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जंगल को काटकर औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की तैयारी
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environment
बाड़ी ब्राह्मणा। पंचायत अपर कार्थोली के गांव दसाल का ऊपरी इलाका घना जंगल है। जो 209 कनाल जमीन पर फैला हुआ है। इसका महत्व यह है कि इसमें कई बहुमूल्य जानवरों का वास है। जंगल में नीलगाय, हिरण, मोर और अन्य देखने को मिलते हैं। स्थानीय लोग सैरगाह के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। हाल ही में राजस्व विभाग की तरफ से इस जंगल की 209 कनाल भूमि को सिडको को स्थानांतरित कर दिया गया है। सरकार के आदेश अनुसार इस जंगल को काटकर औद्योगिक क्षेत्र को बढ़ावा दिया जाएगा। जंगल को काटकर औद्योगिक क्षेत्र बनाना यहां प्राकृतिक वातावरण को नुकसान पहुंचाना है।
लोगों का कहना है कि हमारे बुजुर्गों ने इस जंगलों की देखभाल की है। अगर इस जंगल को काटकर औद्योगिक क्षेत्र बनाने का आदेश दिया जाता है तो यह सरकार की बड़ी नाकामी होगी। क्योंकि सरकार ही पेड़ लगाओ-पर्यावरण बचाओ का नारा देती है। हर साल पौध रोपण पर अलग से बजट खर्च किया जाता है। स्थानीय लोगों ने बताया कि जब से बाड़ी ब्राह्मणा औद्योगिक क्षेत्र बना है। प्रदूषण और बीमारियों के हमें कुछ भी हासिल नहीं हुआ है। क्योंकि फैक्ट्रियों से निकलता धुआं कई प्रकार की बीमारियों को आमंत्रित करता है। ऐसे कई लोग हैं जो गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। उसके बावजूद भी इस घने जंगल को काटने का फैसला किया गया है। लोगों का कहना है कि सिडको को यह जमीन स्थानांतरित करने वालों ने जमीनी स्तर पर काम नहीं किया है। क्योंकि फॉरेस्ट एक्ट-1980 के तहत किसी भी जंगल पर कटाव से पहले पर्यावरण मंत्रालय और वन्य जीव विभाग से अनुमति लेनी पड़ती है। उनके एनओसी देने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाती है। राजस्व विभाग ने बिना सोचे समझे ही जमीन को उनके हवाले कर दिया है। इस मुद्दे पर कुछ दिन पहले भी स्थानीय लोगों ने राजस्व विभाग और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों ने कहा था कि इस जंगल को हम किसी भी कीमत पर नहीं कटने देंगे। चाहे इसके लिए हमें आंदोलन उग्र ही क्यों न करना पड़े।
उन्होंने बताया कि जंगल का कटाव हम लोग अपने जीवन का पतन के बराबर समझेंगे। इसलिए सरकार को इस विषय में सोचना चाहिए और इस फैसले को तुरंत वापस लेना चाहिए। दूसरी ओर इंडस्ट्रीज को बढ़ाने के लिए सरकार को ऐसी और कोई जमीन देखनी चाहिए जहां औद्योगिक क्षेत्र का विस्तार किया जा सके जो स्थानीय लोगों से दूरदराज क्षेत्रों में हो।
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राजस्व विभाग ने अपने हिसाब से ही जमीन औद्योगिक क्षेत्र के लिए सौंपी है। हालांकि इस 209 कनाल जमीन पर वन विभाग का कब्जा है। जो भी पेड़ लगाए गए हैं उनकी देखरेख वन विभाग के पास है। इसलिए जब तक हमारी तरफ से जमीन को पूरे कायदे कानून के साथ नहीं सौंपा जाएगा तब तक हम इस पर कोई भी काम नहीं होने देंगे। हमारे पास ऐसा कोई भी आदेश नहीं आया है, जिससे जंगल काटकर औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जाए।
- राकेश्वर सिंह, ब्लॉक ऑफिसर, वन विभाग, बाड़ी ब्राह्मणा
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लोगों का कहना है कि हमारे बुजुर्गों ने इस जंगलों की देखभाल की है। अगर इस जंगल को काटकर औद्योगिक क्षेत्र बनाने का आदेश दिया जाता है तो यह सरकार की बड़ी नाकामी होगी। क्योंकि सरकार ही पेड़ लगाओ-पर्यावरण बचाओ का नारा देती है। हर साल पौध रोपण पर अलग से बजट खर्च किया जाता है। स्थानीय लोगों ने बताया कि जब से बाड़ी ब्राह्मणा औद्योगिक क्षेत्र बना है। प्रदूषण और बीमारियों के हमें कुछ भी हासिल नहीं हुआ है। क्योंकि फैक्ट्रियों से निकलता धुआं कई प्रकार की बीमारियों को आमंत्रित करता है। ऐसे कई लोग हैं जो गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। उसके बावजूद भी इस घने जंगल को काटने का फैसला किया गया है। लोगों का कहना है कि सिडको को यह जमीन स्थानांतरित करने वालों ने जमीनी स्तर पर काम नहीं किया है। क्योंकि फॉरेस्ट एक्ट-1980 के तहत किसी भी जंगल पर कटाव से पहले पर्यावरण मंत्रालय और वन्य जीव विभाग से अनुमति लेनी पड़ती है। उनके एनओसी देने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाती है। राजस्व विभाग ने बिना सोचे समझे ही जमीन को उनके हवाले कर दिया है। इस मुद्दे पर कुछ दिन पहले भी स्थानीय लोगों ने राजस्व विभाग और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों ने कहा था कि इस जंगल को हम किसी भी कीमत पर नहीं कटने देंगे। चाहे इसके लिए हमें आंदोलन उग्र ही क्यों न करना पड़े।
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उन्होंने बताया कि जंगल का कटाव हम लोग अपने जीवन का पतन के बराबर समझेंगे। इसलिए सरकार को इस विषय में सोचना चाहिए और इस फैसले को तुरंत वापस लेना चाहिए। दूसरी ओर इंडस्ट्रीज को बढ़ाने के लिए सरकार को ऐसी और कोई जमीन देखनी चाहिए जहां औद्योगिक क्षेत्र का विस्तार किया जा सके जो स्थानीय लोगों से दूरदराज क्षेत्रों में हो।
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राजस्व विभाग ने अपने हिसाब से ही जमीन औद्योगिक क्षेत्र के लिए सौंपी है। हालांकि इस 209 कनाल जमीन पर वन विभाग का कब्जा है। जो भी पेड़ लगाए गए हैं उनकी देखरेख वन विभाग के पास है। इसलिए जब तक हमारी तरफ से जमीन को पूरे कायदे कानून के साथ नहीं सौंपा जाएगा तब तक हम इस पर कोई भी काम नहीं होने देंगे। हमारे पास ऐसा कोई भी आदेश नहीं आया है, जिससे जंगल काटकर औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जाए।
- राकेश्वर सिंह, ब्लॉक ऑफिसर, वन विभाग, बाड़ी ब्राह्मणा