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Jammu News: छत पर घास, चारों तरफ झाड़ियां और जंग खाए दरवाजे... सुरक्षित नहीं सामुदायिक बंकर
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अजय मीनिया
जम्मू। छत पर घास, चारों तरफ झाड़ियां, छत से टपकता पानी, बिना दरवाजा के खस्ताहाल शौचालय और जंग खाए दरवाजे... ये हालत है अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास पाकिस्तानी गोलाबारी से ग्रामीणों को बचाने के लिए बनाए गए सामुदायिक बंकरों का। कुछ बंकर तो झाड़ियों के बीच दिखते ही नहीं। इनमें जाना खतरे से खाली नहीं। सांप, बिच्छू व अन्य कीड़े-मकोड़ों ने इन्हें अपना घर बना लिया है। कई में पानी, कीचड़ भरा है। अचानक जरूरत पड़ जाए तो इनका इस्तेमाल नहीं हो सकेगा।
आरएस पुरा के सीमावर्ती क्षेत्र के बंकरों को देखा गया तो यह सब दृश्य दिखाई दिया। सीमावर्ती ग्रामीण इन बंकरों को देखकर मन मसोसकर रह जाते हैं। बरसात के मौसम में इन सामुदायिक बंकरों की हालत बद से बदतर हो चुकी है। इनका इस्तेमाल करना है तो रहने लायक इन्हें बनाने में कम से कम एक हफ्ता लग जाएगा। यह बंकर सीमांत गांवों में पाकिस्तान से होने वाली गोलाबारी से बचने के लिए बनाए गए हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तानी गोलियों से बचने के लिए इनका इस्तेमाल भी हुआ था। अब ये जर्जर हो चुके हैं।
कुछ बंकर ऐसे हैं जिनकी छतों से पानी टपकता है। कई बंकरों में पानी और कीचड़ जमा है। इनके गेट टूट चुके हैं या फिर खुले रहते हैं। अंदर जीव जंतु और सांप देखने को मिल जाएंगे। शौचालय बंद ही हो गए हैं। इनका निर्माण इस तरह हुआ कि बारिश होने पर इनमें पानी भरना तय है।
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कोरोटाना गांव के रहने वाले रोहित कुमार का कहना है कि कुछ समय पहले बंकर की छत को दोबारा तैयार किया गया था। तब से जब भी बारिश होती है तो पानी टपकता है। पूरे बंकर में पानी भरा है। इसकी कभी सफाई नहीं होती। छत के ऊपर इतनी घास है कि इस पर सांपों का बसेरा बन गया है।
बंकर कहां है, दिखता ही नहीं
कोरोटाना गांव में ही एक और सामुदायिक बंकर है। साहिल चौधरी का कहना है कि बंकर के चारों तरफ इतनी झाड़ियां हैं कि इसके अंदर जाने का रास्ता ही खो गया है। बंकर कहां है, दिखता ही नहीं। बंकर से ऊंची घास है। हालत इतनी खराब है कि अंदर जाने की भी हिम्मत नहीं होती। न जाने अंदर कितने सांप और अन्य जीव जंतु होंगे।
कीचड़ से भरा विधिपुर का सामुदायिक बंकर
सीमांत गांव विधिपुर में भी सामुदायिक बंकर बना हुआ है। इसका दरवाजा जंग खा चुका है। यह आमतौर पर खुला ही रहता है। शौचालय खराब है। अंदर पूरी तरह से कीचड़ भरा हुआ है। प्रवेश द्वार के सामने घनी झाड़ियां हैं।
नई की योजना, पुराने की अनदेखी
ऑपरेशन सिंदूर के बाद प्रदेश सरकार ने 700 नए बंकर बनाने की घोषणा कर दी लेकिन पहले से बने बंकरों पर ध्यान नहीं है। इनकी अनदेखी है। जम्मू जिले में 1400 बंकर हैं। आरएस पुरा, सुचेतगढ, अब्दुल्लियां, अरनिया, परगवाल, मकवाल, अखनूर सेक्टर में करीब 500 सामुदायिक बंकर हैं। इनकी हालत इस समय जर्जर हो चुकी है।
स्थिति जानने के लिए जल्द होगा सर्वे
बंकरों का रखरखाव स्थानीय लोगों को भी करना होता है जो कि नहीं हो पा रहा। निजी बंकर का तो लोग ध्यान रखते हैं क्योंकि वह उनके घर में होता है। सामुदायिक बंकर की तरफ कोई ध्यान नहीं देता। रही बात इनकी जर्जर हालत और निर्माण में फाल्ट होने की। जल्द ही हम स्वतंत्रता दिवस से पहले पहले बंकरों का सर्वे करवाएंगे। जो भी कमियां है उन्हें दूर करेंगे।
-अनुराधा ठाकुर, एसडीएम आरएस पुरा
पाकिस्तान बताकर गोलाबारी नहीं करेगा, इसलिए जल्द सुध लें
इसमें कोई दो राय नहीं की बंकरों की हालत खराब हो चुकी है। यदि इनका अभी इस्तेमाल करना हो तो नहीं किया जा सकता। लिहाजा इसे तत्काल प्रभाव से सरकार ठीक करवाए क्योंकि पाकिस्तान बताकर गोलाबारी नहीं करेगा और गोलाबारी हो गई तो लोग इनमें कैसे रहेंगे।
