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ग्रेनेड हमला साजिश: एनआईए अदालत का आदेश रखा बरकरार, आतंकी गतिविधियों में आरोपी को नहीं मिली जमानत
Sat, 22 Nov 2025 01:06 PM IST
निकिता गुप्ता
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: निकिता गुप्ता
Updated Sat, 22 Nov 2025 01:06 PM IST
सार
जम्मू में नाकाम ग्रेनेड हमले मामले में शाकिर अहमद नायकू की जमानत याचिका को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया और विशेष एनआईए अदालत का आदेश बरकरार रखा। कोर्ट ने कहा कि आरोपी की भूमिका आतंक गतिविधियों में स्पष्ट है, इसलिए जमानत का कोई आधार नहीं है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जम्मू में नाकाम ग्रेनेड हमले मामले में शाकिर अहमद नायकू की जमानत याचिका को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट ने रद्द कर विशेष एनआईए अदालत के आदेश को बरकरार रखा है।
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जस्टिस सिंधु शर्मा और जस्टिस शाहजाद अजीम की खंडपीठ ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री आतंक गतिविधियों में आरोपी की भूमिका की ओर संकेत करती है, इसलिए जमानत का कोई आधार नहीं बनता। अभियोग पक्ष के अनुसार हिजबुल के सक्रिय आतंकी बासित अमीन ने नायकू और रईस अहमद को जम्मू में सुरक्षा बलों पर ग्रेनेड फेंकने के निर्देश दिए थे।
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अगले दिन आरोपी शहर पहुंचे और नायकू को नरवाल में उतारा गया, जहां से उसे गिरफ्तार किया गया। तलाशी में उससे ग्रेनेड बरामद हुआ, जिससे बड़ा हमला टल गया। हाईकोर्ट में नायकू ने दलील दी कि वह सह आरोपी की तरह जमानत का हकदार है और ट्रायल में सहयोग करेगा लेकिन अभियोग पक्ष ने बताया कि आरोप 23 जनवरी 2023 को तय हो चुके हैं और अब तक जिनकी गवाही हुई है, वे ग्रेनेड की बरामदगी सहित केस का समर्थन कर चुके हैं।
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कोर्ट ने कहा कि आरोप यूएपीए के चैप्टर 4 के अंतर्गत आते हैं, इसलिए धारा 43-डी(5) लागू होती है, जिसके तहत अदालत तभी जमानत दे सकती है जब आरोपों को प्रथम दृष्टया गलत माना जाए। सुप्रीम कोर्ट के फैसले गुरविंदर सिंह बनाम पंजाब राज्य का हवाला देते हुए खंडपीठ ने कहा कि यूएपीए मामलों में सामान्य जमानत सिद्धांत लागू नहीं होते।