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Jammu News: जीएमसी में अटेंडेंट शेड तोड़ गया दम, पानी की दुर्गंध से सांस लेना तक मुश्किल
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जीएमसी की पुरानी इमरजेंसी के साथ अस्पताल परिसर में मरीजों और तीमारदारों के बैठने के लिए अटेंडेंट शेड का निर्माण किया गया है, लेकिन खस्ताहाल के चलते लाभ नहीं मिल पा रहा। शेड के नीचे कई जगह पत्थर निकले हैं, जिससे जमीन उबड़ खाबड़ हो गई है। सीमित बेंचों के ऊपर लगे पंखे भी बंद हैं, साथ ही गटर का पानी खुले में बह रहा है। दुर्गंध के कारण सांस लेना तक मुश्किल है। इसके अलावा कैफेटेरिया में डॉक्टरों के साथ लोग खाना खाते हैं। शेड के पास अल्ट्रासाउंड, एक्सरे और सिटी स्कैन जैसे महत्वपूर्ण यूनिट है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि प्रबंधन खुद मरीज बन गया है।
धूप और बारिश में राहत देने के लिए कोविड से पहले शेड को नई इमरजेंसी के बाहर स्थापित किया था। यहां तीमारदार बैठकर इंतजार या आराम करते हैं। मगर जगह की कमी के कारण शेड को पुरानी इमरजेंसी के साथ अस्पताल परिसर में लगा दिया गया। अब शेड की हालत खस्ता है। इसके नीचे जमीन पर लोग लेटकर आराम कर रहे हैं। गिने-चुने बेंच भी राहत नहीं दे रहे। शेड के एक बड़े हिस्से पर पत्थर पड़े हैं, जिससे हादसा होने की आशंका है।
मरीजों और तीमारदारों की परेशानी उनकी जुबानी
शेड के नीचे बैठे तीमारदार विशाल दुबे निवासी विजयपुर ने बताया कि मरीज को अल्ट्रासाउंड के लिए आधे घंटे बाद बुलाया है, इसलिए वह आराम करने के लिए यहां बैठ गए, लेकिन शेड की हालत काफी खराब है। बुजुर्ग मरीज को पत्थरों के बीच से मुश्किल से लाया गया। गर्मी के बीच पंखे भी बंद हैं। मरीज रानी देवी ने बताया कि शेड के साथ गटर का खुला पानी बह रहा है, जिससे स्वास्थ्य पर असर पड़ता है। आसपास गंदगी का आलम है। तीमारदार थन्नामंडी निवासी जेबा बेगम ने कहा कि अस्पताल में पहले से ही लोग परेशानी की हालत में पहुंचते हैं, ऊपर से ऐसी व्यवस्था से अधिक परेशानी होती है। शेड के आसपास गंदगी के कारण खाना भी नहीं खा सकते। मरीज के साथ आए तीमारदार फ्लां मंडाल निवासी जीवन ने कहा कि सार्वजनिक स्थलों पर बेहतर व्यवस्था होनी चाहिए, लेकिन जीएमसी में अटेंडेंट शेड के नीचे हालत विपरीत है।
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सैकड़ों पीड़ित और बेंच तीन
सामाजिक कार्यकर्ता सोमनाथ डबगोत्रा ने कहा कि शेड के साथ एक्सरे, सिटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड जैसे महत्वपूर्ण यूनिट है, जिससे बड़ी संख्या में लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में आराम करने के लिए शेड ही मुख्य साधन होता है, लेकिन शेड के नीचे दो से तीन बेंच लगे हैं, जिससे चाहकर भी तीमारदार बैठ नहीं सकते।
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जम्मू। जीएमसी की पुरानी इमरजेंसी के साथ अस्पताल परिसर में मरीजों और तीमारदारों के बैठने के लिए अटेंडेंट शेड का निर्माण किया गया है, लेकिन खस्ताहाल के चलते लाभ नहीं मिल पा रहा। शेड के नीचे कई जगह पत्थर निकले हैं, जिससे जमीन उबड़ खाबड़ हो गई है। सीमित बेंचों के ऊपर लगे पंखे भी बंद हैं, साथ ही गटर का पानी खुले में बह रहा है। दुर्गंध के कारण सांस लेना तक मुश्किल है। इसके अलावा कैफेटेरिया में डॉक्टरों के साथ लोग खाना खाते हैं। शेड के पास अल्ट्रासाउंड, एक्सरे और सिटी स्कैन जैसे महत्वपूर्ण यूनिट है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि प्रबंधन खुद मरीज बन गया है।
धूप और बारिश में राहत देने के लिए कोविड से पहले शेड को नई इमरजेंसी के बाहर स्थापित किया था। यहां तीमारदार बैठकर इंतजार या आराम करते हैं। मगर जगह की कमी के कारण शेड को पुरानी इमरजेंसी के साथ अस्पताल परिसर में लगा दिया गया। अब शेड की हालत खस्ता है। इसके नीचे जमीन पर लोग लेटकर आराम कर रहे हैं। गिने-चुने बेंच भी राहत नहीं दे रहे। शेड के एक बड़े हिस्से पर पत्थर पड़े हैं, जिससे हादसा होने की आशंका है।
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मरीजों और तीमारदारों की परेशानी उनकी जुबानी
शेड के नीचे बैठे तीमारदार विशाल दुबे निवासी विजयपुर ने बताया कि मरीज को अल्ट्रासाउंड के लिए आधे घंटे बाद बुलाया है, इसलिए वह आराम करने के लिए यहां बैठ गए, लेकिन शेड की हालत काफी खराब है। बुजुर्ग मरीज को पत्थरों के बीच से मुश्किल से लाया गया। गर्मी के बीच पंखे भी बंद हैं। मरीज रानी देवी ने बताया कि शेड के साथ गटर का खुला पानी बह रहा है, जिससे स्वास्थ्य पर असर पड़ता है। आसपास गंदगी का आलम है। तीमारदार थन्नामंडी निवासी जेबा बेगम ने कहा कि अस्पताल में पहले से ही लोग परेशानी की हालत में पहुंचते हैं, ऊपर से ऐसी व्यवस्था से अधिक परेशानी होती है। शेड के आसपास गंदगी के कारण खाना भी नहीं खा सकते। मरीज के साथ आए तीमारदार फ्लां मंडाल निवासी जीवन ने कहा कि सार्वजनिक स्थलों पर बेहतर व्यवस्था होनी चाहिए, लेकिन जीएमसी में अटेंडेंट शेड के नीचे हालत विपरीत है।
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सैकड़ों पीड़ित और बेंच तीन
सामाजिक कार्यकर्ता सोमनाथ डबगोत्रा ने कहा कि शेड के साथ एक्सरे, सिटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड जैसे महत्वपूर्ण यूनिट है, जिससे बड़ी संख्या में लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में आराम करने के लिए शेड ही मुख्य साधन होता है, लेकिन शेड के नीचे दो से तीन बेंच लगे हैं, जिससे चाहकर भी तीमारदार बैठ नहीं सकते।