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Jammu News: एम्स में 250 बिस्तरों के साथ आईपीडी शुरू करने की तैयारी
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एम्स के नेत्र विभाग में मरीज की जांच करते डाक्टर।
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पांचवें बैच में 100 एमबीबीएस सीटों को मंजूरी, पीजी की भी 45 सीटें
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। प्रतिष्ठित एम्स (अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान) जम्मू में आउटडोर सेवा के बाद सितंबर से आईपीडी (इंडोर पेशेंट डोर) शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए 250 बिस्तरों पर विभिन्न विभागों में मरीजों को इंडोर सेवाएं मिलेंगी। मौजूदा कुछ विभागों में ट्रायल पर सीमित इंडोर भर्ती हो रही है। इसके साथ एम्स के पांचवें एमबीबीएस बैच में 100 सीटे मिली हैं। इसी तरह 45 पीजी की सीटों पर भी दाखिला किया जा रहा है।
इससे पहले आरएस पुरा अस्थायी कैंपस में मेक शिफ्ट में एमबीबीएस के बैच के बच्चों को पढ़ाया जा रहा था। एम्स को पहले बैच में 50, दूसरे और तीसरे में 61-61 तथा चौथे में 62 सीटें मिली थीं। लेकिन पांचवें में 100 सीटें मिल गई हैं। इन सीटों के साथ जम्मू कश्मीर में एमबीबीएस सीटों में भी वृद्धि हो गई है। प्रदेश में 1100 से अधिक एमबीबीएस सीटें हैं। एमबीबीएस सीटें बढ़ने से चिकित्सा देखभाल में सेवाएं बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। एम्स में 150 पीजी सीटों की क्षमता है, जिसमें मौजूदा 45 पर दाखिला किया जा रहा है और 37 उम्मीदवारों ने ज्वाइन कर लिया है। एम्स जम्मू के कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर (डॉ) शक्ति कुमार गुप्ता ने बताया कि चरणबद्ध तरीके से एम्स में इंडोर सेवा को शुरू किया जा रहा है। ओपीडी में बेहतर नतीजे मिल रहे हैं। लोगों को बेहतर चिकित्सा सेवाएं देने के लिए सभी उचित कदम उठाए गए हैं।
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एम्स में फंडस फ्लोरेसिन एंजियोग्राफी सेवा शुरू
जम्मू कश्मीर, लद्दाख के साथ पंजाब और हिमाचल प्रदेश के मरीजों को मिलेगी अत्याधुनिक नेत्र चिकित्सा
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। एम्स के नेत्र विभाग में फंडुस फ्लोरेसिन एंजियोग्राफी (एफएफए) सेवा को शुरू किया गया है। इस सेवा से आंखों की स्थितियों का बेहतर प्रबंधन होने के साथ रोगी के परिणामों में सुधार होगा। यह केंद्र विभिन्न रेटिना और यूविया रोगों के निदान और उपचार की योजना बनाने में मदद करेगा।
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इससे पहले इस प्रक्रिया की आवश्यकता वाले मरीजों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, जिससे निदान और उपचार में देरी होती थी। यह उन्नत इमेजिंग तकनीक रेटिना संबंधी बीमारियों का जल्द पता लगाने में सक्षम बनाती है। इससे शीघ्र और प्रभावी उपचार प्रदान करने में मदद मिलती है। एम्स में स्थापित फंडुस कैमरा विस्तृत क्षेत्र की छवियों को कैप्चर कर सकता है और यह अपने सेगमेंट में उपलब्ध सर्वोत्तम उपकरणों में से एक है। इस प्रक्रिया में रक्तप्रवाह में एक फ्लोरोसेंट डाई इंजेक्ट किया जाता है जो रेटिना में रक्त वाहिकाओं के माध्यम से प्रसारित होता है। विशेष कैमरे इन वाहिकाओं से गुजरते समय डाई की विस्तृत छवियों को कैप्चर करते हैं, जिससे नेत्र रोग विशेषज्ञ असामान्यताओं या रुकावटों की पहचान करते हैं। इसमें मधुमेह संबंधी रेटिनोपैथी, उम्र से संबंधित धब्बेदार अध: पतन, रेटिना नस अवरोध और आंख के अन्य संवहनी विकार शामिल हैं। निदेशक प्रो (डॉ) शक्ति गुप्ता ने कहा कि इस आधुनिक सेवा से पंजाब, हिमाचल प्रदेश और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर और लद्दाख के मरीजों को लाभ मिलेगा। इस दौरान नेत्र विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ नितिन कुमार की देखरेख में विभाग की विशेष रेटिना लैब में पहली प्रक्रिया की गई। इस मौके पर संकाय डॉ. भवानी रैना, डॉ. नाजिया अंजुम, डॉ. रिधम नंदा आदि मौजूद रहे।
