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Jammu News: हस्तशिल्प शोरूम मालिक 7 दिन में हटाएं मशीन निर्मित वस्तुएं
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हस्तशिल्प और हथकरघा विभाग, कश्मीर ने शुक्रवार को एक नोटिस जारी कर कश्मीर के हस्तशिल्प विक्रेताओं को सात दिन का अल्टीमेटम दिया है कि वे अपने शोरूम से टर्की और ईरान से आयातित मशीन निर्मित उत्पादों को अपने शोरूम से हटा लें।
विभाग ने चेतावनी दी है कि ऐसा नहीं करने पर उन्हें अनुचित व्यापार प्रथाओं के लिए ब्लैकलिस्ट और पंजीकरण रद्द कर दिया जाएगा। विभाग द्वारा जारी नोटिस में कहा गया है कि, जम्मू और कश्मीर पर्यटक व्यापार अधिनियम, 1978 के अंतर्गत शोरूम और आउटलेट में कश्मीर हस्तशिल्प उत्पादों की बिक्री के लिए पंजीकरण प्रदान किया गया है।”
पंजीकरण प्रक्रिया के हिस्से के रूप में, हस्तशिल्प विक्रेताओं ने एक शपथपत्र प्रस्तुत किया था, जिसमें अपने व्यापारिक प्रतिष्ठान में केवल वास्तविक कश्मीर हस्तशिल्प उत्पाद प्रदर्शित करने और बेचने का वचन दिया था। नोटिस में नियमों के उल्लंघन अनुभाग के तहत कहा गया है कि हाल की जांचों में पाया गया कि कई विक्रेताओं ने मशीन निर्मित उत्पादों को प्रदर्शित और बेचकर मौजूदा नियमों का उल्लंघन किया है, जिन्हें वास्तविक कश्मीर हस्तशिल्प के रूप में गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया। यह कश्मीर हस्तशिल्प की प्रामाणिकता और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाती हैं।
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हस्तशिल्प और हथकरघा विभाग, कश्मीर के प्रवक्ता ने प्रेस विज्ञप्ति के जरिए कहा कि इन उल्लंघनों के जवाब में, इस कार्यालय ने जम्मू और कश्मीर पर्यटक व्यापार अधिनियम, 1978 के प्रावधानों के अनुसार दोषी विक्रेताओं पर जुर्माना लगाया है। उन्होंने कहा, “हस्तशिल्प और हथकरघा निदेशक, आईआईसीटी निदेशक और गुणवत्ता नियंत्रण प्रभाग के निरीक्षण दस्ते ने निशात, नेहरू पार्क और मुनवराबाद जैसे शहर के केंद्रों में विभिन्न शोरूमों का दौरा किया और शोरूमों को मशीन निर्मित उत्पादों को तत्काल हटाने की चेतावनी दी, ऐसा न करने पर ऐसे शोरूम को ब्लैकलिस्ट और पंजीकरण रद्द किया जाएगा।”
जीआई लेबलिंग और मिसब्रांडिंग चिंताओं के अनुभाग के तहत, नोटिस में कहा गया है कि कश्मीर के कई हस्तशिल्प भारत के भौगोलिक संकेतक (जीआई) अधिनियम, चेन्नई रजिस्ट्री के तहत पंजीकृत हैं ताकि उनकी प्रामाणिकता की रक्षा की जा सके। मिसब्रांडिंग को रोकने और वास्तविक उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए, विभाग ने पीटीक्यूसीसी, आईआईसीटी और गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशालाओं में विभिन्न शिल्पों के लिए जी.आई. आधारित क्यूआर लेबलिंग शुरू की है।
हाल ही में एक विक्रेता ने मशीन निर्मित कालीन पर नकली क्यूआर लेबल लगाकर उसे वास्तविक हस्तनिर्मित उत्पाद के रूप में गलत तरीके से प्रस्तुत किया। नतीजतन, उक्त विक्रेता को ब्लैकलिस्ट और पंजीकरण रद्द कर दिया गया है।
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विभाग ने चेतावनी दी है कि ऐसा नहीं करने पर उन्हें अनुचित व्यापार प्रथाओं के लिए ब्लैकलिस्ट और पंजीकरण रद्द कर दिया जाएगा। विभाग द्वारा जारी नोटिस में कहा गया है कि, जम्मू और कश्मीर पर्यटक व्यापार अधिनियम, 1978 के अंतर्गत शोरूम और आउटलेट में कश्मीर हस्तशिल्प उत्पादों की बिक्री के लिए पंजीकरण प्रदान किया गया है।”
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पंजीकरण प्रक्रिया के हिस्से के रूप में, हस्तशिल्प विक्रेताओं ने एक शपथपत्र प्रस्तुत किया था, जिसमें अपने व्यापारिक प्रतिष्ठान में केवल वास्तविक कश्मीर हस्तशिल्प उत्पाद प्रदर्शित करने और बेचने का वचन दिया था। नोटिस में नियमों के उल्लंघन अनुभाग के तहत कहा गया है कि हाल की जांचों में पाया गया कि कई विक्रेताओं ने मशीन निर्मित उत्पादों को प्रदर्शित और बेचकर मौजूदा नियमों का उल्लंघन किया है, जिन्हें वास्तविक कश्मीर हस्तशिल्प के रूप में गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया। यह कश्मीर हस्तशिल्प की प्रामाणिकता और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाती हैं।
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हस्तशिल्प और हथकरघा विभाग, कश्मीर के प्रवक्ता ने प्रेस विज्ञप्ति के जरिए कहा कि इन उल्लंघनों के जवाब में, इस कार्यालय ने जम्मू और कश्मीर पर्यटक व्यापार अधिनियम, 1978 के प्रावधानों के अनुसार दोषी विक्रेताओं पर जुर्माना लगाया है। उन्होंने कहा, “हस्तशिल्प और हथकरघा निदेशक, आईआईसीटी निदेशक और गुणवत्ता नियंत्रण प्रभाग के निरीक्षण दस्ते ने निशात, नेहरू पार्क और मुनवराबाद जैसे शहर के केंद्रों में विभिन्न शोरूमों का दौरा किया और शोरूमों को मशीन निर्मित उत्पादों को तत्काल हटाने की चेतावनी दी, ऐसा न करने पर ऐसे शोरूम को ब्लैकलिस्ट और पंजीकरण रद्द किया जाएगा।”
जीआई लेबलिंग और मिसब्रांडिंग चिंताओं के अनुभाग के तहत, नोटिस में कहा गया है कि कश्मीर के कई हस्तशिल्प भारत के भौगोलिक संकेतक (जीआई) अधिनियम, चेन्नई रजिस्ट्री के तहत पंजीकृत हैं ताकि उनकी प्रामाणिकता की रक्षा की जा सके। मिसब्रांडिंग को रोकने और वास्तविक उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए, विभाग ने पीटीक्यूसीसी, आईआईसीटी और गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशालाओं में विभिन्न शिल्पों के लिए जी.आई. आधारित क्यूआर लेबलिंग शुरू की है।
हाल ही में एक विक्रेता ने मशीन निर्मित कालीन पर नकली क्यूआर लेबल लगाकर उसे वास्तविक हस्तनिर्मित उत्पाद के रूप में गलत तरीके से प्रस्तुत किया। नतीजतन, उक्त विक्रेता को ब्लैकलिस्ट और पंजीकरण रद्द कर दिया गया है।