अनुच्छेद 370 को खारिज करने के लिए याचिका दाखिल
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जम्मू-कश्मीर को अनुच्छेद 370 के तहत मिले विशेष राज्य का दर्जा प्रदान करने तथा वहां के अलग संविधान को र्हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि वहां की विधानसभा के गठन के बाद यह विशेष दर्जा स्वयं ही खत्म हो गया है।
ऐसे में अनुच्छेद 370 को जारी रखने और अलग संविधान संबंधी निर्णय को खारिज किया जाए। अदालत ने इस याचिका पर 19 अक्तूबर को सुनवाई तय की है। मुख्य न्यायाधीश जी. रोहिणी और न्यायमूर्ति जयंत नाथ की खंडपीठ के समक्ष यह जनहित याचिका कुमारी विजय लक्ष्मी झा ने दायर की है।
याची के अधिवक्ता अनिल कुमार झा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने के लिए अनुच्छेद 370 के तहत अस्थायी रूप से प्रावधान किया गया था। इसका उद्देश्य वहां विधानसभा के गठन तक था।
याची ने याचिका में क्या कहा है?
उन्होंने कहा कि वर्ष 1957 में जम्मू-कश्मीर में विधानसभा का गठन हो गया तो अनुच्छेद 370 के तहत किया गया प्रावधान स्वयं ही खत्म हो गया। 65 वर्ष बीतने के बावजूद अनुच्छेद 370 का प्रावधान जारी है।
इसी प्रकार 17 नवंबर 1956 व 26 जनवरी 1957 में जम्मू-कश्मीर के लिए अलग संविधान बना दिया गया। राष्ट्रपति व संसद ने इसे मंजूरी प्रदान नहीं की है, ऐसे में अलग संविधान की कोई वैद्यता नहीं है।
याची ने कहा कि वे जम्मू-कश्मीर के 26 अक्तूबर 1947 को भारत व वहां के राजा हरि सिंह के बीच हुए समझौते को चुनौती नहीं दे रहे। जम्मू-कश्मीर का संविधान भारत के संविधान के आने के बाद अस्तित्व में आया है ऐसे में उसकी कोई भी कानूनी वैद्यता नहीं है।
वहां के राजा व भारत के बीच हुए समझौते के तहत भी ऐसा तय नहीं था कि अलग संविधान या विशेष दर्जा रहेगा। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के समय 28 मई 2014 को समाचार पत्रों से ज्ञात हुआ था कि सरकार ने अनुच्छेद 370 को निरस्त करने का निर्णय लिया है, लेकिन, अब भी जम्मू-कश्मीर में यह लागू है।