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जम्मू-कश्मीर: धोखाधड़ी से शादी व दुष्कर्म पर पूर्व उप जज को 17 साल जेल
Sun, 24 Oct 2021 10:45 AM IST
Trainee Trainee
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Trainee Trainee
Updated Sun, 24 Oct 2021 10:45 AM IST
सार
जनवरी 2018 में पीड़ित नौकरानी की शिकायत पर दर्ज हुआ था केस। जम्मू फास्ट ट्रैक कोर्ट के पीठासीन अधिकारी ने फैसले में कहा - पर्याप्त सजा देना मुख्य कर्तव्य। आरपीसी की दो धाराओं के तहत सात व दस साल की अलग-अलग भुगतनी होगी कैद
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प्रतिकात्मक
- फोटो : Social Media
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विस्तार
जम्मू फास्ट ट्रैक कोर्ट ने धोखे से शादी और दुष्कर्म के दोषी पूर्व उप जज राजेश कुमार अबरोल को 17 साल की कैद और 70 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। धोखे से शादी के लिए जुर्माने सहित सात साल सामान्य कैद व दुष्कर्म के लिए जुर्माने समेत दस साल कठोर कारोवास की सजा सुनाई गई है। दोनों सजाएं अलग-अलग भुगतनी होंगी।
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पूर्व उप जज राजेश कुमार अबरोल पर नौकरानी से फर्जी शादी करने के बाद दुष्कर्म करने का मामला 12 जनवरी 2018 में दर्ज हुआ था। अभियोजन प्रक्रिया के तहत आरोपी पर दोष साबित हो गया। फास्ट ट्रैक कोर्ट के प्रीसाइडिंग अफसर (पीठासीन अधिकारी) खलील चौधरी ने फैसले में कहा कि जुर्माना राशि न देने पर दोषी को तीन माह की अतिरिक्त जेल की सजा भुगतनी होगी।
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अभियोजन के अनुसार महिला नगरोटा के बन टोल प्लाजा के पास अपनी बेटी के साथ रहती थी, जो पति से मतभेद के मामले में उप जज से मिली थी। एक महिला के जरिये पीड़ित की राजेश अबरोल से मुलाकात हुई। सब जज ने महिला से कहा कि वह उसकी कानूनी मदद करेगा। इसके साथ ही उसे अपने घर में नौकर रख लिया। अभियोजन के अनुसार जब जज को एक दिन पता चला कि वह अपने घर जा रही है, तो उसने नौकरानी की मांग भर दी।
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वहीं, बच्ची को पढ़ाने सहित हर माह पांच हजार रुपये देने का आश्वसन दिया। इसके बाद उसने दुष्कर्म किया। बाद में पता चला कि उप जज की एक और पत्नी भी है। इसे लेकर उप जज और पीड़ित में बहस हुई। मामला कोर्ट में पहुंचा और एसएसपी जम्मू को मामले की जांच के आदेश दिए गए।
फैसले में पीठासीन अधिकारी खलील चौधरी ने कहा कि जुर्म की पर्याप्त सजा देना अदालत के अलावा एक सामाजिक और कानूनी दायित्व भी है। दोषी को आरपीसी की धारा 420 के तहत जुर्माने सहित सात साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई जाती है। वहीं आरपीसी की धारा 376 (2) के दस साल कठोर कारावास और 70,000 रुपये जुर्माना लगाया जाता है। जेएनएफ