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पूर्व केंद्रीय मंत्री ने केंद्र पर साधा निशाना: मोदी सरकार ने बेची राष्ट्रीय संपत्ति, शासन करने का अधिकार नहीं

Thu, 02 Sep 2021 01:08 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Thu, 02 Sep 2021 01:08 PM IST
सार

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुबोध कांत सहाय ने आरोप लगाया कि भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार ने अपने कुछ व्यापारिक मित्रों को लाभ पहुंचाने के लिए देश की परिसंपत्तियों को बेचने की कोशिश की है।

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Former Union Minister Senior Congress leader Subodh Kant Sahai said Modi government sold national assets, no right to rule
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुबोध कांत सहाय - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

पूर्व केंद्रीय मंत्री व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुबोध कांत सहाय ने कहा है कि मोदी सरकार राष्ट्रीय संपत्तियों को बेच रही है। राष्ट्रीय संपत्तियों को बचाने में विफल इस सरकार को अब सत्ता में रहने का कोई अधिकार नहीं हैं। केंद्र पर निशाना साधते हुए राष्ट्रीय मुद्रीकरण योजना को मोदी मुद्रा पाइपलाइन योजना बताते हुए कहा कि  राष्ट्र के लिए इसके परिणाम गंभीर होंगे। सहाय सरकार की नई राष्ट्रीय मुद्रीकरण योजना के खिलाफ कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अभियान के हिस्से के रूप में यहां थे।

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शहीदी चौक स्थित प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में बुधवार को पत्रकारों से रूबरू होते हुए सहाय ने कहा कि जो सरकार बिजली, दूरसंचार, रेलवे, सड़कों, हवाई अड्डों, स्टेडियमों और गैस पाइपलाइनों का प्रबंधन नहीं कर सकती है, उसे सत्ता में बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने मोदी सरकार की प्रक्रिया और तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह साजिश के तहत किया जा रहा है, क्योंकि संसद में इसके लिए कोई चर्चा नहीं की गई। एनएमपी पर कोई मसौदा पत्र नहीं था, हितधारकों विशेष रूप से कर्मचारियों और ट्रेड यूनियनों के साथ कोई परामर्श नहीं किया गया। नीति को गोपनीय तरीके से लाकर अचानक घोषणा की गई। मोदी और उनके वित्त मंत्री ने कलम के एक झटके से भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की संपत्ति को शून्य के करीब लाकर खड़ा कर दिया है।
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कहा कि वर्तमान में चुनी गई संपत्तियों से होने वाले वार्षिक राजस्व का खुलासा नहीं किया गया है। नौकरियों और आरक्षण पर कोई स्पष्टता नहीं है। एससी, एसटी और ओबीसी का आरक्षण बरकरार रहेगा या खत्म होगा कुछ स्पष्ट नहीं है। विनिवेश और निजीकरण की नीति 1991 के बाद विकसित हुई है, लेकिन निजीकरण की जाने वाली इकाइयों को चुनने के लिए मानदंड निर्धारित हैं। इसमें एक रणनीतिक क्षेत्र में सार्वजनिक उपक्रमों का निजी नहीं करना, घाटे में चल रही इकाइयों का निजीकरण करना, अपने उत्पादों के लिए न्यूनतम बाजार हिस्सेदारी रखने वाली सार्वजनिक उपक्रम का निजीकरण करना, किसी पीएसयू का निजीकरण किया जाएगा यदि वह प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देगा और यदि यह एकाधिकार की ओर ले जाता है तो इसका निजीकरण नहीं किया जाएगा, शामिल है।
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इन मानदंडों को नजरअंदाज किया गया है और कोई वैकल्पिक मानदंड घोषित नहीं किया गया है। हैरानी यह है कि रेलवे को रणनीतिक क्षेत्र के तौर पर हटाकर इसे गैर प्रमुख संपत्ति के रूप में वर्गीकृत किया गया है, जबकि यूके, फ्रांस, इटली और जर्मनी जैसी बाजार अर्थव्यवस्थाओं ने सार्वजनिक क्षेत्र में रेलवे (या देश की रेलवे प्रणाली का बड़ा हिस्सा) को बरकरार रखा है। इसकी पूरी संभावना है कि कई क्षेत्रों में कीमतें बढ़ेंगी। मुद्रीकरण के बाद सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम बाजार में मूल्य स्थिर करना बंद कर देंगे। मुद्रीकृत संपत्तियों में सड़कों (267000 किलोमीटर), हाइडल और सौर ऊर्जा संपत्ति (6000 मेगावाट), प्राकृतिक गैस पाइप लाइन (8154 किमी.), पेट्रोलियम उत्पाद पाइप लाइन (3930 किमी.), वेयर हाउसिंह एसेट्स, रेलवे स्टेशन, पैसेंजर ट्रेन आपरेशन आदि शामिल है।


बेची गई संपत्ति वापस आने वाली नहीं
सहाय ने आरोप लगाया कि भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार ने अपने कुछ व्यापारिक मित्रों को लाभ पहुंचाने के लिए देश की परिसंपत्तियों को बेचने की कोशिश की है। ये संपत्तियां 30 से 50 साल के लिए पट्टे पर देने के बाद वापस नहीं आने वाली हैं और अगली 10 सरकारों को इस कदम से कोई लाभ नहीं मिला। उन्होंने कहा कि वे 60 लाख करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति 6 लाख करोड़ रुपये में बेच रहे हैं। कहा, ईंधन की कीमतें बढ़ाकर 25 लाख करोड़ रुपये कमाए लेकिन कोई नहीं जानता कि पैसा कहां गया क्योंकि कोई जवाबदेही नहीं है। इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष जीए मीरे, रमण भल्ला, रवींद्र शर्मा, योगेश साहनी, मूलाराम, ठाकुर बलवान सिंह आदि मौजूद रहे।

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