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पैलेटिव केयर से अचूक इलाज
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जम्मू। कैंसर, एड्स, स्ट्रोक, कार्डियोवैस्कुलर सहित अन्य जानलेवा बीमारियों का अचूक इलाज संभव हो पाया है। पैलेटिव केयर पद्धति में गंभीर मरीजों का आखिरी स्टेज पर शारीरिक दर्द कम करने के साथ उनके पुनर्वास, आत्मविश्वास बढ़ाने, लक्षणों को पहचाने, व्यवहार में बदलाव, पारिवारिक संवाद, सामाजिक समर्थन, एनजीओ सहयोग आदि पर काम किया जाता है। इसके बेहतर नतीजे सामने आए हैं।
जम्मू संभाग में गांधीनगर अस्पताल में चल रहे एकमात्र पैलेटिव केयर सेंटर में आधुनिक चिकित्सा से मरीज के दर्द को सौ फीसदी तक कम करने का दावा किया गया है। यह आधुनिक चिकित्सा नेशनल पैलेटिव केयर प्रोग्राम, एम्स नई दिल्ली और एशिया पैसिफिक हासपिक नेटवर्क (एपीएचएन) सिंगापुर की निगरानी में दी जा रही है।
पैलेटिव केयर सेंटर का उद्देश्य जानलेवा बीमारियों से ग्रस्त गंभीर मरीजों को आखिरी स्टेज में आधुनिक से कई तरह की परेशानियों से निजात दिलाना होता है। देश के प्रतिष्ठित पीजीआई चंडीगढ़, एम्स नई दिल्ली, टाटा कैंसर इंस्टीट्यूट आदि बड़े चिकित्सा संस्थानों में मरीजों को यह आधुनिक चिकित्सा दी जा रही है। इसमें कैंसर, लिवर, एचआईवी/एड्स, सीओपीडी, डिमेनशिया, स्ट्रोक्स, एएलएस व एंड स्टेज रीनल बीमारियों के मरीजों को इलाज दिया जा रहा है। गत मार्च से शुरू हुए इस सेंटर में अब तक 64 गंभीर मरीजों को पंजीकृत करके उन्हें पैलेटिव केयर चिकित्सा दी गई है। इन मरीजों में 80 फीसदी कैंसर के मरीज हैं। हालांकि इनमें कई मरीजों की एंड स्टेज पर मौत हुई है। लेकिन उन्हें इस पद्धति से आखिरी समय में राहत मिली।
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अस्पताल के वार्ड सात में दस बेड की क्षमता के साथ ओपीडी सेवा को रूम नंबर 215 ओपीडी ब्लाक पेन क्लीनिक इंटरवेंशनल पेन क्लीनिक में शुरू किया गया है। अस्पताल में संभाग के विभिन्न जिलों से गंभीर मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें कई मरीज दूसरे राज्यों से इलाज करवाकर भी यहां पहुंचे हैं। हर साल करीब 2500 कैंसर के नए मामले सामने आ रहे हैं।
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ओपियाड से कम किया जाता है दर्द
पैलेटिव केयर सेंटर के इंचार्ज डॉ. रोहित लाहोरी के अनुसार पैलेटिव केयर पद्धति में पीड़ित के दर्द का पैमाना तय कर उसे पहले इंजेक्शन के माध्यम से ओपियाड (मारफिन) डोज दी जाती है, इसके साथ अन्य पद्धति पर भी काम किया जाता है। उसके बाद दर्द कम होने पर डोज को टेबलेट पर लाकर धीरे-धीरे कम किया जाता है। यह दवाई अस्पताल में निशुल्क उपलब्ध करवाई जाती है।
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जम्मू संभाग में गांधीनगर अस्पताल में चल रहे एकमात्र पैलेटिव केयर सेंटर में आधुनिक चिकित्सा से मरीज के दर्द को सौ फीसदी तक कम करने का दावा किया गया है। यह आधुनिक चिकित्सा नेशनल पैलेटिव केयर प्रोग्राम, एम्स नई दिल्ली और एशिया पैसिफिक हासपिक नेटवर्क (एपीएचएन) सिंगापुर की निगरानी में दी जा रही है।
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पैलेटिव केयर सेंटर का उद्देश्य जानलेवा बीमारियों से ग्रस्त गंभीर मरीजों को आखिरी स्टेज में आधुनिक से कई तरह की परेशानियों से निजात दिलाना होता है। देश के प्रतिष्ठित पीजीआई चंडीगढ़, एम्स नई दिल्ली, टाटा कैंसर इंस्टीट्यूट आदि बड़े चिकित्सा संस्थानों में मरीजों को यह आधुनिक चिकित्सा दी जा रही है। इसमें कैंसर, लिवर, एचआईवी/एड्स, सीओपीडी, डिमेनशिया, स्ट्रोक्स, एएलएस व एंड स्टेज रीनल बीमारियों के मरीजों को इलाज दिया जा रहा है। गत मार्च से शुरू हुए इस सेंटर में अब तक 64 गंभीर मरीजों को पंजीकृत करके उन्हें पैलेटिव केयर चिकित्सा दी गई है। इन मरीजों में 80 फीसदी कैंसर के मरीज हैं। हालांकि इनमें कई मरीजों की एंड स्टेज पर मौत हुई है। लेकिन उन्हें इस पद्धति से आखिरी समय में राहत मिली।
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अस्पताल के वार्ड सात में दस बेड की क्षमता के साथ ओपीडी सेवा को रूम नंबर 215 ओपीडी ब्लाक पेन क्लीनिक इंटरवेंशनल पेन क्लीनिक में शुरू किया गया है। अस्पताल में संभाग के विभिन्न जिलों से गंभीर मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें कई मरीज दूसरे राज्यों से इलाज करवाकर भी यहां पहुंचे हैं। हर साल करीब 2500 कैंसर के नए मामले सामने आ रहे हैं।
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ओपियाड से कम किया जाता है दर्द
पैलेटिव केयर सेंटर के इंचार्ज डॉ. रोहित लाहोरी के अनुसार पैलेटिव केयर पद्धति में पीड़ित के दर्द का पैमाना तय कर उसे पहले इंजेक्शन के माध्यम से ओपियाड (मारफिन) डोज दी जाती है, इसके साथ अन्य पद्धति पर भी काम किया जाता है। उसके बाद दर्द कम होने पर डोज को टेबलेट पर लाकर धीरे-धीरे कम किया जाता है। यह दवाई अस्पताल में निशुल्क उपलब्ध करवाई जाती है।