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जम्मू-कश्मीर से लौटे कांग्रेस नेता आजाद ने बोला सरकार पर हमला, बोले-घाटी में हालात सामान्य नहीं
Tue, 01 Oct 2019 01:24 AM IST
Pranjal Dixit
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Pranjal Dixit
Updated Tue, 01 Oct 2019 01:24 AM IST
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गुलाम नबी आजाद
- फोटो : फाइल, अमर उजाला
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर पलटवार करते हुए वरिष्ठ कांग्रेसी नेता गुलाम नबी आजाद ने सोमवार को कहा कि सरकार द्वारा कश्मीर घाटी में पैदा की गई परिस्थितियों से वहां लोगों में डर का वातावरण है। घाटी में हालात सामान्य नहीं हैं। एक दिन पहले शाह ने कहा था कि कश्मीर घाटी में कोई प्रतिबंध नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बाद हाल ही में जम्मू कश्मीर का दौरा कर लौटे आजाद ने आरोप लगाया कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद उनके दौरे के दौरान कई तरह के व्यवधान पैदा किए गए, उनसे मिलने-जुलने वालों पर नजर रखी गई, यहां तक कि वीडियो ग्राफी भी कराई गई। कहा कि केंद्र स्थानीय राज्य सरकार के माध्यम से लोगों का दमन कर रही है।
राज्यसभा में विपक्ष के नेता ने केंद्र सरकार से मांग की कि दैनिक आय पर निर्भर लोगों को छह महीने के लिए मुफ्त खाद्य पदार्थ दिए जाएं, इंटरनेट व मोबाइल फोन की सेवाओं को बहाल किया जाए। परीक्षाएं स्थगित की जाएं तथा राजनीतिक नेताओं को रिहा किया जाए। बैंक से ऋण लेकर टैक्सियां खरीदने वालों को किस्तों की अदायगी में ब्याज दर में राहत दी जाए। उन्होंने कहा कि वह एक रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को दे सकते हैं जिसमें उन लोगों का नाम सहित उल्लेख होगा जिन्होंने दौरे के दौरान अपनी पीड़ा से उन्हें अवगत कराया।
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आजाद ने कहा बीडीसी चुनावों की घोषणा ऐसे समय में की गई है जब भाजपा के अलावा सभी राजनीतिक दलों के नेता बंद हैं। उन्होंने दावा किया कि जम्मू-कश्मीर में उनसे मिलने के इच्छुक कई लोगों को इस बात का डर नहीं था कि उन्हें बाद में पुलिस प्रताड़ना का सामना न करना पड़े। आरोप लगाया कि उन्हें श्रीनगर, अनंतनाग, बारामुला और जम्मू के अपने छह दिवसीय दौरे के दौरान कई स्थानों पर जाने की अनुमति नहीं दी गई।
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सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बाद हाल ही में जम्मू कश्मीर का दौरा कर लौटे आजाद ने आरोप लगाया कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद उनके दौरे के दौरान कई तरह के व्यवधान पैदा किए गए, उनसे मिलने-जुलने वालों पर नजर रखी गई, यहां तक कि वीडियो ग्राफी भी कराई गई। कहा कि केंद्र स्थानीय राज्य सरकार के माध्यम से लोगों का दमन कर रही है।
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राज्यसभा में विपक्ष के नेता ने केंद्र सरकार से मांग की कि दैनिक आय पर निर्भर लोगों को छह महीने के लिए मुफ्त खाद्य पदार्थ दिए जाएं, इंटरनेट व मोबाइल फोन की सेवाओं को बहाल किया जाए। परीक्षाएं स्थगित की जाएं तथा राजनीतिक नेताओं को रिहा किया जाए। बैंक से ऋण लेकर टैक्सियां खरीदने वालों को किस्तों की अदायगी में ब्याज दर में राहत दी जाए। उन्होंने कहा कि वह एक रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को दे सकते हैं जिसमें उन लोगों का नाम सहित उल्लेख होगा जिन्होंने दौरे के दौरान अपनी पीड़ा से उन्हें अवगत कराया।
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आजाद ने कहा बीडीसी चुनावों की घोषणा ऐसे समय में की गई है जब भाजपा के अलावा सभी राजनीतिक दलों के नेता बंद हैं। उन्होंने दावा किया कि जम्मू-कश्मीर में उनसे मिलने के इच्छुक कई लोगों को इस बात का डर नहीं था कि उन्हें बाद में पुलिस प्रताड़ना का सामना न करना पड़े। आरोप लगाया कि उन्हें श्रीनगर, अनंतनाग, बारामुला और जम्मू के अपने छह दिवसीय दौरे के दौरान कई स्थानों पर जाने की अनुमति नहीं दी गई।