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श्रीनगर के शीतलनाथ मंदिर में 31 वर्ष बाद बसंत पंचमी पर हवन, आयोजन में विभिन्न समुदायों के लोग होंगे शामिल
Tue, 16 Feb 2021 01:41 AM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीनगर
Published by: Vikas Kumar
Updated Tue, 16 Feb 2021 01:41 AM IST
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शीतलनाथ मंदिर
- फोटो : amar ujala
कश्मीर घाटी में फिजा बदल रही है। आतंकवाद के चरम के दौर में बंद हो चुके मंदिरों के ताले खुलने लगे हैं। इसी कड़ी में झेलम नदी के किनारे स्थित प्राचीन कालीन शीतलेश्वर भैरव मंदिर में 31 वर्षों के बाद बसंत पंचमी पर मंगलवार को मंदिर की घंटियां गूंज उठेंगी। मंदिर परिसर में हवन कुंड फिर प्रज्जवलित होगा। अनुच्छेद 370 खत्म होने और केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद पहली बार सनातन धर्म शीतलनाथ आश्रम सभा मंदिर में कार्यक्रम आयोजन करवाएगी। इसमें सभी धर्मों को लोगों को शामिल किया जाएगा।
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वर्ष 1990 के दशक में कश्मीरी पंडितों के पलायन के बाद घाटी के कई मंदिरों में ताले लग गए थे। अब इन मंदिरों को धीरे-धीरे खोलने का प्रयास किया जा रहा है। पंडित उपेंद्र हंडू ने बताया कि शीतलेश्वर मंदिर में 90 के दशक से पहले काफी चहल पहल हुआ करती थी। आतंकवाद के शुरू होने के बाद से घाटी के सभी मंदिरों के साथ इसको भी बंद करना पड़ा। शीतलनाथ मंदिर में मंगलवार को 31 वर्षों के बाद हवन किया जाएगा। इसमें पंडितों के अन्य समुदाय के लोग भी भाग लेंगे। हंडू ने बताया यह अवसर कश्मीरी पंडितों के लिए खुशी का है। हम दोबारा हिंदु-मुस्लिम-सिख भाईचारे को कश्मीर में पनपता देखना चाहते हैं। इस मंदिर में बसंत पंचमी के दिन भव्य हवन होता था। इसलिए बसंत पंचमी का दिन ही इसके लिए चुना गया है।
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कश्मीरी पंडितों की गतिविधियों का केंद्र था मंदिर परिसर
इस प्राचीन मंदिर का वर्णन नीलमनपुराण में भी मिलता है। यह मंदिर कश्मीरी पंडितों की सांस्कृतिक व सामाजिक गतिविधियों का केंद्र हुआ करता था। मंदिर परिसर में हिन्दू हाई स्कूल भी है। काश्मीरी पंडितों की आवाज़ का प्रतीक मार्तण्ड अखबार भी शीतलनाथ मंदिर के परिसर से ही निकलता था। कश्मीरी पण्डितों के अनेकानेक धार्मिक उत्सव, और समारोह आदि इसी परिसर में होते थे। शीतलनाथ के मंच से महात्मा गांधी, बलराज मधोक और जवाहरलाल नेहरू जैसे राजनेताओं ने कश्मीरी लोगों को संबोधित किया है।
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घाटी में पचास हजार मंदिर पड़े हैं बंद
कश्मीर घाटी में आतंकवाद बढ़ने के बाद यहां के लगभग सभी मंदिरों में ताले लग गए थे। सितंबर 2019 में अनुच्छेद 370 की समाप्ति के बाद केंद्र सरकार ने ऐसे मंदिरों की संख्या लगभग पचास हजार बताई थी। जिन्हें धीरे-धीरे खोला जा रहा है।