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बजट सत्र: माता वैष्णो देवी के श्रद्धालुओं को मिलेगी राहत
ब्यूरो, अमर उजाला/श्रीनगर
Updated Thu, 02 Jun 2016 07:39 PM IST
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विधानसभा की कार्रवाई के दौरान मौजूद सीएम और डिप्टी सीएम
- फोटो : File Photo
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बजट में बढ़ाए गए टैक्स पर विपक्ष के साथ-साथ सत्ता पक्ष के एक धड़े के भी तीखे विरोध के बाद सरकार ने रोल बैक किया है। रेडीमेड़ गारमेंट्स, होजरी तथा सेलफोन पर बढ़ाए टैक्स को वापस ले लिया है। एविएशन फ्यूल पर भी बढ़ाए टैक्स को भी हेलीकाप्टर सेवा से हटा लिया गया है। वित्त मंत्री डॉ. हसीब द्राबू ने सदन में यह घोषणा की।
विधानसभा में बजट पर चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि रेडीमेड़ गारमेंट्स, होजरी तथा सेलफोन पर पहले की तरह पांच फीसदी टैक्स ही लगेगा। सरकार ने बजट में इसे शेड्यूल डी-1 में शामिल करते हुए टैक्स बढ़ाकर 14.5 फीसदी कर दिया था। वित्त मंत्री ने कहा कि चूंकि ये सारे आइटम एमआरपी पर बिकते हैं, इस वजह से इन पर टैक्स बढ़ाया जाना मुनासिब नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि एविएशन फ्यूल पर टैक्स बढ़ाने पर सदस्यों की आपत्ति है कि इससे पर्यटकों की संख्या पर असर पड़ेगा। यात्रा महंगी होने की वजह से कम संख्या में पर्यटक आएंगे। कहा कि वे इस बात से सहमत नहीं हैं। दिल्ली तथा अन्य शहरों में भी एविएशन फ्यूल पर टैक्स अधिक है, लेकिन, इसका यात्रियों की संख्या पर असर नहीं पड़ा।
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इस पर नेकां विधायक देवेंद्र सिंह राणा ने आपत्ति जताई कि पर्यटकों की संख्या पर भले ही असर न पड़े, लेकिन, माता वैष्णो देवी दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं पर इसका असर पड़ेगा। पहले ही सरकार ने 12.5 फीसदी टैक्स लगा रखा है। सरकार में शामिल भाजपा ने भी इसे वापस कराने का आश्वासन दिया था, लेकिन, ऐसा नहीं हो पाया।
अब एविएशन टैक्स बढ़ा दिया गया है। इस आपत्ति के बाद वित्त मंत्री ने हेलीकाप्टर सेवा के लिए एविएशन फ्यूल पर बढ़ाया टैक्स वापस लेने की घोषणा की। वित्त मंत्री ने सदस्यों की ढाबों पर टैक्स लगाए जाने संबंधी आपत्ति का जवाब देते हुए कहा कि कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया है।
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विधानसभा में बजट पर चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि रेडीमेड़ गारमेंट्स, होजरी तथा सेलफोन पर पहले की तरह पांच फीसदी टैक्स ही लगेगा। सरकार ने बजट में इसे शेड्यूल डी-1 में शामिल करते हुए टैक्स बढ़ाकर 14.5 फीसदी कर दिया था। वित्त मंत्री ने कहा कि चूंकि ये सारे आइटम एमआरपी पर बिकते हैं, इस वजह से इन पर टैक्स बढ़ाया जाना मुनासिब नहीं होगा।
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उन्होंने कहा कि एविएशन फ्यूल पर टैक्स बढ़ाने पर सदस्यों की आपत्ति है कि इससे पर्यटकों की संख्या पर असर पड़ेगा। यात्रा महंगी होने की वजह से कम संख्या में पर्यटक आएंगे। कहा कि वे इस बात से सहमत नहीं हैं। दिल्ली तथा अन्य शहरों में भी एविएशन फ्यूल पर टैक्स अधिक है, लेकिन, इसका यात्रियों की संख्या पर असर नहीं पड़ा।
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इस पर नेकां विधायक देवेंद्र सिंह राणा ने आपत्ति जताई कि पर्यटकों की संख्या पर भले ही असर न पड़े, लेकिन, माता वैष्णो देवी दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं पर इसका असर पड़ेगा। पहले ही सरकार ने 12.5 फीसदी टैक्स लगा रखा है। सरकार में शामिल भाजपा ने भी इसे वापस कराने का आश्वासन दिया था, लेकिन, ऐसा नहीं हो पाया।
अब एविएशन टैक्स बढ़ा दिया गया है। इस आपत्ति के बाद वित्त मंत्री ने हेलीकाप्टर सेवा के लिए एविएशन फ्यूल पर बढ़ाया टैक्स वापस लेने की घोषणा की। वित्त मंत्री ने सदस्यों की ढाबों पर टैक्स लगाए जाने संबंधी आपत्ति का जवाब देते हुए कहा कि कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया है।
किसी सेक्टर की अनदेखी नहीं की गई
महबूबा मुफ्ती के साथ वित्त मंत्री हासिब द्राबु
- फोटो : File Photo
द्राबू ने कहा कि बजट में किसी सेक्टर की अनदेखी नहीं की गई है। दरअसल सदस्यों ने बजट को गौर से समझा नहीं है। उन्होंने पूरे बजट को पढ़ने की जरूरत भी नहीं समझी है। केवल बजट भाषण को पढ़कर ही हंगामा कर रहे हैं।
दरअसल, बजट भाषण में सारी चीजों का उल्लेख किया जाना जरूरी नहीं है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में 614 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।। हार्टिकल्चर सेक्टर की तस्वीर अगले तीन साल में बदल जाएगी। इस क्षेत्र के लिए पिछले साल 126 करोड़ का प्रावधान किया गया था, जबकि इस बजट में 200 करोड़ रुपये रखे गए हैं।
सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण के लिए 440 करोड़ की तुलना में 600 करोड़ और पावर सेक्टर के लिए 391 करोड़ की तुलना में 1102 करोड़ का प्रावधान किया गया है। कहा कि कैपेक्स (पूंजी व्यय) कम होने की आपत्ति भी जायज नहीं है। वर्ष 2014-15 में 6352 करोड़ का प्रावधान था जबकि 2016-17 के लिए 19000 करोड़ रुपये प्रस्तावित किया गया है।
दरअसल, बजट भाषण में सारी चीजों का उल्लेख किया जाना जरूरी नहीं है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में 614 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।। हार्टिकल्चर सेक्टर की तस्वीर अगले तीन साल में बदल जाएगी। इस क्षेत्र के लिए पिछले साल 126 करोड़ का प्रावधान किया गया था, जबकि इस बजट में 200 करोड़ रुपये रखे गए हैं।
सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण के लिए 440 करोड़ की तुलना में 600 करोड़ और पावर सेक्टर के लिए 391 करोड़ की तुलना में 1102 करोड़ का प्रावधान किया गया है। कहा कि कैपेक्स (पूंजी व्यय) कम होने की आपत्ति भी जायज नहीं है। वर्ष 2014-15 में 6352 करोड़ का प्रावधान था जबकि 2016-17 के लिए 19000 करोड़ रुपये प्रस्तावित किया गया है।