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Jammu News: पैलेट गन से गई आंंखों की रोशनी, पर इंशा ने नहीं खोई आशा, पास की 12वीं की परीक्षा
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देश के विभिन्न हिस्सों में दृष्टिहीनों के लिए एक स्कूल की आवश्यकता पर दिया जोर
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद 2016 में भड़की हिंसा के दौरान पैलेट गन से आंखों की रोशनी गंवाने वाली इंशा मुश्ताक ने 12वीं की बोर्ड परीक्षा अच्छे अंकों से पास की है। 22 वर्षीय इंशा ने 500 में से 319 अंक हासिल किए हैं। दक्षिण कश्मीर के शोपियां के सेडो इलाके की रहने वाली इंशा ने अपनी दृष्टि खोने के दो साल बाद कक्षा 10 की परीक्षा पास की थी।
आंखों की रोशनी गंवाने के बाद भी इंशा ने आशा नहीं खोई। सभी बाधाओं को पार करते हुए सफलता प्राप्त की। इंशा ने अपनी सफलता का श्रेय परिवार को दिया है। इंशा ने कहा कि 10वीं कक्षा के बाद उसने दिल्ली पब्लिक स्कूल श्रीनगर में प्रवेश लिया और कंप्यूटर और अंग्रेजी का तीन साल का कोर्स किया। 2021 में 11वीं कक्षा उत्तीर्ण की और अब 12वीं कक्षा उत्तीर्ण की है। इंशा का कहना है कि परिवार इस बात पर अड़ा रहा कि मैं पढूं। उन्होंने कहा कि उम्मीद और हिम्मत मत हारो, पढ़ो और स्वतंत्र बनो। फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।
इंशा ने जम्मू-कश्मीर सेंटर फॉर पीस एंड जस्टिस (जेकेसीपीजे) संस्था को समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया। कहा कि जेकेसीपीजे के निदेशक नादिर अली ने समर्थन किया और मुझे शिक्षा प्रदान की। इंशा का कहना है कि अब वह स्नातक की डिग्री हासिल करना चाहती हैं। साथ ही संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) परीक्षा के लिए कोचिंग क्लास लेना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि वह एक आईएएस अधिकारी बनना चाहती हैं, ताकि सभी दृष्टिबाधित लोगों के लिए एक उदाहरण बन सकूं। चाहती हूं कि उनमें से हर एक स्वतंत्र हो और जीवन में आगे बढ़े। देश के विभिन्न हिस्सों में दृष्टिहीनों के लिए एक स्कूल की आवश्यकता पर भी जोर दिया। यह भी कहा कि कश्मीर घाटी में बहुत कम जागरूकता है। इस कारण दृष्टिबाधित पिछड़ रहे हैं।
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हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर वानी के मारे जाने के तीन दिन बाद 11 जुलाई 2016 को इंशा को छर्रे लगे थे। उन्होंने अपने घर पर बाहर देखने के लिए एक खिड़की खोली थी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद 2016 में भड़की हिंसा के दौरान पैलेट गन से आंखों की रोशनी गंवाने वाली इंशा मुश्ताक ने 12वीं की बोर्ड परीक्षा अच्छे अंकों से पास की है। 22 वर्षीय इंशा ने 500 में से 319 अंक हासिल किए हैं। दक्षिण कश्मीर के शोपियां के सेडो इलाके की रहने वाली इंशा ने अपनी दृष्टि खोने के दो साल बाद कक्षा 10 की परीक्षा पास की थी।
आंखों की रोशनी गंवाने के बाद भी इंशा ने आशा नहीं खोई। सभी बाधाओं को पार करते हुए सफलता प्राप्त की। इंशा ने अपनी सफलता का श्रेय परिवार को दिया है। इंशा ने कहा कि 10वीं कक्षा के बाद उसने दिल्ली पब्लिक स्कूल श्रीनगर में प्रवेश लिया और कंप्यूटर और अंग्रेजी का तीन साल का कोर्स किया। 2021 में 11वीं कक्षा उत्तीर्ण की और अब 12वीं कक्षा उत्तीर्ण की है। इंशा का कहना है कि परिवार इस बात पर अड़ा रहा कि मैं पढूं। उन्होंने कहा कि उम्मीद और हिम्मत मत हारो, पढ़ो और स्वतंत्र बनो। फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।
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इंशा ने जम्मू-कश्मीर सेंटर फॉर पीस एंड जस्टिस (जेकेसीपीजे) संस्था को समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया। कहा कि जेकेसीपीजे के निदेशक नादिर अली ने समर्थन किया और मुझे शिक्षा प्रदान की। इंशा का कहना है कि अब वह स्नातक की डिग्री हासिल करना चाहती हैं। साथ ही संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) परीक्षा के लिए कोचिंग क्लास लेना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि वह एक आईएएस अधिकारी बनना चाहती हैं, ताकि सभी दृष्टिबाधित लोगों के लिए एक उदाहरण बन सकूं। चाहती हूं कि उनमें से हर एक स्वतंत्र हो और जीवन में आगे बढ़े। देश के विभिन्न हिस्सों में दृष्टिहीनों के लिए एक स्कूल की आवश्यकता पर भी जोर दिया। यह भी कहा कि कश्मीर घाटी में बहुत कम जागरूकता है। इस कारण दृष्टिबाधित पिछड़ रहे हैं।
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हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर वानी के मारे जाने के तीन दिन बाद 11 जुलाई 2016 को इंशा को छर्रे लगे थे। उन्होंने अपने घर पर बाहर देखने के लिए एक खिड़की खोली थी।