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दो माह से जीएमसी के मरीजों को नाश्ता नहीं

Thu, 30 Jul 2015 08:07 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू Updated Thu, 30 Jul 2015 08:07 PM IST
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GMC patients did not have breakfast for 2 months

जीएमसी सहित एसोसिएटेड अस्पतालों में मरीजों को दो माह से डाइट का नाश्ता नहीं मिल पाया है। पहली जून को पौने दो करोड़ रुपये की जीएमसी प्रशासन पर देनदारी के बाद ठेकेदारों ने नाश्ते को बंद कर दिया था, लेकिन दो माह में भी मरीजों के लिए जीएमसी प्रशासन नाश्ते की कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं कर पाया है।

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देनदारी का बोझ भी लगातार बढ़ता जा रहा है। डाइट में लंच और डिनर पर भी संकट के बादल बरकरार हैं। जीएमसी के अधीक्षक डा. रविंद्र रतनपाल के अनुसार डाइट के भुगतान के लिए सरकार को लिखा गया है, लेकिन अभी फंड्स जारी नहीं हुए हैं।
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मरीजों को दो माह से डाइट के नाश्ते में आधा लीटर दूध, चीनी का पाउच और चार ब्रेड पीस से वंचित रहना पड़ रहा है। इससे एसोसिएटेड अस्पतालों में जीएमसी, एसएमजीएस, सीडी, साइक्रेटरी और सुपर स्पेशलिटी में रोजाना 1100-1200 मरीज प्रभावित हो रहे हैं।
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खासकर दूरवर्ती इलाकों से एसोसिएटेड अस्पतालों में इलाज के लिए पहुंच रहे मरीजों को नाश्ते के लिए बाजार का रुख करना पड़ रहा है। इसमें बिना कैंटीन वाले अस्पतालों में सुपर स्पेशलिटी, सीडी, साइक्रेटरी अस्पताल में मरीजों के साथ तीमारदारों को ज्यादा दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं।

इन अस्पतालों में कैंटीन की सुविधा अभी तक शुरू नहीं हो पाई है। जीएमसी में अपने मरीज के साथ पहुंचे पुंछ निवासी रोशनदीन ने कहा कि सरकार मरीजों को उचित चिकित्सा और बुनियादी सुविधाएं मुहैया करवाने के दावे कर रही है, मगर जीएमसी में बंद डाइट को देखकर हालात विपरीत हैं।


डाइट में मिलने वाले नाश्ते से दूरवर्ती इलाकों के मरीजों को आर्थिक राहत मिलती है, मगर नाश्ता बंद हो जाने से उनकी जेब पर बोझ बढ़ा है। एक अन्य तीमारदार राजीव कुमार ने कहा कि सरकार को डाइट दोबारा बहाल करने के लिए गंभीरता दिखानी चाहिए। ऐसे हालात में भविष्य में लंच और डिनर पर भी ताला लग सकता है।

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