{"_id":"5f2f1b6d8ebc3e3d1027db10","slug":"engineer-munir-in-srinagar-became-a-teacher-when-he-saw-the-loss-of-children-s-education","type":"story","status":"publish","title_hn":"बच्चों की पढ़ाई का नुकसान होते देखा तो टीचर बन गए इंजीनियर मुनीर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बच्चों की पढ़ाई का नुकसान होते देखा तो टीचर बन गए इंजीनियर मुनीर
Sun, 09 Aug 2020 03:08 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर
अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 09 Aug 2020 03:08 AM IST
सार
- श्रीनगर के ईदगाह में रोज सुबह पांच बजे लगाते हैं क्लास, 80 बच्चे आते हैं पढ़न
- कोरोना काल में गाइडलाइन का भी पालन, घर से ही मैट और कुर्सी लाते हैं बच्चे
विज्ञापन
कोरोना योद्धाओं की दास्तान...
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कोरोना के कारण देशभर में शिक्षण संस्थान बंद होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। जम्मू-कश्मीर में टूजी इंटरनेट के कारण ऑनलाइन भी पढ़ाई नहीं हो पाती। ऐसे में बच्चों को पढ़ाई के नुकसान से बचाने के लिए श्रीनगर के एक इंजीनियर ने ओपन क्लास लगानी शुरू कर दी। अब शिक्षक बन स्थानीय बच्चों को गणित और भौतिक विज्ञान की मुफ्त शिक्षा दे रहे हैं।
विज्ञापन
पेशे से सिविल इंजीनियर मुनीर आलम 80 से ज्यादा बच्चों के लिए नई उम्मीद बने हुए हैं। मुनीर वर्ष 2004 में श्रीनगर के एनआईटी से इंजीनियरिंग पास आउट हैं। वह रोज सुबह पांच बजे ईदगाह ग्राउंड पहुंचते हैं। यहां सुबह के बैच में करीब 40 बच्चे पढ़ने आते हैं।
विज्ञापन
मुनीर ने बताया कि अगर किसी को अपनी कौम के बच्चों के भविष्य का दर्द होगा तो उसे अपनी नींद कुर्बान करनी ही पड़ेगी। मुनीर कहते हैं कि बच्चे दो किस्म के नुकसान से गुजर रहे हैं।
विज्ञापन
एक मानसिक तनाव और दूसरा पढ़ाई का नुकसान। अगर इस समय उन्हें सही राह पर नहीं लाया गया तो वो किसी गलत राह की ओर निकल पड़ेंगे और कल उन पर गलत टैग लगेगा।
ऑनलाइन क्लास से कई गुना बेहतर है मुनीर सर की क्लास :
इस क्लास में पढ़ने वाली छात्रा साईमा हमीद ने कहा कि जो ऑनलाइन क्लास कराई जा रही है, उससे मानसिक तनाव होता है। एक तो इंटरनेट ढंग से नहीं चलता, ऊपर से मोबाइल सामने रहने से आंखों में भी परेशानी होती है। इससे तो कई गुना बेहतर है मुनीर सर की क्लास।
अच्छा लगता है बच्चों को पढ़ाना
मुनीर ने बताया कि ओपन एयर क्लास में एक तो बच्चा घर से बाहर निकल पा रहा है और दूसरों से मिलजुल रहा है। इससे उसका मानसिक तनाव कम हो रहा है। बताया कि बच्चों को पढ़ाना उनका शौक है और वो पिछले 20 वर्षों से कई हजार बच्चों को गणित की शिक्षा दे चुके हैं। कहा कि गाइडलाइन का पूरा पालन किया जा रहा है। बच्चे अपने बैठने के लिए कुर्सी या मैट खुद ही लाते हैं।
(फेसबुक ने इस शृंखला के लिए हमारे साथ भागीदारी की है, लेकिन इस कड़ी में प्रकाशित होने वाले समाचारों पर कोई संपादकीय नियंत्रण नहीं लगाया है।)