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Engineer's Day: न छुट्टी न परिजनों से बात, पीले हेलमेट में सड़क पर कट रही रात, फिर भी नहीं रुके हमारे इंजीनियर

Mon, 15 Sep 2025 11:20 AM IST
निकिता गुप्ता राकेश शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
राकेश शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: निकिता गुप्ता Updated Mon, 15 Sep 2025 11:20 AM IST
सार

जम्मू-कश्मीर में युद्ध, भूस्खलन और अमरनाथ यात्रा जैसी चुनौतियों के बीच एनएचएआई के इंजीनियर्स ने बिना छुट्टी लिए दिन-रात काम कर सुरक्षित यातायात सुनिश्चित किया। रामबन और कैफेटेरिया मोड़ जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में रिकॉर्ड समय में सुरंगें बनाकर यात्रियों को जाम और हादसों से राहत दिलाई गई।

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Engineers in Jammu and Kashmir struggled against war, Amarnath Yatra and adverse weather
Engineer's Day 2025 - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

न छुट्टी और न परिजन से बात, सड़क पर पीला हेलमेट पहने इंजीनियर्स ने अपनी पूरी ताकत हमारे और आपके सफर को महफूज बनाने में झोंक दी है। प्रदेश में युद्ध के हालात के ठीक बाद अमरनाथ यात्रा और विपरीत मौसम में यातायात को बहाल रखने की चुनौती से जूझते जम्मू-कश्मीर के इंजीनियर दिन-रात सड़क पर हैं। इंजीनियर्स की सबसे बड़ी भूमिका अमरनाथ यात्रा के दौरान रही है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद इस यात्रा में जाम और भूस्खलन से मुक्ति पर एनएचएआई के इंजीनियर्स ने पूरी ताकत से कहीं नए रास्तों का निर्माण किया तो कहीं ऐसी सुरंग बना डाली जो भूस्खलन के बावजूद मार्ग और यातायात को सुरक्षित रखे।

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अमरनाथ यात्रा के दौरान रामबन और कैफेटेरिया मोड़ पर सुरंग का निर्माण रिकॉर्ड समय में किया गया। अमरनाथ यात्रा के दौरान इन दोनों सुरंगों की वजह से यात्रियों को जाम से निजात मिल गई। उधमपुर-रामबन-बनिहाल मार्ग पर इंजीनियर बिना छुट्टी लिए हफ्तों तक चौबीस घंटे काम करते रहे हैं। मानसून की आपदा में पुल क्षतिग्रस्त होने पर रिकॉर्ड समय में यातायात को शुरू करवा दिया।
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आइए जानते हैं, उनकी चुनौतियों और लगन को उन्हीं की जुबानी।

अमरनाथ यात्रा में नहीं थी परिजनों के फोन उठाने की इजाजत
एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी आरएस यादव ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के समय ज्यादातर लोग काम छोड़कर चले गए थे। इसके ठीक बाद अमरनाथ यात्रा शुरू होने थी। रामबन का हिस्सा सबसे ज्यादा क्षतिग्रस्त था। यहां भूस्खलन से यात्रियों की मुश्किलें बढ़ सकती थीं। इसे लेकर व्यापक स्तर पर योजना बनाई गई। जिन इंजीनियर को यहां सुरंग बनाने और मार्ग दुरुस्त रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई, उन्हें लक्ष्य पूरा होने तक न तो घर जाने की इजाजत थी और न ही काम के समय फोन उठाने की। यहां 24 घंटे काम हुआ है। इसका असर अमरनाथ यात्रा पर पड़ा और जाम या हादसे की कोई खबर यात्रा के दौरान नहीं आई। 

अमरनाथ यात्रा से पहले रामबन में बनी सुरंग 
रामबन के एक्स पीडी पुरुषोतम कुमार अनुसार रामबन में अप्रैल माह में भारी बारिश से भूस्खलन हुआ था। यहां ज्यादातर पहाड़ खिसकने वाले हैं। थोड़ी सी बारिश से पत्थर गिरने शुरू हो जाते हैं। यहां अमरनाथ यात्रियों के वाहन गुजरने पर भूस्खलन का खतरा था। इसे देखते हुए एक सुरंग का प्रस्ताव तैयार किया गया। इस सुरंग में सूरज की रोशनी सीधी जा सकती है लेकिन पहाड़ी से पत्थर गिरता है तो वो अंदर नहीं जा पाएगा। इंजीनिरिंग का यह अद्भुत नमूना है। इसे तैयार कर लिया गया है और अब जम्मू-श्रीनगर के बीच यात्री सुरक्षित सफर कर रहे हैं। 

