कश्मीर के दंगाईयों को माफ करेगी उमर सरकार
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सागर ने पीडीपी पर गुलाम नबी आजाद से भी दगा करने का अरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अमरनाथ भूमि विवाद पीडीपी की देन थी। सरकार में शामिल इस पार्टी के दो मंत्रियों ने अमरनाथ भूमि अलाट करने में मुख्य भूमिका निभाई, लेकिन जब मामला बिगड़ गया तो इस दल ने गुलाम नबी आजाद का साथ छोड़ दिया।
1996 के चुनाव से पूर्व जब राज्य में आतंकवाद चरम पर था तो इनके नेता मुफ्ती मोहम्मद सईद हमारे नेता फारूक अब्दुल्ला के पास आए और गुजारिश की कि राज्य में जो आग लगी है उसको आप ही काबू कर सकते हैं और आज ये उन्हीं पर उंगली उठाते हैं। पीडीपी पर सागर काफी बरसे। उन्होंने कहा कि राज्य में अफस्पा किसी सरकार के शासनकाल के दौरान आया।
हमारे मुख्यमंत्री ने इसको हटाने के लिए कई बार केंद्र सरकार से बात की। उन्होंने जम्मू-कश्मीर की समस्या का समाधान करने के लिए भी केंद्र सरकार से कहा। पीडीपी ने क्या किया। पीडीपी चुनाव से पूर्व लाभ उठाने के लिए युवकों को आम माफी देने के बात कर रही है जबकि वर्तमान सरकार 2010 और 2011 में भी आम माफी दे चुकी है।
रिहा होंगे घाटी के हजारों दंगाई
कश्मीर में अकसर होने वाले हंगामों के आरोपियों को माफ करने की तैयारी है। विपक्ष के विरोध के बाद भी उमर सरकार उन कश्मीरी युवकों, जिनके खिलाफ पुलिस थानों में मामले दर्ज हैं, को आम माफी देने के मूड में है। जोरदार विरोध के बाद भी सरकार इन दंगाईयों को माफ करने पर अड़ी है।
सदन में हुई बहस के जवाब में ग्रामीण विकास एंव पंचायती राज मंत्री अली मोहम्मद सागर ने कहा, सरकार पत्थरबाजी की घटनाओं में शामिल युवकों के खिलाफ दर्ज मामलों के लिए आम माफी देने की जल्द ही घोषणा करने वाली है। उन्होंने बताया कि वर्तमान सरकार ने 2376 युवकों को पीएसए के तहत गिरफ्तार किया, जबकि 6000 के खिलाफ प्रदर्शनों में भाग लेने पर मामले दर्ज किए गए।
पत्थरबाजों के खिलाफ की गई प्राथमिकी को वापस लेने का सरकार फैसला कर चुकी है और इस संबंध में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला जल्द ही घोषणा करने वाले हैं।
'खूनखराबे के जिम्मेदार मुफ्ती मोहम्मद सईद'
सागर ने कश्मीर में खूनखराबे के लिए मुफ्ती मोहम्मद सईद को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि 1989 में जब देश के गृहमंत्री थे तो राज्य में कुछ ऐसी घटनाएं घटी, जिससे खूनखराब हुआ। 1987 के चुनाव में डा. फारूक अब्दुल्ला के राज्य का मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने ऐसी कई घटनाओं का जिक्र अपने भाषण में किया।
पीडीपी के सदस्यों की टोकाटाकी के बीच सागर ने कहा कि आपके नेता ने आग लगाने का काम किया और अब नारा देते हैं गोली से नहीं बोली से। उन्होंने कहा कि नेशनल कांफ्रेंस का जन्म कश्मीर में शुरू हुए आंदोलन से हुआ जबकि पीडीपी एक एजेंसी की देन है।
हमने बंदूक के सामने कभी हथियार नहीं डाले चाहे वह बंदूक आतंकी की हो अथवा जवान की। अपना स्वार्थ पूरा करने के लिए इनके नेताओं ने आतंकवादियों का साथ लिया और बाद में उन्हीं को चुन चुन कर मरवाया।