जम्मू के सबसे बड़े अस्पताल GMC में लगी आग
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जीएमसी के दूसरे फ्लोर पर आर्थोपेडिक्स वार्ड-एक से सटे कारिडोर में रखे डेड स्टाक में आग लग जाने से अफरा तफरी रही। वार्ड एक में धुआं भर जाने से मरीजों को बाहर लाना पड़ा। वार्ड का नर्सिंग रूम स्वाह होने से बचा।
चार दमकल वाहनों से पौन घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। जीएमसी के अधीक्षक डा. रविंद्र रतनपाल के अनुसार कारिडोर के साथ वार्ड एक के बाथरूम से शायद किसी ने सिगरेट फेंक दी होगी, जिससे आग भड़की। कारिडोर में डेड स्टाक रखा गया था।
वार्ड एक के साथ कारिडोर में रखे डेड स्टाक से शुक्रवार रात 8.30 अचानक आग की लपटें उठने लगीं। वहां पुराने कंबल, गद्दे, चादरें आदि सामान रखा था। कारिडोर में हवा के साथ आग तेजी से फैली।
कारिडोर के सामने आपरेशन थियेटर से अस्पताल के निजी सुरक्षाकर्मियों ने बाल्टियों से पानी फेंककर आग पर काबू पाने का प्रयास किया, लेकिन आग तेजी से फैलती गई। इसके बाद दमकल वाहनों ने आग बुझाने का काम शुरू किया। हेडक्वार्टर गांधीनगर से दो और सिटी से दो दमकल वाहनों को बुलाया गया।
फायर फाइटिंग सिस्टम पर सवाल
एसओ दिलीप कुमार कौल ने बताया कि दमकल वाहन अगर मौके पर नहीं पहुंचते तो आग विकराल रूप धारण कर सकती थी। वार्ड के आसपास काफी धुआं फैलने से तीमारदारों, मरीजों के साथ स्टाफ कर्मियों को दिक्कतें झेलनी पड़ीं। अस्पताल के कई वार्डों में देर रात तक आग की दुर्गंध फैली रही।
वार्ड एक के कारिडोर में लगी आग ने अस्पताल के फायर फाइटिंग सिस्टम की पोल खोल दी। वार्ड में तीमारदारों ने आरोप लगाया कि जब अस्पताल का फायर फाइटिंग सिस्टम खोला गया तो उसका पाइप कई जगह से टूट गया।
तीमारदार मोहम्मद आजम ने बताया कि अस्पताल की अपनी कोई व्यवस्था नहीं चल पाई। तीमारदार मोहम्मद रियाज ने बताया कि जब अस्पताल के फायर फाइटिंग सिस्टम की पाइप टूटने लगीं तो वह अपनी बेटी सुमेरा को उठाकर बाहर ले आए। उसका आपरेशन हुआ था। तीमारदार मोहम्मद शरीफ ने बताया कि धुएं का गुबार भर जाने से वार्ड में खड़ा होना भी मुश्किल हो रहा था।