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जम्मू-कश्मीरः केंद्र का बड़ा दांव, किसानों से सेब खरीदकर सीधे खाते में होगा भुगतान

Tue, 10 Sep 2019 04:58 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू/श्रीनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू/श्रीनगर Published by: प्रशांत कुमार Updated Tue, 10 Sep 2019 04:58 PM IST
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government will buy apple from Jammu and Kashmir, money will directly deposited in farmers accounts
घाटी में सेब की फसल - फोटो : बासित जरगर

घाटी के सेब की खुशबू और मिठास इस बार भी देश के आम लोगों की पहुंच में होगी। सरकार ने जम्मू-कश्मीर से सेब की सीधी खरीद करने का फैसला किया है। साथ ही सेब उत्पादकों को उनका भुगतान बैंक खाते के जरिये करने की घोषणा की है।

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राज्य के विशेष दर्जे को समाप्त किए जाने के बाद उत्पन्न हालात के बीच राज्य प्रशासन ने कश्मीरी सेब को देशभर की मंडियों में पहुंचाने के पर्याप्त इंतजाम किए हैं। इसके तहत दक्षिणी और उत्तरी कश्मीर में मंडियों में ट्रांसपोर्टेशन तथा अन्य संसाधनों की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। 
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सेब उत्पादकों के लिए समर्थन मूल्य की घोषणा की भी तैयारी है। इससे जुड़े कारोबारियों को उम्मीद है कि अगले कुछ दिनों में स्थिति में और सुधार आएगा और बिना किसी रोक टोक के कश्मीरी सेब देशभर की मंडियों में पहुंचेगा।
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दक्षिणी कश्मीर के सभी जिलों अनंतनाग, पुलवामा, शोपियां व कुलगाम, उत्तरी कश्मीर में बारामुला व कुपवाड़ा तथा श्रीनगर व बडगाम में सेब की खेती होती है। डिलेशियस, रेड एप्पल व रसभरी प्रजाति के सेब अब लगभग तैयार हो चले हैं। शोपियां के सेब सबसे अच्छी प्रजाति के माने जाते हैं। यहां 15 सितंबर से फसल तोड़ने की तैयारी है। 

घाटी में औसतन 22 लाख टन सेब का सालाना उत्पादन होता है। इससे सात लाख किसान जुड़े हुए हैं। राजभवन से जुड़े सूत्रों ने बताया कि पांच अगस्त को विशेष दर्जे की समाप्ति के बाद उत्पन्न हालात के बीच राज्य सरकार ने इससे जुड़े किसानों को राहत देने के लिए समर्थन मूल्य की घोषणा करने का फैसला किया है।

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रातों-रात सेब लदे ट्रकों को निकालने की तैयारी

फल उत्पादकों को किसी प्रकार के नुकसान से बचाने के लिए नैफेड से बातचीत की गई है जो कश्मीर में 500 करोड़ रुपये का निवेश करेगा। वह कुल उत्पादन का 50 फीसदी खरीद करेगा। सभी जिला प्रशासन को हिदायत दी गई है कि वे सेब के लिए मंडियों तथा माल ढुलाई के लिए पर्याप्त साधन की व्यवस्था करें। साथ ही सुरक्षा का मुकम्मल प्रबंध हो ताकि किसी प्रकार की गड़बड़ी न होने पाए। 

मंडियों में सेब से लदे ट्रकों को रातोंरात घाटी से बाहर निकालने की तैयारी है ताकि किसी प्रकार की गड़बड़ी न होने पाए। यह आशंका जताई जा रही है कि दिन के उजाले में फल लदे ट्रकों पर पथराव हो सकता है। इस वजह से रात के अंधेरे में जवाहर टनल के पार सेब लदे ट्रकों को भेज दिया जाए।

वर्ष 2016 में जब हिजबुल आतंकी बुरहान वानी मारा गया था तो उस समय भड़की हिंसा के बाद भी फल से लदे ट्रकों को रात में ही घाटी से बाहर के लिए रवाना किया जाता था। हालांकि, इस बार किसी भी आतंकी संगठन या किसी अनय संगठन की ओर से फल उत्पादकों को किसी प्रकार की धमकी नहीं दी गई है। इसके बाद भी मुकम्मल तैयारी की जा रही है ताकि कारोबार पर कोई असर न पड़े।

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