-भारत भूषण, डीडीसी जम्मू
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जम्मू। छत पर घास, चारों तरफ झाड़ियां, छत से टपकता पानी, बिना दरवाजा के खस्ताहाल शौचालय और जंग खाए दरवाजे... ये हालत है अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास पाकिस्तानी गोलाबारी से ग्रामीणों को बचाने के लिए बनाए गए सामुदायिक बंकरों का। कुछ बंकर तो झाड़ियों के बीच दिखते ही नहीं। इनमें जाना खतरे से खाली नहीं। सांप, बिच्छू व अन्य कीड़े-मकोड़ों ने इन्हें अपना घर बना लिया है। कई में पानी, कीचड़ भरा है। अचानक जरूरत पड़ जाए तो इनका इस्तेमाल नहीं हो सकेगा।
आरएस पुरा के सीमावर्ती क्षेत्र के बंकरों को देखा गया तो यह सब दृश्य दिखाई दिया। सीमावर्ती ग्रामीण इन बंकरों को देखकर मन मसोसकर रह जाते हैं। बरसात के मौसम में इन सामुदायिक बंकरों की हालत बद से बदतर हो चुकी है। इनका इस्तेमाल करना है तो रहने लायक इन्हें बनाने में कम से कम एक हफ्ता लग जाएगा। यह बंकर सीमांत गांवों में पाकिस्तान से होने वाली गोलाबारी से बचने के लिए बनाए गए हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तानी गोलियों से बचने के लिए इनका इस्तेमाल भी हुआ था। अब ये जर्जर हो चुके हैं।
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कुछ बंकर ऐसे हैं जिनकी छतों से पानी टपकता है। कई बंकरों में पानी और कीचड़ जमा है। इनके गेट टूट चुके हैं या फिर खुले रहते हैं। अंदर जीव जंतु और सांप देखने को मिल जाएंगे। शौचालय बंद ही हो गए हैं। इनका निर्माण इस तरह हुआ कि बारिश होने पर इनमें पानी भरना तय है।
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कोरोटाना गांव के रहने वाले रोहित कुमार का कहना है कि कुछ समय पहले बंकर की छत को दोबारा तैयार किया गया था। तब से जब भी बारिश होती है तो पानी टपकता है। पूरे बंकर में पानी भरा है। इसकी कभी सफाई नहीं होती। छत के ऊपर इतनी घास है कि इस पर सांपों का बसेरा बन गया है।
बंकर कहां है, दिखता ही नहीं
कोरोटाना गांव में ही एक और सामुदायिक बंकर है। साहिल चौधरी का कहना है कि बंकर के चारों तरफ इतनी झाड़ियां हैं कि इसके अंदर जाने का रास्ता ही खो गया है। बंकर कहां है, दिखता ही नहीं। बंकर से ऊंची घास है। हालत इतनी खराब है कि अंदर जाने की भी हिम्मत नहीं होती। न जाने अंदर कितने सांप और अन्य जीव जंतु होंगे।
कीचड़ से भरा विधिपुर का सामुदायिक बंकर
सीमांत गांव विधिपुर में भी सामुदायिक बंकर बना हुआ है। इसका दरवाजा जंग खा चुका है। यह आमतौर पर खुला ही रहता है। शौचालय खराब है। अंदर पूरी तरह से कीचड़ भरा हुआ है। प्रवेश द्वार के सामने घनी झाड़ियां हैं।
नई की योजना, पुराने की अनदेखी
ऑपरेशन सिंदूर के बाद प्रदेश सरकार ने 700 नए बंकर बनाने की घोषणा कर दी लेकिन पहले से बने बंकरों पर ध्यान नहीं है। इनकी अनदेखी है। जम्मू जिले में 1400 बंकर हैं। आरएस पुरा, सुचेतगढ, अब्दुल्लियां, अरनिया, परगवाल, मकवाल, अखनूर सेक्टर में करीब 500 सामुदायिक बंकर हैं। इनकी हालत इस समय जर्जर हो चुकी है।
स्थिति जानने के लिए जल्द होगा सर्वे
बंकरों का रखरखाव स्थानीय लोगों को भी करना होता है जो कि नहीं हो पा रहा। निजी बंकर का तो लोग ध्यान रखते हैं क्योंकि वह उनके घर में होता है। सामुदायिक बंकर की तरफ कोई ध्यान नहीं देता। रही बात इनकी जर्जर हालत और निर्माण में फाल्ट होने की। जल्द ही हम स्वतंत्रता दिवस से पहले पहले बंकरों का सर्वे करवाएंगे। जो भी कमियां है उन्हें दूर करेंगे।
-अनुराधा ठाकुर, एसडीएम आरएस पुरा
पाकिस्तान बताकर गोलाबारी नहीं करेगा, इसलिए जल्द सुध लें
इसमें कोई दो राय नहीं की बंकरों की हालत खराब हो चुकी है। यदि इनका अभी इस्तेमाल करना हो तो नहीं किया जा सकता। लिहाजा इसे तत्काल प्रभाव से सरकार ठीक करवाए क्योंकि पाकिस्तान बताकर गोलाबारी नहीं करेगा और गोलाबारी हो गई तो लोग इनमें कैसे रहेंगे।
-भारत भूषण, डीडीसी जम्मू