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Jammu News: कफ सिरप को लेकर अलर्ट, राजस्थान व मध्यप्रदेश में मिले बैच पर रखी जा रही नजर
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स्वास्थ्य निदेशालय ने सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को सतर्कता बरतने को कहा
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। राजस्थान और मध्यप्रदेश में कफ सिरप पीने से बच्चों की मौत और तबीयत खराब होने की घटनाओं के बाद जम्मू-कश्मीर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट है। विभाग ने सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों, ब्लाॅक मेडिकल अधिकारियों और चिकित्सा अधीक्षक को उपरोक्त राज्यों में मिली कफ सिरप के बैच (अगर है) तो जब्त करने को कहा है।
जम्मू-कश्मीर स्वास्थ्य विभाग ने स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय की ओर से जारी परामर्श को सभी अस्पताल प्रमुखों को भेजा है। डॉक्टरों को परामर्श का सख्ती से पालन करने को कहा है। डॉक्टरों को पर्ची का पालन सख्ती से करने को कहा है। स्वास्थ्य निदेशक जम्मू अब्दुल हमीद जरगर ने कहा कि शुक्रवार को भी आला अधिकारियों के जरूरी दिशा-निर्देश दिए गए है। उन्होंने कहा कि राजस्थान और मध्यप्रदेश में जिस कफ सिरप से बच्चों की मौत हुई है उसे बैच के सैंपल जम्मू-कश्मीर में नहीं मिले है। हालांकि चिकित्सा अधिकारियों को सख्ती ने नजर रखने को कहा है। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों बताया कि दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों को खांसी की सिरप नहीं दे। अधिकांश मामले में छोटे बच्चों को होने वाली खांसी खुद ठीक हो जाती है। ऐसे में डॉक्टरों को सख्ती से पालन करने को कहा है।
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जम्मू-कश्मीर में 12 बच्चों की मौत का कारण बना था कफ सिरप
दिसंबर 2019 से जनवरी 2020 के बीच रामनगर उधमपुर में 12 बच्चों की मौत हुई थी।
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू-कश्मीर में दिसंबर 2019 और जनवरी 2020 के बीच कफ सिरफ पीने से 12 बच्चों की मौत हुई थी। उधमपुर जिले के रामनगर में यह मौतें हुई थी, जिसके बाद प्रदेश में कफ सिरप जैसी दवाओं पर विशेष निगरानी रखी गई थी। मध्यप्रदेश और राजस्थान में कफ सिरप पीने से बच्चों की मौत के बाद जम्मू-कश्मीर औषधि नियंत्रक विभाग सक्रिय हो गया है नियमित दवा दुकानों की जांच कर रहा है।
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उधमपुर के रामनगर तहसील में हिमाचल प्रदेश निर्मित नकली खांसी की दवा कफ सिरफ के सेवन से मौत हुई थी। इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को अप्रैल 2020 को एक शिकायत मिली थी। इसके बाद नकली कफ सिरप दवा का पूरा मामला सामने आया था। इस मामले में हिमाचल प्रदेश स्थित दवा कंपनी डिजिटल विजन के तीन मालिकों सहित पांच आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए थे। इस घटना के बाद जम्मू-कश्मीर औषधि नियंत्रक विभाग ने इस तरह की दवाओं को लेकर विशेष अभियान चलाया था। जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने सिरप से हुई मौत के बाद कोल्डबेस्ट-पीसी का पूरा बेच सील कर रिकॉल किया था। हिमाचल प्रदेश ड्रग विभाग ने भी कंपनी का मेन्युफैक्चरिंग लाइसेंस निलंबित कर दिया था। परीक्षण में पाया गाया कि सिरप में डाई-एथिलीन ग्लाइकोल (डीईजी) की मात्र थी। यह औद्योगिक सॉल्वेंट होता है जो शरीर में जाने पर गुर्दे फेल कर देता है। जम्मू-कश्मीर औषधि नियंत्रक विभाग में औषधि विश्लेषक ने कहा कि नियमित रूप में हमारी जांच होती है। इस घटना के बाद से सक्रियता ज्यादा बढ़ी है। दवाओं कंपनियों के औचक सैंपल लिए जाते है।
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ड्रग्स तस्करी के मामले में दो आरोपी दोषी करार
