जम्मू-कश्मीर में सलाहकार परिषद के गठन की कवायद तेज, उमर के दिल्ली जाने से चर्चाओं ने पकड़ा जोर
सलाहकार परिषद में 10 से 12 सदस्य हो सकते हैं। सलाहकार परिषद, मंत्रि परिषद की तरह काम करेगी। परिषद का शपथ ग्रहण दो जून को हो सकता है। सूत्रों का कहना है कि केंद्र शासित प्रदेश सरकार अधिनियम 1963 की धारा 45 के तहत राष्ट्रपति की ओर से मुख्यमंत्री को नियुक्त किया जा सकता है।
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केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में सलाहकार परिषद के गठन की कवायद तेज हो गई है। इस परिषद में 10 से 12 सदस्य हो सकते हैं। परिषद के पास गृह को छोड़कर सभी विभागों से जुड़े फैसले लेने का अधिकार होगा। यह परिषद मंत्रि परिषद की तरह काम करेगी। परिषद का नेतृत्व जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी के अध्यक्ष अल्ताफ बुखारी करेंगे। परिषद का शपथ ग्रहण दो जून को हो सकता है। इस सिलसिले में केंद्र सरकार के साथ बातचीत अंतिम दौर में है।
सूत्रों का कहना है कि परिषद में उत्तरी और दक्षिणी कश्मीर के युवा चेहरे को तरजीह मिल सकती है। परिषद सभी प्रकार के फैसले लेगी, वह केवल गृह विभाग से जुड़े मामलों में अपनी सिफारिशें केंद्र सरकार को भेजेगी जहां उस पर फैसला होगा।
बताया गया कि लॉकडाउन की वजह से इन दिनों दिल्ली में रह रहे अल्ताफ बुखारी की परिषद को लेकर केंद्र सरकार के साथ बातचीत चल रही है जो अंतिम दौर में है। वे 28 मई को श्रीनगर लौट सकते हैं। इसके बाद परिषद के सदस्यों के नाम को अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके साथ ही कई लोगों को जिला विकास बोर्ड और विभिन्न कॉरपोरेशन व बोर्ड के उपाध्यक्ष का दायित्व सौंपा जा सकता है।
अल्ताफ बुखारी के साथ उस्मान, विजय बकाया, सुनील शर्मा और चौधरी जुल्फिकार के नाम आए हैं सामने
हालांकि, अल्ताफ बुखारी के साथ उस्मान मजीद, विजय बकाया, सुनील शर्मा और चौधरी जुल्फिकार अली के नाम सामने आए हैं। इसमें उस्मान को उत्तरी कश्मीर, विजय बकाया को कश्मीरी पंडित, सुनील शर्मा को चिनाब घाटी और जुल्फिकार को राजोरी-पुंछ की नुमाइंदगी के रूप में देखा जा रहा है।
लेकिन अभी मध्य व दक्षिणी कश्मीर, जम्मू, उधमपुर, कठुआ, रियासी, सांबा का कोई प्रतिनिधित्व नहीं दिख रहा है। माना जा रहा है कि अंतिम सप्ताह में यह मूर्त रूप लेगी जिसमें सभी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हुए नाम तय किए जाएंगे।
अधिनियम के तहत हो सकता है गठन
सूत्रों का कहना है कि केंद्र शासित प्रदेश सरकार अधिनियम 1963 की धारा 45 के तहत राष्ट्रपति की ओर से मुख्यमंत्री को नियुक्त किया जा सकता है। मुख्यमंत्री की सलाह पर वे अन्य मंत्रियों की नियुक्ति कर सकते हैं। सूत्रों के अनुसार इसी अधिनियम के तहत सलाहकार परिषद का गठन किया जा सकता है।
उमर के दिल्ली जाने से चर्चाओं ने पकड़ा जोर
नेशनल कांफ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला नौ महीने बाद सोमवार को एयर एशिया के विमान से दिल्ली गए थे। इसके बाद चर्चाओं ने जोर पकड़ा है कि केंद्र सरकार उनसे सलाहकार परिषद को लेकर बात कर सकती है।
पहले भी हो चुकी है कवायद
सलाहकार परिषद के गठन की कवायद पहले भी हो चुकी है। लॉकडाउन से पहले भी इस चर्चा ने जोर पकड़ा था। हालांकि, उस वक्त भाजपा की राज्य इकाई की ओर से परिषद के गठन पर असहमति जताई गई थी। इसके बाद सलाहकार परिषद के गठन की तैयारियों को विराम लग गया था।