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एसएमजीएस में मार्च में मिलेगा नया प्रसव कक्ष
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जम्मू। शहर के प्रमुख जच्चा-बच्चा अस्पताल एसएमजीएस में प्रसव मामलों में मरीजों को राहत मिलेगी। अस्पताल प्रशासन मार्च में नया प्रसव कक्ष (लेबर रूम) मरीजों को समर्पित करेगा। इसमें एचडीयू (हाई डिपेंडेंसी यूनिट) एक और दो में 4-4 बेड पर हाई ब्लड प्रेशर सहित अन्य गंभीर मरीजों को बेहतर उपचार दिया जाएगा। इससे पहले ऐसे मरीजों को सामान्य यूनिट में ही रखा जाता था।
इसके अलावा नवजात बच्चों के मामलों में कोई गंभीरता होने पर उन्हें अलग से नए विंग में रखा जाएगा। प्रसव कक्ष के साथ गायनी के नए इमरजेंसी यूनिट का विस्तार भी किया जा रहा है। वर्तमान में अस्पताल के प्रसव कक्ष और वार्डों में मरीजों का भारी लोड होने से अक्सर एक ही बेड पर दो-दो मरीजों को लिटाया जा रहा है।
प्रसव कक्ष का विस्तार होने से मरीजों को प्रसव मामलों में अधिक राहत मिलेगी। एनएचएम के प्रोजेक्ट लक्ष्य के तहत इसे अपग्रेड किया गया है। मौजूदा प्रसव कक्ष के 50 बेड पर 100 से अधिक मरीजों को एक समय चिकित्सा दी जाती है। ऐसी परिस्थितियों में मरीजों को उचित देखभाल देने के साथ चिकित्सीय स्टाफ को भी परेशानी होती है। इन व्यवस्थाओं के बीच उन्हें लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ता है। जिला स्तर से मरीजों के रेफर सिस्टम पर अंकुश न लग पाने से एसएमजीएस पर प्रसव मामलों को लेकर लोड में अधिक कमी नहीं आ सकी है।
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अस्पताल में रोजाना 50-70 मामले प्रसव के आ रहे
एसएमजीएस के लेबर रूम में रोजाना चौबीस घंटे में औसतन 50-70 प्रसव के मामले आ रहे हैं। प्रसव के मामलों में कई बार यह आंकड़ा ऊपर पहुंच चुका है। लेबर रूम में 30 के करीब सिजेरियन (सर्जरी) से प्रसव करवाए जा रहे हैं, लेकिन बड़ी बात यह है कि रोजाना जिला स्तर से 25-30 प्रसव के मामले रेफर होकर पहुंच रहे हैं। इनमें अधिकांश में सामान्य प्रसव किया जाता है। दोपहर बाद जिला अस्पतालों से रेफर प्रक्रिया बढ़ जाती है।
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लेबर रूम के विस्तार का लगभग काम पूरा कर लिया गया है और इसे मार्च में शुरू करने की तैयारी है। इसके साथ गायनी विंग का भी विस्तार किया जा रहा है। इससे मरीजों को राहत मिलेगी और स्टाफ के लिए भी परेशानी नहीं होगी।
डॉ. मनोज चलोत्रा, अधीक्षक, एसएमजीएस अस्पताल
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इसके अलावा नवजात बच्चों के मामलों में कोई गंभीरता होने पर उन्हें अलग से नए विंग में रखा जाएगा। प्रसव कक्ष के साथ गायनी के नए इमरजेंसी यूनिट का विस्तार भी किया जा रहा है। वर्तमान में अस्पताल के प्रसव कक्ष और वार्डों में मरीजों का भारी लोड होने से अक्सर एक ही बेड पर दो-दो मरीजों को लिटाया जा रहा है।
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प्रसव कक्ष का विस्तार होने से मरीजों को प्रसव मामलों में अधिक राहत मिलेगी। एनएचएम के प्रोजेक्ट लक्ष्य के तहत इसे अपग्रेड किया गया है। मौजूदा प्रसव कक्ष के 50 बेड पर 100 से अधिक मरीजों को एक समय चिकित्सा दी जाती है। ऐसी परिस्थितियों में मरीजों को उचित देखभाल देने के साथ चिकित्सीय स्टाफ को भी परेशानी होती है। इन व्यवस्थाओं के बीच उन्हें लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ता है। जिला स्तर से मरीजों के रेफर सिस्टम पर अंकुश न लग पाने से एसएमजीएस पर प्रसव मामलों को लेकर लोड में अधिक कमी नहीं आ सकी है।
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अस्पताल में रोजाना 50-70 मामले प्रसव के आ रहे
एसएमजीएस के लेबर रूम में रोजाना चौबीस घंटे में औसतन 50-70 प्रसव के मामले आ रहे हैं। प्रसव के मामलों में कई बार यह आंकड़ा ऊपर पहुंच चुका है। लेबर रूम में 30 के करीब सिजेरियन (सर्जरी) से प्रसव करवाए जा रहे हैं, लेकिन बड़ी बात यह है कि रोजाना जिला स्तर से 25-30 प्रसव के मामले रेफर होकर पहुंच रहे हैं। इनमें अधिकांश में सामान्य प्रसव किया जाता है। दोपहर बाद जिला अस्पतालों से रेफर प्रक्रिया बढ़ जाती है।
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लेबर रूम के विस्तार का लगभग काम पूरा कर लिया गया है और इसे मार्च में शुरू करने की तैयारी है। इसके साथ गायनी विंग का भी विस्तार किया जा रहा है। इससे मरीजों को राहत मिलेगी और स्टाफ के लिए भी परेशानी नहीं होगी।
डॉ. मनोज चलोत्रा, अधीक्षक, एसएमजीएस अस्पताल