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गोवा मुक्ति दिवस: गोवा की आजादी के लिए लड़े थे जम्मू-कश्मीर के 20 लोग, सही थीं यातनाएं

Tue, 19 Dec 2023 06:04 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: kumar गुलशन कुमार Updated Tue, 19 Dec 2023 06:04 PM IST
सार

92 वर्षीय आत्मा राम ने बताया कि 15 अगस्त 1947 को देश आजाद हो गया था, लेकिन गोवा आजाद नहीं था। यहां पर पुर्तगालियों का शासन था। लोगों पर अत्याचार हो रहे थे।

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Goa Liberation Day: 20 people from Jammu and Kashmir fought for the independence of Goa, the tortures were tru
गोवा स्वतंत्रता संग्राम (फाइल) - फोटो : Social Media

विस्तार

गोवा की आजादी के लिए 1954 में जम्मू-कश्मीर से गया 20 लोगों का दल पूरे दमखम के साथ लड़ा था। 15 अगस्त 1947 को देश आजाद हुआ, लेकिन गोवा में पुर्तगाली शासन ही रहा। लगभग 451 वर्षों के बाद 19 दिसंबर 1961 में गोवा को भारतीय सेना ने कब्जे में लिया। यह सब आरएसएस के आंदोलन और भारत सरकार के दबाव के कारण संभव हो सका। जम्मू-कश्मीर से गोवा गए दल में पंडित आत्मा राम निवासी पलौड़ा, सुरेंद्र मोहन शर्मा निवासी तोफशेरखानिया और सुरजीत गुप्ता निवासी रिहाड़ी शामिल थे।

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92 वर्षीय आत्मा राम ने बताया कि 15 अगस्त 1947 को देश आजाद हो गया था, लेकिन गोवा आजाद नहीं था। यहां पर पुर्तगालियों का शासन था। लोगों पर अत्याचार हो रहे थे। डर का माहौल था। देशभर में लोग गोवा के हालात से परिचित थे। गोवा में पुर्तगालियों से बचते बचाते आरएसएस से स्वयंसेवी पहुंचते और लोगों की समस्याओं को सुनते। 
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लोगों ने स्वयंसेवियों को आपबीती बताई। इसके बाद आरएसएस को आंदोलन करने के लिए कहा गया। इसके बाद देशभर से स्वयंसेवियों ने लड़ाई में भाग लिया। जम्मू-कश्मीर से 20 लोग गोवा पहुंचे। शामतवाड़ी पहुंचने पर लोगों ने बताया कि दिन में पैदल मत चलना। रात के समय पैदल यात्रा करना। इसके बाद दल दिन में आराम करता, फिर रात के समय आगे बढ़ता। कई दिनों तक पैदल चले, जहां पर आंदोलन शुरू हुआ।
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पुर्तगाली सेना ने दल के सदस्यों को पकड़ लिया और यातनाएं दीं। पुर्तगालियों ने दल के सदस्यों को महाराष्ट्र में समुद्र किनारे छोड़ा। दल के सदस्य काफी सहमे हुए थे। कुछ पता नहीं चल रहा था कि कहां जाना है। चारों तरफ पानी ही पानी दिख रहा था। 

इसी दौरान भारतीय सेना पहुंची। यहां से सेना ने दल को महाराष्ट्र में एक अस्पताल में दाखिल करवाया। एक माह तक इलाज चला। इसके बाद वापस जम्मू-कश्मीर पहुंचे थे। इसके बाद सरकार और आरएसएस के सत्याग्रह के कारण 19 दिसंबर 1961 को गोवा आजाद हुआ, जिसे सेना ने अपने कब्जे में लिया।

आजादी के आंदोलन का गोवा पर पड़ा था असर

भारत में आजादी के आंदोलन का थोड़ा और कुछ हद तक असर गोवा में भी पड़ा। 1940 के दशक में गोवा के कुछ निवासियों ने भी सत्याग्रह में भाग लिया। 1947 में भारत को अंग्रेजों से आजादी मिलने के बाद भी पुर्तगालियों ने यह कहते हुए गोवा छोड़ने से इनकार कर दिया कि गोवा सांस्कृतिक और धार्मिक रूप से शेष भारत से अलग है। 

भारत सरकार ने तब कोई सैन्य कार्रवाई नहीं की, क्योंकि स्वतंत्र रियासतों को भारत के साथ मिलाया जा रहा था। इसलिए उसने पुर्तगालियों के साथ कई कूटनीतिक वार्ताएं की। वार्ता विफल होने के बाद तत्कालीन सरकार ने गोवा पर कब्ज़ा करने के लिए सैन्य विकल्प चुना।

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