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जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन के आसार

Fri, 08 Jan 2016 09:17 PM IST
Updated Fri, 08 Jan 2016 09:17 PM IST
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governor rule is expected in jammu and kashmir

रियासत में फिलहाल राज्यपाल शासन के आसार नजर आ रहे हैं। राज्य शासन की वेब साइट से मंत्रियों के नाम हटा लिए गए हैं। सूत्रों का कहना है कि नए मुख्यमंत्री के शपथ लेने की स्थिति साफ होते न देख राज्यपाल एनएन वोहरा ने रियासत के राजनीतिक हालात की रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी है।

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शुक्रवार को दिनभर तेजी से चले घटनाक्रम के बाद भी देर रात तक महबूबा मुफ्ती के शपथ ग्रहण के समय को लेकर तस्वीर साफ नहीं हो सकी। भाजपा ने अभी तक राज्यपाल के सामने महबूबा के नाम पर औपचारिक रूप से अपनी सहमति दर्ज नहीं कराई है।
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पीडीपी सांसद मुजफ्फर बेग ने साफ किया है कि महबूबा स्व. मुफ्ती मोहम्मद सईद की रस्मे चाहरूम के बाद ही शपथ लेंगी। इस बीच भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव राममाधव दोपहर बाद श्रीनगर पहुंचकर महबूबा से मिले। इसके बाद पार्टी नेताओं से मंत्रणा की और दिल्ली लौट गए।
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राम माधव ने महबूबा से केवल औपचार‌िक मुलाकात की

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महबूबा से मुलाकात के बाद राम माधव ने बताया कि उन्होंने केवल औपचारिक मुलाकात कर शोक संवेदना व्यक्त की है। पार्टी विधायकों के साथ बातचीत कर अगली रणनीति बनाई जाएगी। जो भी फैसला होगा उसे सार्वजनिक किया जाएगा।

यह पूछे जाने पर कि राज्य में राज्यपाल शासन की स्थिति बन रही है तो उन्होंने कहा कि राज्यपाल का जो भी फैसला होगा वह स्वीकार होगा। देर शाम राममाधव तथा प्रदेश प्रभारी अविनाश राय खन्ना की मौजूदगी में हुई भाजपा विधानमंडल दल की बैठक में गठबंधन पर चर्चा हुई।

बैठक में तय किया गया कि केंद्र का फैसला सबको मंजूर होगा। बैठक के बाद पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सत शर्मा ने पत्रकारों से कहा कि यह समय शोक का है। इस वजह से जो भी निर्णय होगा वह फातिहा के बाद ही लिया जाएगा।

गठबंधन की नई आंकड़ेबाजी शुरु हुई

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भाजपा के कुछ नेताओं में इस बात को लेकर भी नाराजी थी कि जब फैसला केंद्र को लेना है तो फिर उन्हें क्यों बुलाया गया। इससे पहले पीडीपी के वरिष्ठ नेताओं ने भी बैठक कर ताजा स्थिति पर चर्चा की थी।

कहा जा रहा है कि महबूबा से मिलने गए राम माधव गठबंधन से जुड़ी कुछ शर्तों के बारे में एक चिठ्ठी भी ले गए थे जिसे महबूबा ने यह कहकर लेने से इनकार कर दिया कि चार दिन के बाद ही इस मुद्दे पर कुछ बातचीत की जाएगी।

भाजपा की ओर से महबूबा को समर्थन देने में देरी होता देख राजनीतिक गलियारों में यह कयासबाजी भी शुरू हो गई है कि कांग्रेस सीपीआई विधायक तारिगामी और कुछ निर्दलीय विधायकों की मदद से भाजपा को अलग कर सरकार गठन का नया विकल्प दे सकती है।

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