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गुलमर्ग भूमि घोटाले की जांच पूरी करने को चार महीने की मोहलत
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जम्मू। गुलमर्ग भूमि घोटाले में कोर्ट ने एंटी करप्शन ब्यूरो और विजिलेंस आर्गनाइजेशन कश्मीर को अनुपूरक आरोप पत्र दाखिल करने के लिए चार माह की मोहलत दी है। बांदीपोरा और बारामुला के अतिरिक्त विशेष जज एंटी करप्शन नसीर अहमद डार ने शुक्रवार को मामले में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए। कोर्ट में दाखिल की गईं दो चार्जशीट के तहत गुलमर्ग भूमि घोटाले में उपराज्यपाल के वर्तमान सलाहकार बसीर अहमद खान (आईएएस), तत्कालीन मंडलायुक्त कश्मीर महबूब इकबाल (आईएएस), होटलियरों और अन्य राजस्व अधिकारियों समेत 20 लोगाें को आरोपी बनाया गया है।
कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट की ओर से 15 अक्तूबर 2018 में जारी आदेश को भी ध्यान में रखा जाए तो जांच एजेंसी और अधिकारी के पास इस केस से जुड़ी सारी जानकारी होना जरूरी है। अभी तक जांच प्रक्रिया से क्या दस्तावेज और अन्य सामग्री सामने आई है, इसे लेकर स्थिति साफ करना जरूरी है। आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने की प्रक्रिया भी अधूरी है। ऐसे में जांच एजेंसी एंटी करप्शन ब्यूरो को अनुपूरक आरोप पत्र दाखिल करने के लिए चार माह का समय दिया जाता है। इससे पूर्व विजिलेंस आर्गनाइजेशन कश्मीर के विशेष सरकारी वकील ने कहा कि आरोपियाें पर आरोप तय करने के पर्याप्त सबूत हैं। इनका ट्रायल किया जाना चाहिए। वैसे भी इस समय कोर्ट को केवल ट्रायल के लिए आधार ही देखना है। वहीं, बचाव पक्ष के वकील जेडए शाह समेत अन्य वकीलों ने कहा कि एफआईआर में अधिकारियों के नाम बिना वेरिफिकेशन के शामिल कर लिए गए हैं। कहीं पर भी जांच में अभी तक कहीं पर ऐसा सामने नहीं आया है कि उनके मुवक्किलों ने प्रीवेंशन आफ करप्शन एक्ट के तहत कोई अपराध किया है।
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कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट की ओर से 15 अक्तूबर 2018 में जारी आदेश को भी ध्यान में रखा जाए तो जांच एजेंसी और अधिकारी के पास इस केस से जुड़ी सारी जानकारी होना जरूरी है। अभी तक जांच प्रक्रिया से क्या दस्तावेज और अन्य सामग्री सामने आई है, इसे लेकर स्थिति साफ करना जरूरी है। आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने की प्रक्रिया भी अधूरी है। ऐसे में जांच एजेंसी एंटी करप्शन ब्यूरो को अनुपूरक आरोप पत्र दाखिल करने के लिए चार माह का समय दिया जाता है। इससे पूर्व विजिलेंस आर्गनाइजेशन कश्मीर के विशेष सरकारी वकील ने कहा कि आरोपियाें पर आरोप तय करने के पर्याप्त सबूत हैं। इनका ट्रायल किया जाना चाहिए। वैसे भी इस समय कोर्ट को केवल ट्रायल के लिए आधार ही देखना है। वहीं, बचाव पक्ष के वकील जेडए शाह समेत अन्य वकीलों ने कहा कि एफआईआर में अधिकारियों के नाम बिना वेरिफिकेशन के शामिल कर लिए गए हैं। कहीं पर भी जांच में अभी तक कहीं पर ऐसा सामने नहीं आया है कि उनके मुवक्किलों ने प्रीवेंशन आफ करप्शन एक्ट के तहत कोई अपराध किया है।
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