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हुर्रियत और कश्मीर के नेताओं ने कश्मीरी बच्चों को मरवाया: राज्यपाल सत्यपाल मलिक

Tue, 22 Oct 2019 07:51 PM IST
Pranjal Dixit न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कटड़ा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कटड़ा Published by: Pranjal Dixit Updated Tue, 22 Oct 2019 07:51 PM IST
सार

  • एसएसवीडी के दीक्षांत समारोह में राज्यपाल ने फिर हुर्रियत व मुख्यधारा की पार्टियों पर बोला हमला
  • कहा, इनमें किसी ने भी आतंकवाद की वजह से अपना नहीं खोया, न ही कोई आतंकवाद से जुड़ा

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Governor Malik Targeted Leaders Of Kashmir and Hurriyat,Leaders Killed Children In Name Of Jannat
जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक - फोटो : फाइल, अमर उजाला

विस्तार

जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने हुर्रियत तथा मुख्यधारा की पार्टियों पर हमला करते हुए कहा कि हुर्रियत, मुख्यधारा की पार्टियों, धार्मिक उपदेशकों और मौलवियों ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल आम कश्मीरियों के बच्चों को मरवाने में किया। इनमें से किसी ने भी आतंकवाद की वजह से अपनों को नहीं खोया। उनके परिवार में से कोई भी आतंकवाद से नहीं जुड़ा।
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राज्यपाल ने आरोप लगाया कि प्रभावी और शक्तिशाली तबकों ने कश्मीरी युवाओं के सपने और उनकी जिंदगियों को तबाह कर दिया। उन्होंने लोगों से अपील की कि वह इस सच्चाई को समझें और राज्य में शांति और समृद्धि लाने के केंद्र सरकार के प्रयासों में शामिल हो जाएं। वे मंगलवार को कटड़ा में श्री माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय के सातवें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। 
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उन्होंने कहा कि इन सभी के अपने बच्चों का करियर अच्छा चल रहा है। सभी विदेश में पढ़ रहे हैं। लेकिन आम कश्मीरी व्यक्ति के बच्चों को बताया गया कि स्वर्ग का रास्ता मारे जाने में है। नेता, नौकरशाह, प्रभावी और शक्तिशाली लोगों ने युवाओं के सपने और उनके जीवन को बर्बाद कर दिया। कहा कि राज्यपाल बनने के बाद मैंने खुफि या एजेंसियों से कोई इनपुट नहीं लिया। वे दिल्ली या हमें सच नहीं बताते हैं। 
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मैंने सीधे तौर पर 150 से 200 कश्मीरी युवाओं से बात की और कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में उन्हें पहचानने की कोशिश की जो राष्ट्रगान पर खड़े नहीं होते हैं। मैंने उनसे और 25 से 30 साल के आयु वर्ग वाले उन लोगों से बात की जिनके सपने कुचल दिए गए। वे भ्रमित हैं और गुस्से में हैं। वे न तो हुर्रियत चाहते हैं, न हमें चाहते हैं और न केंद्र सरकार को या स्वायत्तता को क्योंकि उन्हें बताया गया है कि स्वर्ग जाने का रास्ता मरने में है। मैंने ऐसे युवाओं से कहा कि उनके पास कश्मीर में पहले से ही स्वर्ग है। 

उन्होंने दिग्भ्रमित युवाओं से कहा कि उन्हें दो जन्नत मिल सकती है। हालांकि, यह उनका धार्मिक मामला है जिस पर वह नहीं बोलना चाहते। लेकिन वह उन्हें दो जन्नत देने को तैयार हैं। एक यहां रहते हुए और दूसरा मरने के बाद। जहांगीर ने कश्मीर को जन्नत बताया था। इस वजह से यहां रहने वाले को जन्नत नसीब है। यदि सच्चे मुसलमान के रूप में मरे तो निश्चित रूप से दूसरा जन्नत मिलेगा। 

धन का सही इस्तेमाल होता तो छतें सोने की बन गईं होतीं
राज्यपाल ने कहा कि 22 हजार कश्मीरी युवा राज्य से बाहर शिक्षा हासिल कर रहे हैं। आखिर उन्हें शिक्षा के लिए राज्य से बाहर क्यों जाना पड़ता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि हम पिछले कई दशकों से राज्य में मानक शिक्षा छात्रों को मुहैया नहीं करा पाए हैं। कश्मीर में भेजे गए धन का इस्तेमाल अगर नेता और नौकरशाह सही तरीके से करते तो आपके घरों की छतें सोने की बन गई होतीं।

दिल्ली कहीं भी कश्मीर को लेकर नहीं जा रहा
राज्यपाल ने कहा कि मैं कश्मीर के लोगों से यह कहना चाहता हूं कि सच को समझने की कोशिश करो। दिल्ली कहीं भी कश्मीर को लेकर नहीं जा रहा है। आप लोग तरक्की करो, हम आपके साथ हैं। इसलिए आगे आएं और नए दौर का अंग बनें। कश्मीर को विकास के पथ पर ले चलें। 

किसी के पास स्वेटर नहीं, नेताओं के पास हर जगह मकान
राज्यपाल ने कहा कि वे अमरनाथ गए थे तो स्थानीय युवकों के पास स्वेटर तक नहीं था, लेकिन यहां के राजनीतिज्ञों के पास कश्मीर, दिल्ली व दुबई में भी मकान हैं। होटलों तथा कारोबारी प्रतिष्ठानों में इन्हीं की भागीदारी है। पिछले साल उन्होंने 53 कालेजों को मंजूरी दी थी। 50 और नए कालेज खोले जाने हैं। 242 स्कूलों को एक दिन में अपग्रेड कर हायर सेकेंडरी स्कूल कर दिया गया। 

राज्यपाल का पद काफी कमजोर
मलिक ने कहा कि राज्यपाल का पद काफी कमजोर होता है क्योंकि उसे न तो प्रेस कांफ्रेंस करने का अधिकार होता है और न तो दिल से बात कहने की आजादी। वह तीन दिनों तक भयभीत रहते हैं कि उनके किसी शब्द से दिल्ली में कोई नाराज न हो जाए। उन्होंने फिर दोहराया कि समाज का एक तबका सड़े हुए आलू की तरह है क्योंकि वह न तो दान देते हैं और न ही शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए आगे आते हैं। 
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