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कश्मीर में शाम छह बजे के बाद ऐसी कोई जगह नहीं जहां लोग जा सकें, खुलेगा मल्टीप्लेक्स: मलिक
Sun, 23 Jun 2019 12:23 PM IST
Pranjal Dixit
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीनगर
Published by: Pranjal Dixit
Updated Sun, 23 Jun 2019 12:23 PM IST
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राज्यपाल सत्यपाल मलिक
- फोटो : अमर उजाला
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जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा कि घाटी में एक मल्टीप्लेक्स खोलने की कोशिशें जारी हैं। उन्होंने कहा कि मुझे अफसोस है कि कश्मीर में शाम छह बजे के बाद करने के लिए कुछ नहीं है। सिनेमा घरों को बंद हुए दशकों हो गए हैं। ऐसी कोई जगह नहीं है जहां आप जा सकते हैं। कश्मीर में सिनेमा हॉल आतंकवादी संगठनों ने 1989 में बंद करा दिया था। उन्होंने कहा कि अब हम मल्टीप्लेक्स खोलने की कोशिश कर रहे हैं।
राज्यपाल ने कहा कि यहां के लोग इतने जीवंत हैं कि छुट्टियों में वे लंच के लिए पार्क तथा खुले मैदान में जाते हैं। हम उन्हें मनोरंजन के लिए स्थान उपलब्ध कराने में भी सक्षम नहीं हैं। अब हम मल्टीप्लेक्स खोलने की तैयारी में हैं। कुछ मित्र हैं जो मल्टीप्लेक्स खोलने के लिए दृढ़ निश्चय हैं।
घाटी में दूरदर्शन ने विश्वसनीय समाचार तथा सूचना देने की आवश्यकता को जरूर पूरा किया है जहां अफवाहें अक्सर समाचार बन जाया करती हैं। यहां ऐसी कई अफवाहें फैलती हैं जिसे शांत करने में तीन दिन तक लग जाते हैं। गांवों में परंपरागत मनोरंजन के कई साधन हैं, लेकिन शहरों में ऐसा कुछ भी नहीं है। वे मनोरंजन के लिए टीवी तथा रेडियो पर निर्भर हैं।
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डीडी कशीर ने इस आवश्यकता को काफी हद तक पूरा कर दिया है। ज्ञात हो कि 1989 में आतंकी संगठनों की वजह से घाटी में सिनेमा हाल बंद हो गए थे। कुछ हालों को खोलने की कोशिश की गई थी, लेकिन ग्रेनेड हमले की वजह से इन्हें फिर बंद करना पड़ा।
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राज्यपाल ने कहा कि यहां के लोग इतने जीवंत हैं कि छुट्टियों में वे लंच के लिए पार्क तथा खुले मैदान में जाते हैं। हम उन्हें मनोरंजन के लिए स्थान उपलब्ध कराने में भी सक्षम नहीं हैं। अब हम मल्टीप्लेक्स खोलने की तैयारी में हैं। कुछ मित्र हैं जो मल्टीप्लेक्स खोलने के लिए दृढ़ निश्चय हैं।
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घाटी में दूरदर्शन ने विश्वसनीय समाचार तथा सूचना देने की आवश्यकता को जरूर पूरा किया है जहां अफवाहें अक्सर समाचार बन जाया करती हैं। यहां ऐसी कई अफवाहें फैलती हैं जिसे शांत करने में तीन दिन तक लग जाते हैं। गांवों में परंपरागत मनोरंजन के कई साधन हैं, लेकिन शहरों में ऐसा कुछ भी नहीं है। वे मनोरंजन के लिए टीवी तथा रेडियो पर निर्भर हैं।
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डीडी कशीर ने इस आवश्यकता को काफी हद तक पूरा कर दिया है। ज्ञात हो कि 1989 में आतंकी संगठनों की वजह से घाटी में सिनेमा हाल बंद हो गए थे। कुछ हालों को खोलने की कोशिश की गई थी, लेकिन ग्रेनेड हमले की वजह से इन्हें फिर बंद करना पड़ा।