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। प्रतिष्ठित एम्स (अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान) जम्मू में आउटडोर सेवा के बाद सितंबर से आईपीडी (इंडोर पेशेंट डोर) शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए 250 बिस्तरों पर विभिन्न विभागों में मरीजों को इंडोर सेवाएं मिलेंगी। मौजूदा कुछ विभागों में ट्रायल पर सीमित इंडोर भर्ती हो रही है। इसके साथ एम्स के पांचवें एमबीबीएस बैच में 100 सीटे मिली हैं। इसी तरह 45 पीजी की सीटों पर भी दाखिला किया जा रहा है।
इससे पहले आरएस पुरा अस्थायी कैंपस में मेक शिफ्ट में एमबीबीएस के बैच के बच्चों को पढ़ाया जा रहा था। एम्स को पहले बैच में 50, दूसरे और तीसरे में 61-61 तथा चौथे में 62 सीटें मिली थीं। लेकिन पांचवें में 100 सीटें मिल गई हैं। इन सीटों के साथ जम्मू कश्मीर में एमबीबीएस सीटों में भी वृद्धि हो गई है। प्रदेश में 1100 से अधिक एमबीबीएस सीटें हैं। एमबीबीएस सीटें बढ़ने से चिकित्सा देखभाल में सेवाएं बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। एम्स में 150 पीजी सीटों की क्षमता है, जिसमें मौजूदा 45 पर दाखिला किया जा रहा है और 37 उम्मीदवारों ने ज्वाइन कर लिया है। एम्स जम्मू के कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर (डॉ) शक्ति कुमार गुप्ता ने बताया कि चरणबद्ध तरीके से एम्स में इंडोर सेवा को शुरू किया जा रहा है। ओपीडी में बेहतर नतीजे मिल रहे हैं। लोगों को बेहतर चिकित्सा सेवाएं देने के लिए सभी उचित कदम उठाए गए हैं।
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एम्स में फंडस फ्लोरेसिन एंजियोग्राफी सेवा शुरू
जम्मू कश्मीर, लद्दाख के साथ पंजाब और हिमाचल प्रदेश के मरीजों को मिलेगी अत्याधुनिक नेत्र चिकित्सा
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। एम्स के नेत्र विभाग में फंडुस फ्लोरेसिन एंजियोग्राफी (एफएफए) सेवा को शुरू किया गया है। इस सेवा से आंखों की स्थितियों का बेहतर प्रबंधन होने के साथ रोगी के परिणामों में सुधार होगा। यह केंद्र विभिन्न रेटिना और यूविया रोगों के निदान और उपचार की योजना बनाने में मदद करेगा।
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इससे पहले इस प्रक्रिया की आवश्यकता वाले मरीजों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, जिससे निदान और उपचार में देरी होती थी। यह उन्नत इमेजिंग तकनीक रेटिना संबंधी बीमारियों का जल्द पता लगाने में सक्षम बनाती है। इससे शीघ्र और प्रभावी उपचार प्रदान करने में मदद मिलती है। एम्स में स्थापित फंडुस कैमरा विस्तृत क्षेत्र की छवियों को कैप्चर कर सकता है और यह अपने सेगमेंट में उपलब्ध सर्वोत्तम उपकरणों में से एक है। इस प्रक्रिया में रक्तप्रवाह में एक फ्लोरोसेंट डाई इंजेक्ट किया जाता है जो रेटिना में रक्त वाहिकाओं के माध्यम से प्रसारित होता है। विशेष कैमरे इन वाहिकाओं से गुजरते समय डाई की विस्तृत छवियों को कैप्चर करते हैं, जिससे नेत्र रोग विशेषज्ञ असामान्यताओं या रुकावटों की पहचान करते हैं। इसमें मधुमेह संबंधी रेटिनोपैथी, उम्र से संबंधित धब्बेदार अध: पतन, रेटिना नस अवरोध और आंख के अन्य संवहनी विकार शामिल हैं। निदेशक प्रो (डॉ) शक्ति गुप्ता ने कहा कि इस आधुनिक सेवा से पंजाब, हिमाचल प्रदेश और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर और लद्दाख के मरीजों को लाभ मिलेगा। इस दौरान नेत्र विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ नितिन कुमार की देखरेख में विभाग की विशेष रेटिना लैब में पहली प्रक्रिया की गई। इस मौके पर संकाय डॉ. भवानी रैना, डॉ. नाजिया अंजुम, डॉ. रिधम नंदा आदि मौजूद रहे।