पद का दुरुपयोग मामले में पूर्व आईएएस दोषी
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भूमि विवाद मामले में जम्वाल ने बतौर ट्रिब्यूनल सदस्य अपने पिता के हक़ में कई फैसले दिए थे। उच्च न्यायलय द्वारा दिए गए आदेशों पर स्पेशल ट्रिब्यूनल द्वारा 19 मार्च 2010 को जांच के लिए फुल बेंच गठन किया गया।
बैंच ने जम्वाल को अपने पद के दुरुपयोग का दोषी करार 24 जुलाई, 2014 को दोषि करार देते हुए राज्य के मुख्य सचिव से उनके खिलाफ जरूरी कार्रवाई की हिदायत दी। 31 मार्च, 2003 को जम्वाल सेवानिवृत्त भी हो गए थे।
मामले के मुताबिक एमएस जामवाल के पिता सूरज सिंह और तेजु नामी एक शख्स का कोट गढ़ी, अखनूर में खसरा नंबर 174 और 175 पर भूमि विवाद चल रहा था।
उच्च न्यायालय ने दिए मामले की जांच के आदेश
उस समय जम्वाल ट्रिब्यूनल के सदस्य थे। 30 जून 2000 को इस केस मे जम्वाल ने अपने पिता के हक़ में फैसला दिया।
इस फैसले का विरोध जताते हुए विरोधी पक्ष ने उच्च न्यायालय में अपील दायर की। न्यायालय ने अपील को स्वीकार करते हुए स्पेशल ट्रिब्यूनल को मामले की जांच के आदेश दिए।
न्यायालय द्वारा दिए गए आदेशों का पालन करते हुए एक फूल बेंच का गठन किया गया जिसमें सोनाली कुमार (आईएएस) स्पेशल ट्रिब्यूनल की अध्यक्ष, शालीन काबरा (आईएएस) और मदन लाल शामिल थे।
मामले की खास बात
फुल बैंच ने जम्वाल द्वारा दिए गए फैसले की समीक्षा की। बैंच ने पाया कि जम्वाल द्वारा फैसला अपने पद का गलत लाभ उठाते हुए दिया था।
खास बात यह है कि फैसला भी विरोधी पक्ष तेजु (अपील करने वाला शख्स) की गैरहाजिरी में लिया गया। फैसले में 15 दिन के भीतर सूरज सिंह को संबंधित जमीन का कब्जा देने का भी आदेश संबंधित पटवारी, तहसीलदार और जिलाधीश को दिया गया था।
जम्मू कश्मीर स्पेशल ट्रिब्यूनल की अध्यक्ष सोनाली कुमार ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर इसके साथ जांच रिपोर्ट की कॉपी भेज कर जम्वाल के खिलाफ जरूरी कार्रवाई करने को कहा है।