फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   govt will study impact of climate change on wildlife

वन्यजीवों पर जलवायु परिवर्तन के असर का होगा अध्ययन

Sun, 04 Oct 2015 08:21 PM IST
Updated Sun, 04 Oct 2015 08:21 PM IST
विज्ञापन
govt will study impact of climate change on wildlife

हिमालयन राज्यों में जलवायु परिवर्तन का वन्यजीवों और इको सिस्टम पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन होगा। मौजूदा समय में सरकार के पास इसके प्रभाव का कोई व्यापक डाटा नहीं।

विज्ञापन


इसलिए केंद्र सरकार हिमालयन राज्यों में इसका अध्ययन कराना चाहती है। इंडियन नेशनल एक्शन प्लान आफ क्लाइमेट चेंज के अधीन भारतीय वन्यजीव संस्थान और विज्ञान एवं तकनीक विभाग मिलकर इस पर काम करेंगे।
विज्ञापन


जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड, सिक्किम, मिजोरम, त्रिपुरा, असम, बेस्ट बंगाल, हिमाचल प्रदेश, अरुणांचल प्रदेश, नगालैंड और मेघालय में 550 करोड़ अध्ययन पर खर्च होंगे। इन राज्यों में पिघलते ग्लेशियर, बेमौसम बारिश और बादल फटने की घटनाओं में पिछले कुछ सालों से बढ़ोतरी हुई है।
विज्ञापन
विज्ञापन


इसका  वन्यजीवों और इको सिस्टम पर कितना प्रभाव पड़ा है, इसकी जानकारी के लिए यह अध्ययन होगा। सूत्रों का कहना है कि 30 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पेरिस यात्रा पर जा रहे हैं।

वहां हिमालयन राज्यों में जलवायु परिवर्तन से वन्यजीवों और इको सिस्टम पर पड़ने वाले प्रभाव पर भी चर्चा होगी। इस चर्चा से पहले केंद्र सरकार चाहती है कि उनके पास हिमालयन राज्यों की पूरी जानकारी हो।

राज्य की 14 वन्य प्रजातियों पर संकट

govt will study impact of climate change on wildlife

इंटरनेशनल यूनियन आफ कंजरवेशन नेचर (आईयूसीएन) की रेड डाटा बुक में जम्मू-कश्मीर की 14 वन्य प्रजातियां संकट में हैं। इनमें स्नो लेपर्ड, कॉमन लेपर्ड, ब्राउन बियर, ब्लैक नेक्ड क्रेन, हंगुल, मरखोर, सिरो, मस्क डियर, चिरू, तिब्बतन गजाल, बेस्टन ट्रैगापन, चीप फिजेंट, हिमालयन ताहर, आइबेक्स, गोल्डन इगल शामिल है। मरखोर, चिरू और हंगुल प्रजातियों पर सबसे अधिक खतरा है।

मौजूदा स्थिति
जानकारी के अनुसार इस समय हंगुल की संख्या 160 से 230 के बीच है। जो दो दशक पहले 3 से पांच हजार के बीच थी। इसी तरह मरखोर की संख्या भी 200 के आसपास है। स्नो लेपर्ड की संख्या तीन दशक पहले 3000 से 3500 के बीच थी। अब इनकी संख्या 400 से 500 के बीच है। ब्लैक नेक्ड क्रेन का सर्वे किया जा रहा है, जिसका परिणाम अभी सामने नहीं आया है।

अध्ययन का लाभ
वन्यजीव विभाग के एक उच्च अधिकारी का कहना है कि अध्ययन होने के बाद भारत के पास कम से कम एक जानकारी होगी कि क्लाइमेट बदलने से इन पर कितना प्रभाव पड़ रहा है और इस प्रभाव को कैसे रोका जाए और कम किया जाए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed