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Jammu News: पर्यटकों के लिए 22 से खुल जाएगी गलवां घाटी
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-इसी दिन गलवां युद्ध स्मारक का उद्घाटन भी प्रस्तावित
पहले 15 जून को खुलनी थी घाटी
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। पर्यटकों के लिए गलवां घाटी आगामी 22 जुलाई से खुल जाएगी। ऑल लद्दाख टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन (एएलओटीए) के अध्यक्ष सेवांग दोरजे के अनुसार पहले वैली को पर्यटकों के लिए बीती 15 जून को खोला जाना था, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के कारण उत्पन्न हुए हालात के चलते उस वक्त नियत तिथि को इसे नहीं खोला जा सका।
जानकारी के अनुसार, 22 जुलाई को ही गलवां युद्ध स्मारक का उद्घाटन भी प्रस्तावित है। यह स्मारक 15 जून, 2020 को चीन सेना के साथ हुई झड़प में जान गंवाने वाले 20 भारतीय जवानों की याद में बनाया गया है, जो पूर्वी लद्दाख में डुर्बुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी रोड पर 120 किलोमीटर पोस्ट पर स्थित है। बता दें कि गलवां वैली वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एएलसी के नजदीक स्थित है। यह भारत और चीन के बीच विवादित क्षेत्र स्थित है। यहां से गुजरने वाली गलवां नदी, जो श्योक नदी से मिलती है, के नाम पर इस क्षेत्र का नाम गलवां घाटी पड़ा है। वर्ष 2020 में भारत और चीन की सेनाओं के बीच झड़प के बाद यह वैली अचानक चर्चा में आ गई थी। सेवांग दोरजे के अनुसार बाइकर्स अक्सर श्योक नदी पर पुल पर बने कैफे में आते हैं, लेकिन श्योक नदी के उफान पर होने के कारण इन्हें 56 किलोमीटर से आगे बाइक पर जाने की इजाजत नहीं दी जा रही।
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पहले 15 जून को खुलनी थी घाटी
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। पर्यटकों के लिए गलवां घाटी आगामी 22 जुलाई से खुल जाएगी। ऑल लद्दाख टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन (एएलओटीए) के अध्यक्ष सेवांग दोरजे के अनुसार पहले वैली को पर्यटकों के लिए बीती 15 जून को खोला जाना था, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के कारण उत्पन्न हुए हालात के चलते उस वक्त नियत तिथि को इसे नहीं खोला जा सका।
जानकारी के अनुसार, 22 जुलाई को ही गलवां युद्ध स्मारक का उद्घाटन भी प्रस्तावित है। यह स्मारक 15 जून, 2020 को चीन सेना के साथ हुई झड़प में जान गंवाने वाले 20 भारतीय जवानों की याद में बनाया गया है, जो पूर्वी लद्दाख में डुर्बुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी रोड पर 120 किलोमीटर पोस्ट पर स्थित है। बता दें कि गलवां वैली वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एएलसी के नजदीक स्थित है। यह भारत और चीन के बीच विवादित क्षेत्र स्थित है। यहां से गुजरने वाली गलवां नदी, जो श्योक नदी से मिलती है, के नाम पर इस क्षेत्र का नाम गलवां घाटी पड़ा है। वर्ष 2020 में भारत और चीन की सेनाओं के बीच झड़प के बाद यह वैली अचानक चर्चा में आ गई थी। सेवांग दोरजे के अनुसार बाइकर्स अक्सर श्योक नदी पर पुल पर बने कैफे में आते हैं, लेकिन श्योक नदी के उफान पर होने के कारण इन्हें 56 किलोमीटर से आगे बाइक पर जाने की इजाजत नहीं दी जा रही।
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