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Jammu News: अब छात्राओं को मिलेगी ज्योतिष, वास्तु और पंचांग पढ़ने की ट्रेनिंग
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एमओयू पर हस्ताक्षर करने के बाद पद्मश्री प्रो. विश्वमूर्ति शास्त्री और प्रो. डॉ. कुलविंदर कौर
- फोटो : Archive
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जम्मू। गांधी नगर में महिला कॉलेज की छात्राओं को अब सिर्फ संस्कृत की पढ़ाई ही नहीं, बल्कि ज्योतिष, वास्तु, पंचांग और धर्मशास्त्र जैसे विषयों की व्यावहारिक ट्रेनिंग भी मिलेगी। कॉलेज और काशी विद्वत परिषद के बीच शुक्रवार को समझौते (एमओयू) पर हस्ताक्षर हो गए हैं।
समझौते का उद्देश्य छात्राओं को पारंपरिक भारतीय ज्ञान और संस्कृति से जुड़े विषयों को व्यावहारिक रूप से समझने का अवसर देना और शोध तथा कॅरियर के नए रास्ते खोलना है। इसके तहत संस्कृत, वैदिक अध्ययन, ज्योतिष, वास्तु और धर्मशास्त्र से जुड़े कार्यक्रम समय-समय पर होंगे। छात्राओं को इन क्षेत्रों में आगे पढ़ाई और कॅरियर की संभावनाओं से भी परिचित कराया जाएगा।
इस दौरान 15 दिवसीय ग्रीष्मकालीन कौशल प्रशिक्षण शिविर का भी समापन हुआ। पांच जून से शुरू हुए शिविर में छात्राओं को ज्योतिष, वास्तु, धर्मशास्त्र, संस्कृत, भारतीय संस्कृति और वैदिक परंपराओं से जुड़े विषयों की जानकारी दी गई। उन्हें पंचांग पढ़ने, तिथि और नक्षत्र समझने, शुभ मुहूर्त की बुनियादी जानकारी हासिल करने और वास्तु के व्यावहारिक उपयोग से भी परिचित कराया गया। इसके साथ ही भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं के जीवन से जुड़े पहलुओं पर भी प्रशिक्षण दिया गया। यहां पद्मश्री प्रो. विश्वमूर्ति शास्त्री और प्राचार्य प्रो. डॉ. कुलविंदर कौर मौजूद रहीं।
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समझौते का उद्देश्य छात्राओं को पारंपरिक भारतीय ज्ञान और संस्कृति से जुड़े विषयों को व्यावहारिक रूप से समझने का अवसर देना और शोध तथा कॅरियर के नए रास्ते खोलना है। इसके तहत संस्कृत, वैदिक अध्ययन, ज्योतिष, वास्तु और धर्मशास्त्र से जुड़े कार्यक्रम समय-समय पर होंगे। छात्राओं को इन क्षेत्रों में आगे पढ़ाई और कॅरियर की संभावनाओं से भी परिचित कराया जाएगा।
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इस दौरान 15 दिवसीय ग्रीष्मकालीन कौशल प्रशिक्षण शिविर का भी समापन हुआ। पांच जून से शुरू हुए शिविर में छात्राओं को ज्योतिष, वास्तु, धर्मशास्त्र, संस्कृत, भारतीय संस्कृति और वैदिक परंपराओं से जुड़े विषयों की जानकारी दी गई। उन्हें पंचांग पढ़ने, तिथि और नक्षत्र समझने, शुभ मुहूर्त की बुनियादी जानकारी हासिल करने और वास्तु के व्यावहारिक उपयोग से भी परिचित कराया गया। इसके साथ ही भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं के जीवन से जुड़े पहलुओं पर भी प्रशिक्षण दिया गया। यहां पद्मश्री प्रो. विश्वमूर्ति शास्त्री और प्राचार्य प्रो. डॉ. कुलविंदर कौर मौजूद रहीं।
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