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मौत के साये में सीमा पर धान काटने लगे किसान

Sun, 19 Oct 2014 12:33 AM IST
Updated Sun, 19 Oct 2014 12:33 AM IST
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Farmer cutting rice at the border began in the shadow of death

सीमावर्ती गांवों के किसानों ने मौत के साये में ही सही, लेकिन धान की कटाई शुरू कर दी है। परिवार पालने की फिक्र के आगे पाकिस्तानी गोलाबारी की परवाह किए बगैर ग्रामीणों ने खेतों पर जाना तय कर लिया है।

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शनिवार की सुबह भी पाकिस्तान ने दो घंटे तक गोलाबारी की थी। पिछले दो-तीन दिनों तक सीमा पर तनाव भरी खामोशी के बीच किसानों ने खेतों पर पहुंचे थे। जब उन्होंने धान की फसल को पका देखा तो उन्हें परिवार पालने की फिक्र आई।
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गोलाबारी की दशहत के बीच फसल नहीं काटना परिवार को भुखमरी की ओर धकेलने जैसा नजर आया। ऐसे में किसान गोलाबारी की परवाह किए बिना फसल की कटाई में जुट गए। तारबंदी के पास ही खेतों में बड़ी संख्या में किसानों को धान समेटते देखा जा सकता है।
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बीएसएफ के निर्देशों को कर रहे नजरअंदाज

Farmer cutting rice at the border began in the shadow of death

हालांकि, सीमा सुरक्षा बलों ने तारबंदी के पास खेतों पर जाने से मना किया था। इसके बावजूद किसानों ने जान जोखिम में डालकर धान काटने का विकल्प चुना।

किसान सुखदेव सिंह, धर्मपाल चौधरी का कहना है कि पाकिस्तानी गोलियों से अगर डरकर दुबक गए तो परिवार का पेट कैसे पालेंगे, घर का खर्च कैसे चलेगा।

धान तो झड़कर जमीन पर बिखर जाएगा। इतना जरूर है कि गोलाबारी के चलते धान समेटने में तमाम मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा, लेकिन

फसल तो काटनी है। किसानों का कहना है कि पाकिस्तान नहीं चाहता है कि यहां के किसान सीमावर्ती खेतों में फसल उगा सकें।

फायरिंग के चलते चौपट हो रही थी फसल

Farmer cutting rice at the border began in the shadow of death

इसी सीजन में जब धान की रोपाई का वक्त था, तब भी पाकिस्तान ने लंबे समय तक गोलाबारी की थी। इसके चलते धान की रोपाई में देरी हुई थी। कम खेतों पर फसल नहीं लगाई जा सकी। जैसे-तैसे धान की रोपाई कर ली गई।

अब फसल पक गई है। इसके काटने का वक्त है। अब फिर पाकिस्तान ने अपने नापाक इरादे जता दिए हैं। पाकिस्तान नहीं चाहता है कि किसान बासमती की फसल काट सकें। इसलिए वह गोलाबारी कर रहा है।

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