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जम्मू-कश्मीर की बेटियां बोलीं 'घर के संस्कारों से शुरू हो नारी के प्रति सोच में बदलाव'

Wed, 24 May 2017 05:55 PM IST
amarujala.com- Written by: श्रेयांश त्रिपाठी
amarujala.com- Written by: श्रेयांश त्रिपाठी Updated Wed, 24 May 2017 05:55 PM IST
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girls from jammu and kashmir expressed views about nirbhaya case verdict
Women - फोटो : Demo Photo

निर्भया मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का महिला संगठनों, छात्राओं और आम महिलाओं ने स्वागत किया है। उनका कहना है कि समाज में महिलाओं के प्रति नजरिया बदलने की जरूरत है। घर से ही नारी के प्रति सोच को बदलनी होगी। अदालत के फैसले के बाद जम्मू-कश्मीर की बेटियों ने फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया दी। 

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फैसले के बाद जम्मू केंद्रीय विश्वविद्यालय की छात्रा दीक्षा परिहार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला अच्छा है, लेकिन असल जरूरत संस्कारों और समाज में महिलाओं के प्रति बने नजरिये को बदलने की है। देश के कई हिस्सों में महिला अपराधों की संख्या 2012 के निर्भया कांड के तमाम विरोधों के बावजूद बढ़ी है। इसकी असल वजह यह है कि समाज की सोच में बदलाव नहीं हो पा रहा है। महिला के प्रति सोच को बदलने की शुरूआत घर से शुरू करनी होगी।
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इसके साथ जम्मू केंद्रीय विश्वविद्यालय की पत्रकारिता की विद्यार्थी अंशुला हांडू ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला बेहद अच्छा और न्यायपूर्ण है। आज भी जब बलात्कार जैसा कोई मामला आता है, तो निर्भया के साथ हुई नृशंसता याद आ जाती है। यौन उत्पीड़न और महिला अपराधों के निपटारे के लिए देश में विशेष अदालतों की जरूरत है, जहां ऐसे अपराधों के दोषियों पर जल्द सुनवाई कर उन्हें कड़ी सजा सुनिश्चित की जा सके।

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महिलाओं के प्रति सामाजिक नजरिया बदलने की जरूरत

girls from jammu and kashmir expressed views about nirbhaya case verdict
महिलाओं के प्रति सामाजिक नजरिया बदलने की जरूरत - फोटो : डेमो फोटो

सेंट्रल यूनिवर्सिटी की छात्रा गुलशन ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अदालत के फैसले का स्वागत करती हूं, लेकिन ये फैसला अगर उस जघन्य अपराध के कुछ दिनों के अंदर दे दिया जाता, तो इससे देश में एक बेहद बड़ा संदेश जाता। चार साल में हुए फैसले के बीच देश में बहुत कुछ हुआ। 

वही विश्वविद्यालय की छात्रा पूजा सिंह ने कहा कि अदालत का फैसला स्वागत योग्य है। इसके बाद समाज में उन अपराधियों में डर पैदा होगा, जो ऐसे जघन्य अपराधों में शामिल होते हैं। यौन अपराधों से पीड़ित महिलाओं के प्रति सामाजिक नजरिया बदलना होगा। साथ ही समाज में नारी के प्रति सोच का दायरा बदलने की जरूरत है।

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