उधमपुर हमले के लिए कश्मीर से हुई थी फंडिंग!
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सीमा पार कर पाकिस्तान से जम्मू-कश्मीर आने वाले आतंकियों को आर्थिक मदद देने वालों की कश्मीर घाटी में भरमार है। उधमपुर में बीएसएफ के काफिले पर हमला करने वाले आतंकियों को भी स्थानीय लोगों ने फंड मुहैया करवाया था।
नावेद को लेकर घाटी में जांच कर रही नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) की टीम उन फाइनेंसरों तक भी पहुंच चुकी है, जिन्होंने उधमपुर हमले के आतंकियों को रुपये उपलब्ध करवाए थे।
जम्मू-कश्मीर में पिछले नौ सालों में आतंकियों को गैरकानूनी ढंग से फंडिंग करने के आरोप में कुल 80 केस दर्ज किए गए हैं। 190 लोगों को आरोपी बनाया गया है, जबकि 2.93 करोड़ रुपये सीज किए गए। बताया जाता है कि एक दशक में ही करोड़ों की फंडिंग हुई है।
आतंकियों को हवाला के जरिए राशि मुहैया करवाई जाती है
जानकारों का कहना है कि आतंकियों को हवाला के जरिए राशि मुहैया करवाई जाती है। आरंभ में यह राशि सीधे पाकिस्तान से आती थी, लेकिन सरकारी एजेंसियों का शिंकजा कसने के बाद अन्य देशों के मार्फत यह राशि भेजी जाने लगी।
इसके लिए कुछ एनजीओ का उपयोग किया गया। पिछले दिनों प्रवर्तन निदेशालय ने हुर्रियत कांफ्रेंस के वरिष्ठ सदस्य फिरदौस अहमद शाह के खिलाफ भी गैरकानूनी फंडिंग के आरोप में चार्जशीट अदालत में दाखिल की थी।
शाह पर आरोप है कि उसने 26/11 के आतंकियों को राशि मुहैया करवाई थी। खासबात यह है कि शाह को 2007 से 2010 के बीच इटली से तीन करोड़ रुपये मिले। पाकिस्तानी नागरिक जावेद इकबाल उसे रुपये भेजता था।
कैसे पकड़ में आती है गैरकानूनी फंडिंग
-किसी भी व्यक्ति के बैंक अकाउंट में बड़ी राशि का आदान प्रदान होने पर बैंक की ड्यूटी है कि उसे स्थानीय आयकर विभाग को सूचित करे। कई बार बैंक वाले इसकी सूचना नहीं देते।
-आयकर विभाग का इन्वेस्टिगेशन विंग उक्त राशि की गहराई से जांच करता है। उसके बाद आयकर विभाग अगली कार्यवाही करता है।
-किसी बैंक में ज्यादा बड़ी राशि पहुंचती है तो इसकी जानकारी वित्त मंत्रालय को दी जाती है, जिसके बाद प्रवर्तन निदेशालय उसकी जांच करता है।