कैफेटेरिया मोड़ पर सुरंग का हुआ निर्माण 
शुभम यादव, पीडी रामबन ने बताया कि अमरनाथ यात्रा के दौरान हर साल कैफेटेरिया मोड़ पर जाम लगता था। यहां कई घंटे तक वाहन फंसे रहते थे और इससे यात्रियों को असुविधा होती थी। यात्रा से काफी पहले इस मोड़ पर सुरंग के काम को पूरा करने की योजना बनाई गई और इस योजना के तहत दिन-रात काम शुरू किया गया। यात्रा से ठीक पहले यह सुरंग बनकर तैयार हो गई। इससे यात्रियों को जाम और हादसे के खतरे से राहत मिल गई। 

पठानकोट-जम्मू के बीच यातायात की चुनौती 
जम्मू के प्रोजेक्ट डायरेक्टर राजीव कुमार ने बताया कि दिल्ली-कटड़ा एक्सप्रेस वे के बीच पठानकोट-जम्मू नेशनल हाईवे को 24 घंटे चलाए रखना सबसे बड़ी चुनौती है। नेशनल हाईवे की रूपरेखा लगातार बदल रही है। इंजीनियर्स ने इस नेशनल हाईवे को कभी बंद नहीं होने दिया। भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान सेना के वाहनों ने इस नेशनल हाईवे का इस्तेमाल किया। ऐसे में एनएचएआई का युद्ध में यह एक बड़ा योगदान रहा है। 

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उधमपुर में मानसून से निपटने को सड़क पर कटी रातें 
उधमपुर के प्रोजेक्ट डायरेक्टर अनुज कुमार के अनुसार मानसून में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। नेशनल हाईवे कई जगह प्रभावित हुआ। भूस्खलन और भारी बारिश के बीच मार्ग को बहाल रखना सबसे बड़ी चुनौती थी। इससे निपटते हुए एनएचएआई के इंजीनियर्स उधमपुर में संपर्क बहाल करने में कामयाब रहे। भारी बारिश से नेशनल हाईवे प्रभावित होने पर वैकल्पिक मार्ग का भी इंतजाम किया गया। इसके लिए दिन रात इंजीनियर्स सड़क पर डटे रहे। 

श्रीनगर में संभाला अमरनाथ यात्रा का मोर्चा
अमरीश मानकर एक्स पीडी श्रीनगर ने बताया कि अमरनाथ यात्रा में श्रीनगर की तरफ का हिस्सा उनके जिम्मे था। यात्रा में किसी भी तरह का विघ्न न डले इसके लिए पूरी ताकत झोंक दी गई। अमरनाथ यात्रा में श्रीनगर की तरफ नेशनल हाईवे कभी भी प्रभावित नहीं हुआ। इस मार्ग की निगरानी इंजीनियर्स लगातार कर रहे थे। योजनाबद्ध तरीके से भारी मशीनरी मार्ग पर तैनात की गई थी।

पुल क्षतिग्रस्त होते उफनते नाले में उतर गए इंजीनियर
तकनीकी प्रबंधक एनएसएआई जम्मू के ईश गुप्ता ने बताया कि मानसून के दौरान कठुआ में पुल क्षतिग्रस्त हो गया था। इस पुल के टूटने से जम्मू-पठानकोट संपर्क खतरे में आ गया। उन्होंने बताया कि इंजीनियर्स तैनात कर यातायात को दूसरे पुल से शुरू किया गया। खास बात यह रही कि बारिश के बीच ही दूसरे पुल का निरीक्षण किया। एनएचएआई के इंजीनियर्स उफनते नाले में मशीनें उतार कर पुल की मरम्मत और निरीक्षण कार्य पूरा करते रहे।

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