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Jammu News: सबूतों के अभाव में पूर्व उप जेल अधीक्षक समेत चार आतंकी साजिश के आरोपों से बरी

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Four including former deputy jail superintendent acquitted of terror conspiracy charges due to lack of evidence
एनआईए कोर्ट की टिप्पणी: पहलगाम हमले को ध्यान में रखकर अधिकारी पेशेवर तरीके से करें जांच
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जम्मू। श्रीनगर की सेंट्रल जेल के पूर्व उप जेल अधीक्षक समेत चार को आतंकी साजिश के आरोपों से बरी कर दिया। बुधवार को मामले पर सुनवाई करते हुए जम्मू की एनआईए विशेष अदालत के न्यायाधीश संदीप गंडोत्रा ने कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा भरोसा किए गए गवाहों और जांच अधिकारियों द्वारा दिए गए बयान विरोधाभासी और कमजोर बयान हैं, जो आरोपियों को दोषी ठहराने के लिए इस अदालत के मन में विश्वास पैदा करने में विफल रहे हैं। आरोपों को पुख्ता और विश्वसनीय सबूतों से साबित नहीं किया।
जज ने ये भी कहा कि जांच अधिकारियों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे जांच को पूरी तरह से और पेशेवर तरीके से करें। खासकर तब जब देश एक ऐसे शत्रुतापूर्ण पड़ोसी का सामना कर रहा है जो हाल ही में बायसरन घाटी पहलगाम में किए गए आतंकी कृत्यों को अंजाम देकर माहौल को खराब करने पर तुला हुआ है। कहा कि हैरानी की बात है कि मामले में एसपी विशाल गर्ग ने अपनी जिरह में स्वीकार किया है कि उनकी जांच में खामियां थीं, जिसका असर मामले पर पड़ा है। महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र नहीं किए गए हैं और पुलिस हिरासत में रहते हुए साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की गई है।
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भारी मन से कर रहे बरी
आरोपियों को बरी करते भारी मन से कहा कि अभियोजन पक्ष के बयानों से यह स्पष्ट है कि घटना के दिन श्रीनगर जेल में कैदियों पर कोई अनुशासन और नियंत्रण नहीं था। बयानों में यह भी दर्ज है कि सभी कैदी अपनी मर्जी से अन्य कैदियों और उनसे मिलने आने वालों से मिलते थे। कैदी जो चाहे करते थे। अधिकारी इन तथ्यों को जानते थे, लेकिन अधिकारी असहाय थे और वे कुछ नहीं कर सकते थे। यहां तक कि जेल अधीक्षक ने भी इस तथ्य को स्वीकार किया है। इसके लिए जवाबदेही तय करने की आवश्यकता है और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि भविष्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो।
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क्या है मामला
अक्तूबर 2017 को कुपवाड़ा पुलिस ने सीआरपीएफ के साथ मिलकर पुलवामा के रहने वाले दानिश गुलाम लोन व अवंतीपोरा के रहने वाले सोहेल अहमद भट को गिरफ्तार किया गया। शुरुआती पूछताछ में पता चला कि ये दोनों दौलत अली मुगल, इशाक पल्ला, लियाकत अली खान की मिलीभगत और समर्थन से एलओसी पार करने और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे थे। इस मामले में पुलिस ने समर्थन करने वाले तीनों लोगों को गिरफ्तार किया। इसके बाद मामले की जांच एनआईए को सौंप दी गई।


एनआईए की जांच में उप जेल अधीक्षक का नाम निकला
अगस्त 2018 को मामले की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने सेंट्रल जेल श्रीनगर के उपाधीक्षक फिरोज अहमद लोन और बडगाम के इशाक पल्ला को गिरफ्तार किया। दोनों को गिरफ्तार किए गए दानिश गुलाम लोन व सोहेल अहमद को पीओजेके भागने की साजिश में मदद करने में संलिप्त पाया गया। दोनों जेल में बंद इशाक पल्ला से प्रेरित थे। जेल से साजिश रचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था। इस साजिश में पल्ला को फिरोज अहमद लोन ने सक्रिय रूप से मदद की थी।
जेएनएफ
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