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जम्मू कश्मीर कांग्रेस में कलह: जेकेपीसीसी से जीएम सरूरी, गुलाम नबी मोंगा और मोहम्मद अनवर भट्ट की छुट्टी, बगावत करने वालों के इस्तीफे मंजूर
Thu, 16 Dec 2021 02:04 AM IST
विमल शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: विमल शर्मा
Updated Thu, 16 Dec 2021 02:04 AM IST
सार
पार्टी से बगावत करने वाले पदाधिकारियों के ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) ने इस्तीफे मंजूर कर लिए हैं। कई पदाधिकारियों ने प्रदेशाध्यक्ष मीर पर उनकी सुनवाई न करने के लगाए थे आरोप थे।
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sonia Gandhi-Ghulam nabi azad
- फोटो : PTI
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विस्तार
ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) हाईकमान ने जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (जेकेपीसीसी) के कई पदाधिकारियों के इस्तीफे मंजूर कर साफ कर दिया है कि पार्टी में किसी तरह से बगावत और अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हाल ही में इन पदाधिकारियों ने प्रदेशाध्यक्ष जीए मीर पर उनकी सुनवाई न करने का आरोप लगाते हुए पदों से इस्तीफे दिए थे। इनमें जेकेपीसीसी के उपाध्यक्ष जीएम सरूरी, गुलाम नबी मोंगा, मोहम्मद अनवर भट्ट और अन्य नेता शामिल हैं।
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पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद गुट के समर्थक हैं
इसके साथ इंचार्ज डीसीसी प्रधान बडगाम जाहिद हुसैन जान का भी इस्तीफा मंजूर किया गया है। बताया जाता है कि इस्तीफे देने वाले सभी जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद गुट के समर्थक हैं।इन पदाधिकारियों के अलावा प्रदेश भर के विभिन्न जिलों में अन्य कई नेताओं ने मीर के खिलाफ बगावत करते हुए इस्तीफे दिए थे। हालांकि इनमें अधिकांश नेता जेकेपीसीसी के पदाधिकारी नहीं हैं। इस्तीफों पर मीर ने सफाई दी थी कि उक्त सभी पदाधिकारी पार्टी गतिविधियों से लंबे समय से दूर थे। पार्टी कार्यक्रमों और यहां तक कि प्रदेश प्रभारी रजनी पाटिल के कार्यक्रमों में भी ये अनुपस्थित रहते थे।
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हाईकमान ने कहा-अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं
बीते लंबे समय से जम्मू-कश्मीर में आजाद और मीर गुट में गुटबाजी होती रही है। यहां तक कि मीर के खिलाफ कई बार विरोध दर्ज करवाया गया। लेकिन पार्टी ने पदाधिकारियों के इस्तीफे मंजूर करके बता दिया है कि पार्टी के भीतर अनुशासनहीनता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मीर ने बताया था कि पदाधिकारियों ने उनसे बिना कोई परामर्श के मीडिया के समक्ष इस्तीफों की पेशकश की थी।
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पार्टी सूत्रों ने बताया कि प्रदेश कांग्रेस की ओर से भी हाईकमान को इस्तीफे मंजूर करने की सिफारिश की गई थी। हालांकि पदाधिकारी पद से जाने वाले नेता अभी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से जुड़े हुए हैं। इन इस्तीफों के बाद आगामी दिनों में मीर के खिलाफ विरोध तेज हो सकता है। इसके कई आरोप-प्रत्यारोप लग सकते हैं।
लंबे समय तक पार्टी की सेवा की, पर सुनवाई नहीं हुई : मोंगा
इस्तीफा देने वाले पदाधिकारी जीएन मोंगा ने कहा कि उन्होंने हाईकमान को पत्र में लिखकर दिया था कि प्रदेश कांग्रेस के भीतर ठीक नहीं हो रहा है। लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई है। वह लंबे समय से पार्टी की सेवा कर रहे हैं। पदों से इस्तीफा मंजूर किया गया है, लेकिन वह अभी भी पार्टी के प्राथमिक सदस्य हैं।