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Jammu News: धार साकरी में गेस्ट्रोएंटेराइटिस के चार नए मरीज मिले
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-हाइड्रोलिक की जांच में पांच जलस्रोतों में पाया गया ई कोली बैक्टीरिया
संवाद न्यूज एजेंसी
राजोरी। धार साकरी गांव में गेस्ट्रोएंटेराइटिस के मामले अभी भी सामने आ रहे हैं। बुधवार को 4 नए मरीज मिले। इनका उपचार कोटरंका के अस्पताल में किया जा रहा है। उनकी हालत स्थिर बनी हुई है।
जल शक्ति विभाग ने पांच संदिग्ध स्रोतों को सील कर भंडारण टैंक का भी निरीक्षण किया है। जन जागरूकता अभियान शुरू कर लोगों को सुरक्षित जल स्रोतों के बारे में शिक्षित किया गया। सहायक कार्यकारी अभियंता अशफाक अहमद, कार्यकारी अभियंता सुदेश भगत और अधीक्षण अभियंता हाइड्रोलिक की जांच में पांच स्थानीय स्रोतों में ई कोली बैक्टीरिया की मौजूदगी की पुष्टि हुई। इन्हें तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया है। मस्जिद और मंदिर के लाउडस्पीकरों के जरिए भी लोगों को शुद्ध पानी इस्तेमाल करने का संदेश दिया गया है। राजोरी के मुख्य चिकित्सा अधिकारी मनोहर लाल राणा ने कहा कि पिछले पांच दिनों में सकरी व आसपास के ट्रल्ला गांव से गेस्ट्रोएंटेराइटिस और दस्त के लगभग 40 मामले मिले हैं। दो लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 75 वर्षीय और 40 वर्षीय महिला शामिल हैं।
उपायुक्त ने किया गांव का दौरा
उपायुक्त अभिषेक शर्मा ने प्रभावित गांव का दौरा कर चिकित्सा और अन्य टीमों को सक्रिय किया। जल परीक्षण प्रयोगशाला कर्मियों से प्राकृतिक झरनों और एक नल कनेक्शन से नमूने एकत्र कराए। परीक्षण के बाद दो झरनों में ई-कोलाई संदूषण पाया गया, जबकि नल का पानी पीने के लिए सुरक्षित घोषित किया गया। वहीं, पीएचई विभाग ने दूषित झरनों को साफ कर क्लोरीनेट किया है।
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जानें क्या है ई. कोलाई बैक्टीरिया
- ई. कोलाई (एस्चेरिचिया कोलाई) बैक्टीरिया मानव और जानवरों के आंतों में पाया जाता है। ऐसे कुछ बैक्टीरिया स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं और बीमारियों का कारण बन सकते हैं।
हानिकारक प्रभाव:
- गेस्ट्रोएंटेराइटिस: दस्त, उल्टी, पेट दर्द और बुखार हो सकता है।
- संक्रमण: मूत्र मार्ग में संक्रमण का कारण बन सकता है, जिससे दर्द, जलन और बार-बार पेशाब आता है।
- सेप्सिस: गंभीर मामलों में, यह बैक्टीरिया रक्त में प्रवेश कर सेप्सिस का कारण बन सकता है, जिससे जान भी जा सकती है।
- गुर्दे की समस्याएं समस्याएं पैदा कर सकता है।
-गंभीर मामलों में इस बैक्टीरिया से मौत हो सकती है, खासकर बुजुर्गों, बच्चों और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों में ज्यादा खतरा रहता है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
राजोरी। धार साकरी गांव में गेस्ट्रोएंटेराइटिस के मामले अभी भी सामने आ रहे हैं। बुधवार को 4 नए मरीज मिले। इनका उपचार कोटरंका के अस्पताल में किया जा रहा है। उनकी हालत स्थिर बनी हुई है।
जल शक्ति विभाग ने पांच संदिग्ध स्रोतों को सील कर भंडारण टैंक का भी निरीक्षण किया है। जन जागरूकता अभियान शुरू कर लोगों को सुरक्षित जल स्रोतों के बारे में शिक्षित किया गया। सहायक कार्यकारी अभियंता अशफाक अहमद, कार्यकारी अभियंता सुदेश भगत और अधीक्षण अभियंता हाइड्रोलिक की जांच में पांच स्थानीय स्रोतों में ई कोली बैक्टीरिया की मौजूदगी की पुष्टि हुई। इन्हें तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया है। मस्जिद और मंदिर के लाउडस्पीकरों के जरिए भी लोगों को शुद्ध पानी इस्तेमाल करने का संदेश दिया गया है। राजोरी के मुख्य चिकित्सा अधिकारी मनोहर लाल राणा ने कहा कि पिछले पांच दिनों में सकरी व आसपास के ट्रल्ला गांव से गेस्ट्रोएंटेराइटिस और दस्त के लगभग 40 मामले मिले हैं। दो लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 75 वर्षीय और 40 वर्षीय महिला शामिल हैं।
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उपायुक्त ने किया गांव का दौरा
उपायुक्त अभिषेक शर्मा ने प्रभावित गांव का दौरा कर चिकित्सा और अन्य टीमों को सक्रिय किया। जल परीक्षण प्रयोगशाला कर्मियों से प्राकृतिक झरनों और एक नल कनेक्शन से नमूने एकत्र कराए। परीक्षण के बाद दो झरनों में ई-कोलाई संदूषण पाया गया, जबकि नल का पानी पीने के लिए सुरक्षित घोषित किया गया। वहीं, पीएचई विभाग ने दूषित झरनों को साफ कर क्लोरीनेट किया है।
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जानें क्या है ई. कोलाई बैक्टीरिया
- ई. कोलाई (एस्चेरिचिया कोलाई) बैक्टीरिया मानव और जानवरों के आंतों में पाया जाता है। ऐसे कुछ बैक्टीरिया स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं और बीमारियों का कारण बन सकते हैं।
हानिकारक प्रभाव:
- गेस्ट्रोएंटेराइटिस: दस्त, उल्टी, पेट दर्द और बुखार हो सकता है।
- संक्रमण: मूत्र मार्ग में संक्रमण का कारण बन सकता है, जिससे दर्द, जलन और बार-बार पेशाब आता है।
- सेप्सिस: गंभीर मामलों में, यह बैक्टीरिया रक्त में प्रवेश कर सेप्सिस का कारण बन सकता है, जिससे जान भी जा सकती है।
- गुर्दे की समस्याएं समस्याएं पैदा कर सकता है।
-गंभीर मामलों में इस बैक्टीरिया से मौत हो सकती है, खासकर बुजुर्गों, बच्चों और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों में ज्यादा खतरा रहता है।