है कि तीन हफ्ते से लगातार इलाज ले रही हैं, लेकिन इंफेक्शन में ज्यादा सुधार नहीं आया है, डाक्टरों के अनुसार असंतुलित दवाएं लेने से ऐसा हो रहा है। शरीर में एंटीबायोटिक दवाओं की एक क्षमता रहती है।
एसएमजीएस अस्पताल के त्वचा विभाग के एचओडी डॉ. देवराज डोगरा के अनुसार जम्मू संभाग के कई जिलों में नए किस्म के फंगस इंफेक्शन के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। सेल्फ मेडिकेशन में असंतुलित ड्रग्स लेने से समाज के एक बड़े वर्ग में शारीरिक क्षमता पर विपरीत असर पड़ा है। इससे मानव शरीर में बाहरी वैक्टीरिया से लड़ने वाले कीटाणु खुद के जींस को विकसित कर ज्यादा ताकतवर हो रहे हैं। उन पर एंटीबॉडीज दवाएं असर नहीं कर रही हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि यह इंफेक्शन तंग कपड़े पहनने के अलावा अंडर गारमेंट्स को नियमित न बदलने से भी हो जाता है। पीड़ित को पता ही नहीं चलता कि वह अनजाने में ही परिवार के सदस्यों के साथ और लोगों को संक्रमण दे रहे हैं।
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25-40 उम्र के कामकाजी महिला-पुरुष ज्यादा प्रभावित
एसएमजीएस अस्पताल की त्वचा विभाग की ओपीडी में सामान्य तौर पर 350-400 मरीजों में से 40 फीसदी फंगस इंफेक्शन से पीड़ित हैं। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में 25 से 40 साल की आयु वर्ग के कामकाजी महिलाएं और पुरुष इससे ज्यादा प्रभावित हैं। माना जाता है कि कामकाज के तनाव से निपटने के लिए इस आयुवर्ग के नौकरी-पेशा लोग किसी न किसी रूप में डॉक्टरों से पूछे बगैर कोई न कोई दवा ले लेते हैं।
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लक्षण
- शरीर के निचले हिस्सों में खारिश के साथ रिंग जैसे जख्म बनना
- जख्म के दाने के रूप में विकसित होकर इंफेक्शन बढ़ना
- नियमित नींद नहीं आना और तनाव ज्यादा देर तक रहना
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बचाव
- पीड़ित अपने कपड़े परिवार के अन्य सदस्यों से अलग रखे
- इंफेक्शन खत्म करने के लिए गर्म पानी से कपड़े धोएं
- किसी भी मेडिसन कोर्स को पूरा करें, बीच में न छोड़ें
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कैंसर, मधुमेह और दूसरे अन्य रोगों से पीड़ितों में नियमित असंतुलित दवाओं के सेवन से फंगस का खतरा बढ़ा है। बरसात के मौसम में यह समस्या अन्य किसी मौसम के मुकाबले ज्यादा होती है। फंगस इंफेक्शन के जड़ से खात्मे के लिए दो हफ्ते के इलाज को अब कई मरीजों को छह माह या एक साल तक का समय लग रहा है।
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केस 1 - आरएस पुरा का 30 वर्षीय दलजीत सिंह अक्सर छोटी की बीमारी पर एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन करता रहा। इन एंटीबायोटिक दवाओं से कोर्स को कभी पूरा नहीं किया गया। नतीजतन धीरे धीरे शारीरिक क्षमता कमजोर हो गई और अब फंगस ने जकड़ लिया है। फंगस पर भी चार हफ्ते से इलाज चल रहा है। लेकिन एंटीबायोटिक पूरी तरह से काम नहीं कर रही हैं। डाक्टरों के अनुसार पहले से इतनी एंटीबायोटिक लेने से शरीर पर एंटीबायोटिक का असर नहीं हो रहा है।
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केस 2 - सांबा निवासी मीनाक्षी शर्मा ने त्वचा पर छोटे रोगों के इलाज के लिए बिना डाक्टरी परामर्श अधिक असंतुलित दवाओं का सेवन किया। नतीजतन चेहरा को बिगड़ा, शरीर में फंगस इंफेक्शन ने भी पकड़ लिया है। अब हालत यह है कि तीन हफ्ते से लगातार इलाज ले रही हैं, लेकिन इंफेक्शन में ज्यादा सुधार नहीं आया है, डाक्टरों के अनुसार असंतुलित दवाएं लेने से ऐसा हो रहा है। शरीर में एंटीबायोटिक दवाओं की एक क्षमता रहती है।
एसएमजीएस अस्पताल के त्वचा विभाग के एचओडी डॉ. देवराज डोगरा के अनुसार जम्मू संभाग के कई जिलों में नए किस्म के फंगस इंफेक्शन के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। सेल्फ मेडिकेशन में असंतुलित ड्रग्स लेने से समाज के एक बड़े वर्ग में शारीरिक क्षमता पर विपरीत असर पड़ा है। इससे मानव शरीर में बाहरी वैक्टीरिया से लड़ने वाले कीटाणु खुद के जींस को विकसित कर ज्यादा ताकतवर हो रहे हैं। उन पर एंटीबॉडीज दवाएं असर नहीं कर रही हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि यह इंफेक्शन तंग कपड़े पहनने के अलावा अंडर गारमेंट्स को नियमित न बदलने से भी हो जाता है। पीड़ित को पता ही नहीं चलता कि वह अनजाने में ही परिवार के सदस्यों के साथ और लोगों को संक्रमण दे रहे हैं।
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25-40 उम्र के कामकाजी महिला-पुरुष ज्यादा प्रभावित
एसएमजीएस अस्पताल की त्वचा विभाग की ओपीडी में सामान्य तौर पर 350-400 मरीजों में से 40 फीसदी फंगस इंफेक्शन से पीड़ित हैं। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में 25 से 40 साल की आयु वर्ग के कामकाजी महिलाएं और पुरुष इससे ज्यादा प्रभावित हैं। माना जाता है कि कामकाज के तनाव से निपटने के लिए इस आयुवर्ग के नौकरी-पेशा लोग किसी न किसी रूप में डॉक्टरों से पूछे बगैर कोई न कोई दवा ले लेते हैं।
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लक्षण
- शरीर के निचले हिस्सों में खारिश के साथ रिंग जैसे जख्म बनना
- जख्म के दाने के रूप में विकसित होकर इंफेक्शन बढ़ना
- नियमित नींद नहीं आना और तनाव ज्यादा देर तक रहना
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बचाव
- पीड़ित अपने कपड़े परिवार के अन्य सदस्यों से अलग रखे
- इंफेक्शन खत्म करने के लिए गर्म पानी से कपड़े धोएं
- किसी भी मेडिसन कोर्स को पूरा करें, बीच में न छोड़ें