आतंकी फंडिंगः पाकिस्तान की एमबीबीएस सीटें बेचने में चार अलगाववादी गिरफ्तार, अल्ताफ और मंजूर की तलाश
वर्ष 2014-18 के दौरान ऐसे 80 से अधिक मामलों की एजेंसी ने जांच की। आतंकवाद के लिए इस तरह से धन जुटाने और इसके उपयोग संबंधी साक्ष्य की तलाश में घाटी में लगभग एक दर्जन परिसरों में तलाशी ली गई। डिजिटल रिकॉर्ड व रसीदों के अलावा बैंक लेनदेन से संबंधित रिकॉर्ड से पता चला कि पैसे का एक बड़ा हिस्सा निजी इस्तेमाल के लिए अलग रखा गया था। यह पैसा ऐसे लोगों के खातों में भी डाला गया जो आतंकवाद और अलगाववाद से संबंधित गतिविधियों का समर्थन करते थे। साक्ष्यों से पता चला कि पथराव करने के लिए भी संगठित तरीके से भुगतान किया गया।
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कश्मीरी छात्रों को पाकिस्तान में एमबीबीएस की सीटें बेच कर टेरर फंडिंग मामले में जम्मू-कश्मीर पुलिस ने बुधवार को चार अलगाववादियों को गिरफ्तार किया है। इसमें हुर्रियत कांफ्रेंस के कुछ लोग भी शामिल हैं। ये सीटों को बेचने से मिलने वाला पैसा आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने में इस्तेमाल करते थे। गिरफ्तार किए गए लोगों में सॉल्वेशन मूवमेंट के अध्यक्ष मोहम्मद अकबर भट उर्फ जफर भट, फातिमा शाह, मो. अब्दुल्ला शाह और साब्जार अहमद शेख शामिल हैं। पुलिस भट के भाई अल्ताफ अहमद भट और शाह के भाई मंजूर अहमद शाह की भी तलाश कर रही है।
जम्मू-कश्मीर पुलिस के सीआईडी विभाग की शाखा, काउंटर इंटेलिजेंस ने पिछले साल जुलाई में एक मामला दर्ज किया था। इस आधार पर पता चला कि कुछ हुर्रियत नेता भ्रष्टाचार में शामिल लोगों व शैक्षिक सलाहकारों के साथ मिलकर पाकिस्तान के विभिन्न कॉलेजों-विश्वविद्यालयों की एमबीबीएस और अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की सीटें कश्मीरी छात्रों को बेच रहे थे। मामले की जांच से पता चला है कि इससे मिली रकम का प्रयोग विभिन्न तरीके से कश्मीर में आतंकवाद और अलगाववाद को बढ़ावा देने के लिए किया जाता था। इस मामले में गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम और धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
जांच में यह भी सामने आया कि कई मामलों में एमबीबीएस और अन्य पेशेवर पाठ्यक्रमों में कुछ सीटें उन छात्रों को दी जाती थीं जो मुठभेड़ के दौरान मारे गए आतंकियों के रिश्तेदार थे। कुछ मामले ऐसे भी थे जिसमें अलग-अलग हुर्रियत नेताओं को आवंटित कोटे की सीटें कश्मीर के उन परिवारों को दी गईं जिनके माता-पिता अपने बच्चों को किसी न किसी तरह से एमबीबीएस और अन्य पेशेवर डिग्री दिलाने के इच्छुक थे।
आतंकियों के परिजनों को मुफ्त सीट देती है आईएसआई
प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने एमबीबीएस और इंजीनियरिंग सीटें मुफ्त उपलब्ध कराकर सुरक्षाबलों के हाथों मारे गए आतंकियों के परिवार को मुआवजा देकर आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए कार्यक्रम शुरू किया था।
अल्ताफ व मंजूर की तलाश
मामले के संबंध में भट के भाई अल्ताफ अहमद भट और शाह के भाई मंजूर अहमद शाह और अन्य की भी तलाश जारी है। दोनों नामजद आरोपी 1990 के दशक की शुरुआत में अवैध हथियारों और गोला-बारूद के प्रशिक्षण के लिए पाकिस्तान चले गए थे। इन्होंने भारत में हुर्रियत से जुड़े लोगों के लिए इस श्रेणी के तहत प्रवेश से संबंधित मामलों को सुगम बनाने में आईएसआई की ओर से अहम भूमिका निभाई, जोकि आतंकवाद संबंधित गतिविधियों में पैसा उपलब्ध कराने का एक नापाक जरिया था।
एक सीट 10 से 12 लाख में बेची
जांच के अनुसार, औसतन एक सीट की कीमत 10 से 12 लाख रुपये के बीच थी, लेकिन कुछ मामलों में हुर्रियत नेताओं के हस्तक्षेप पर कीमत कम कर दी गई थी। दूसरे शब्दों में, हस्तक्षेप करने वाले एक हुर्रियत नेता के सियासी कद के आधार पर इच्छुक छात्र और उसके परिवार को रियायतें दी गईं।
अलगाववादी नेताओं को प्रतिवर्ष 40 सीटें आवंटित
पाकिस्तान में एमबीबीएस व अन्य व्यावसायिक कार्यक्रमों की चालीस सीटें अलग-अलग हुर्रियत नेताओं के लिए आवंटित थीं। एक अनुमान के मुताबिक सीटें बेचकर लगभग 4 करोड़ रुपये प्रति वर्ष जुटाए गए।