वर्ष 2021 में श्रीनगर को छानपोरा में एक ट्रांसपोर्ट कंपनी से 7500 बोतल जेरैक्स सिरप (कोडीन फॉस्फेट) और 9600 जेन कैविट कैप्सूल पकड़े थे। इस तस्करी में संलिप्तता दो लोगों को दोषी ठहराया है।
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। राजस्थान और मध्यप्रदेश में कफ सिरप पीने से बच्चों की मौत और तबीयत खराब होने की घटनाओं के बाद जम्मू-कश्मीर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट है। विभाग ने सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों, ब्लाॅक मेडिकल अधिकारियों और चिकित्सा अधीक्षक को उपरोक्त राज्यों में मिली कफ सिरप के बैच (अगर है) तो जब्त करने को कहा है।
जम्मू-कश्मीर स्वास्थ्य विभाग ने स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय की ओर से जारी परामर्श को सभी अस्पताल प्रमुखों को भेजा है। डॉक्टरों को परामर्श का सख्ती से पालन करने को कहा है। डॉक्टरों को पर्ची का पालन सख्ती से करने को कहा है। स्वास्थ्य निदेशक जम्मू अब्दुल हमीद जरगर ने कहा कि शुक्रवार को भी आला अधिकारियों के जरूरी दिशा-निर्देश दिए गए है। उन्होंने कहा कि राजस्थान और मध्यप्रदेश में जिस कफ सिरप से बच्चों की मौत हुई है उसे बैच के सैंपल जम्मू-कश्मीर में नहीं मिले है। हालांकि चिकित्सा अधिकारियों को सख्ती ने नजर रखने को कहा है। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों बताया कि दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों को खांसी की सिरप नहीं दे। अधिकांश मामले में छोटे बच्चों को होने वाली खांसी खुद ठीक हो जाती है। ऐसे में डॉक्टरों को सख्ती से पालन करने को कहा है।
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जम्मू-कश्मीर में 12 बच्चों की मौत का कारण बना था कफ सिरप
दिसंबर 2019 से जनवरी 2020 के बीच रामनगर उधमपुर में 12 बच्चों की मौत हुई थी।
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू-कश्मीर में दिसंबर 2019 और जनवरी 2020 के बीच कफ सिरफ पीने से 12 बच्चों की मौत हुई थी। उधमपुर जिले के रामनगर में यह मौतें हुई थी, जिसके बाद प्रदेश में कफ सिरप जैसी दवाओं पर विशेष निगरानी रखी गई थी। मध्यप्रदेश और राजस्थान में कफ सिरप पीने से बच्चों की मौत के बाद जम्मू-कश्मीर औषधि नियंत्रक विभाग सक्रिय हो गया है नियमित दवा दुकानों की जांच कर रहा है।
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उधमपुर के रामनगर तहसील में हिमाचल प्रदेश निर्मित नकली खांसी की दवा कफ सिरफ के सेवन से मौत हुई थी। इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को अप्रैल 2020 को एक शिकायत मिली थी। इसके बाद नकली कफ सिरप दवा का पूरा मामला सामने आया था। इस मामले में हिमाचल प्रदेश स्थित दवा कंपनी डिजिटल विजन के तीन मालिकों सहित पांच आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए थे। इस घटना के बाद जम्मू-कश्मीर औषधि नियंत्रक विभाग ने इस तरह की दवाओं को लेकर विशेष अभियान चलाया था। जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने सिरप से हुई मौत के बाद कोल्डबेस्ट-पीसी का पूरा बेच सील कर रिकॉल किया था। हिमाचल प्रदेश ड्रग विभाग ने भी कंपनी का मेन्युफैक्चरिंग लाइसेंस निलंबित कर दिया था। परीक्षण में पाया गाया कि सिरप में डाई-एथिलीन ग्लाइकोल (डीईजी) की मात्र थी। यह औद्योगिक सॉल्वेंट होता है जो शरीर में जाने पर गुर्दे फेल कर देता है। जम्मू-कश्मीर औषधि नियंत्रक विभाग में औषधि विश्लेषक ने कहा कि नियमित रूप में हमारी जांच होती है। इस घटना के बाद से सक्रियता ज्यादा बढ़ी है। दवाओं कंपनियों के औचक सैंपल लिए जाते है।
ड्रग्स तस्करी के मामले में दो आरोपी दोषी करार
वर्ष 2021 में श्रीनगर को छानपोरा में एक ट्रांसपोर्ट कंपनी से 7500 बोतल जेरैक्स सिरप (कोडीन फॉस्फेट) और 9600 जेन कैविट कैप्सूल पकड़े थे। इस तस्करी में संलिप्तता दो लोगों को दोषी ठहराया है।