फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   government doesnot have sufficient funds to make up needs of budget

सरकार ने बजट में किए हैं ये प्रावधान पर खाली है खजाना, पढ़ें पूरी खबर

Thu, 12 Jan 2017 07:24 PM IST
राघवेंद्र नारायण मिश्र, अमर उजाला/जम्मू
राघवेंद्र नारायण मिश्र, अमर उजाला/जम्मू Updated Thu, 12 Jan 2017 07:24 PM IST
विज्ञापन
government doesnot have sufficient funds to make up needs of budget
money

जम्मू कश्मीर के वित्त मंत्री डा. हसीब द्राबू ने नए बजट में बेहतर बजटीय प्रबंधन की व्यवस्था तो की है, लेकिन आंतरिक संसाधन बढ़ाने का कोई ठोस इंतजाम नहीं हो पाया है। खाली खजाने के बूते सोने के महल के हसीन सपने को जमीं पर उतारना चुनौतीपूर्ण होगा।

विज्ञापन


द्राबू के बजट भाषण में भी कश्मीर में अनिश्चितता के माहौल की चिंता नजर आई। बजट में कई नई व्यवस्था है जो अन्य राज्यों और केंद्र सरकार के लिए भी अनुकरणीय हो सकती है, लेकिन सीमित संसाधनों के कारण इन फैसलों को रियासत में पूरी तरह लागू करने में दिक्कतें पेश आएंगी। 
विज्ञापन


द्राबू की सफलता है कि उन्होंने कर्मचारी वर्ग को सातवें वित्त आयोग पर सवा साल के इंतजार के लिए राजी कर लिया है। अब कर्मचारी को केंद्र के समान वेतनमान का फायदा एक अप्रैल 2018 से ही मिल पाएगा। 

विज्ञापन
विज्ञापन

बजट के नए प्रावधानों की सफलता संसाधनों पर निर्भर

government doesnot have sufficient funds to make up needs of budget
विधानसभा में बजट पेश करते वित्तमंत्री - फोटो : Amar Ujala

कैजुअल वर्करों को नियमित करने का एलान हुआ है, लेकिन यह निर्णय भी चरणबद्ध तरीके से ही लागू हो सकेगा। बजट में ट्रेजरी सिस्टम को खत्म करने का एलान नया है। वेतन और लेखा विभाग इसकी जगह लेगा। इस बार जनवरी में बजट पेश कर द्राबू ने कहा कि 10 फरवरी तक बजट की आधी राशि जारी कर दी जाएगी और 20 फरवरी तक यह विभागों को मिल जाएगा। मई तक हर प्रोजेक्ट की टेंडरिंग हो जाएगी। इस तरह नए वित्त वर्ष के लिए पहले दिन एक अप्रैल से ही काम हो सकेगा। 

बजट के नए प्रावधानों की सफलता संसाधनों पर निर्भर करेगी, लेकिन आंतरिक संसाधन बढ़ाने को कोई ठोस व्यवस्था बजट में नहीं दिखती है। आलम यह है कि जम्मू कश्मीर के बजट का 43 प्रतिशत हिस्सा केंद्रीय अनुदान पर निर्भर है और केंद्रीय करों के हिस्से के रूप में 13 प्रतिशत को इसमें जोड़ दें तो 56 फीसदी राशि के लिए रियासत को केंद्र का मुंह ताकना पड़ेगा।

राज्य अपने करों और अन्य स्रोतों से सिर्फ 20 प्रतिशत राशि का ही इंतजाम कर सकता है। इस तरह 24 प्रतिशत राशि कर्ज से जुटानी होगी। आमदनी और कर्ज में 4 हजार करोड़ का अंतर है, जिसकी भरपाई के लिए बजट में कोई जिक्र नहीं है। 

80 हजार करोड़ के बजट में वेतन और पेंशन पर 31% हिस्सा

government doesnot have sufficient funds to make up needs of budget
विधानसभा में बजट पेश करने जाते वित्तमंत्री - फोटो : अमर उजाला

कुल 80 हजार करोड़ के बजट में से वेतन और पेंशन पर 31 प्रतिशत हिस्सा चला जाएगा। कर्ज के सूद 6 प्रतिशत लील लेगा। पूंजीगत स्थापना खर्च 39 प्रतिशत और अन्य खर्च 12 प्रतिशत है। रियासत के पास बिजली उत्पादन की भरपूर संभावनाएं हैं, लेकिन इस बार भी बिजली खरीद पर बजट का 12 प्रतिशत धन खर्चना पड़ेगा।

बजट पेश करने के बाद उत्साह में वित्त मंत्री द्राबू ने आंगनबाड़ी और केंद्र के अन्य प्रोजेक्टों के कर्मचारियों को समय पर वेतन देने का भी एलान किया है, लेकिन जरूरी आंतरिक संसाधनों की बढ़ोतरी पर बजट मौन है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed