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डोगरी भाषा, संस्कृति और साहित्य के बढ़ावे को हरसंभव मदद : भरत सिंह
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संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। साहित्य अकादमी नई दिल्ली और जम्मू-कश्मीर कला, संस्कृति और भाषा अकादमी जम्मू ने शनिवार को संगोष्ठी का आयोजन किया। इसका विषय था, साहित्य का एक रूप अनुवाद, डोगरी से अन्य भाषा में अनुवाद और अन्य भाषाओं से डोगरी में अनुवाद। प्रसिद्ध डोगरी लेखक और साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता दर्शन दर्शी ने संगोष्ठी की अध्यक्षता की। अकादमी के सचिव भरत सिंह मन्हास मुख्य अतिथि थे। उन्होंने डोगरी भाषा, संस्कृति और साहित्य को बढ़ावा देने के लिए हरसंभव मदद की बात कही।
केएल सहगल हॉल में आयोजित संगोष्ठी में डोगरी साहित्य के प्रख्यात विद्वानों ने दो अलग-अलग सत्रों में अपने पेपर प्रस्तुत किए। प्रकाश प्रेमी, निर्मल विनोद और जगदीप दुबे जैसे विद्वानों ने संगोष्ठी में पेपर प्रस्तुत किए। पद्मश्री जितेंद्र उधमपुरी ने प्रथम सत्र, जबकि प्रोफेसर अर्चना केसर ने दूसरे सत्र की अध्यक्षता की। साहित्य अकादमी के सलाहकार बोर्ड के संयोजक मोहन सिंह ने अपने स्वागत भाषण में देश भर में विभिन्न भाषाओं और साहित्य के प्रचार के लिए शुरू की गई साहित्य अकादमी की विभिन्न योजनाओं का विस्तार से खुलासा किया। प्रख्यात विद्वान एवं लेखक डॉ. ज्ञान सिंह ने कुंजी भाषण प्रस्तुत किया।
दर्शन दर्शी ने अपने अध्यक्षीय भाषण में इस क्षेत्र में काम कर रहे डोगरी लेखकों/विद्वानों के प्रयासों की सराहना की और उज्ज्वल भविष्य की आशा जताई। डोगरी सलाहकार मंडल के संयोजक पद्मश्री मोहन सिंह ने परिचयात्मक नोट प्रस्तुत किया और रीता खड़याल ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।
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जम्मू। साहित्य अकादमी नई दिल्ली और जम्मू-कश्मीर कला, संस्कृति और भाषा अकादमी जम्मू ने शनिवार को संगोष्ठी का आयोजन किया। इसका विषय था, साहित्य का एक रूप अनुवाद, डोगरी से अन्य भाषा में अनुवाद और अन्य भाषाओं से डोगरी में अनुवाद। प्रसिद्ध डोगरी लेखक और साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता दर्शन दर्शी ने संगोष्ठी की अध्यक्षता की। अकादमी के सचिव भरत सिंह मन्हास मुख्य अतिथि थे। उन्होंने डोगरी भाषा, संस्कृति और साहित्य को बढ़ावा देने के लिए हरसंभव मदद की बात कही।
केएल सहगल हॉल में आयोजित संगोष्ठी में डोगरी साहित्य के प्रख्यात विद्वानों ने दो अलग-अलग सत्रों में अपने पेपर प्रस्तुत किए। प्रकाश प्रेमी, निर्मल विनोद और जगदीप दुबे जैसे विद्वानों ने संगोष्ठी में पेपर प्रस्तुत किए। पद्मश्री जितेंद्र उधमपुरी ने प्रथम सत्र, जबकि प्रोफेसर अर्चना केसर ने दूसरे सत्र की अध्यक्षता की। साहित्य अकादमी के सलाहकार बोर्ड के संयोजक मोहन सिंह ने अपने स्वागत भाषण में देश भर में विभिन्न भाषाओं और साहित्य के प्रचार के लिए शुरू की गई साहित्य अकादमी की विभिन्न योजनाओं का विस्तार से खुलासा किया। प्रख्यात विद्वान एवं लेखक डॉ. ज्ञान सिंह ने कुंजी भाषण प्रस्तुत किया।
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दर्शन दर्शी ने अपने अध्यक्षीय भाषण में इस क्षेत्र में काम कर रहे डोगरी लेखकों/विद्वानों के प्रयासों की सराहना की और उज्ज्वल भविष्य की आशा जताई। डोगरी सलाहकार मंडल के संयोजक पद्मश्री मोहन सिंह ने परिचयात्मक नोट प्रस्तुत किया और रीता खड़याल ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।
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