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Jammu News: सर्दी में बढ़ेगा लोड, हांफेगा ढांचा ग्रामीण इलाकों में 70% हुआ काम
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- तार बदलने, खंभे लगाने का काम बाकी, जुगाड़ के सहारे बिजली आपूर्ति
- ट्रांसफार्मर जलने पर आठ से दस घंटे तक रहता है गांवों में अंधेरा
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। शहर और ग्रामीण इलाकों में बिजली ढांचा अभी भी मजबूत नहीं हुआ है। सर्दी के मौसम में लोग बिजली कटौती का सामना करेंगे। ग्रामीण इलाकों में 30 फीसदी काम शेष बचा है। जम्मू शहर में 10 फीसदी काम बाकी है। यहां पर तारों, खंभों को बदला जा चुका है लेकिन ग्रिड स्टेशनों की क्षमता बढ़ना बाकी है। ग्रामीण इलाकों में हालत यह है कि तार जमीन को छू रही हैं। हवा चलने पर ट्रांसफार्मर जल जाते हैं। सबसे ज्यादा परेशानी सर्दी में आती है। ग्रामीण इलाकों में ट्रांसफार्मर जलने पर आठ से दस घंटे का लंबा इंतजार करना पड़ता है। कई बार तो 24 घंटे बाद समस्या का निदान होता है। बिजली कारपोरेशन के अनुसार काम जारी है। दो साल के अंदर काम पूरा किया जाएगा।
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कब किस योजना पर हुआ काम
इंटरग्रेटेड पावर डेवलपमेंट योजना (आईपीडीएस ) के तहत 1600 करोड़ की लागत से काम हो रहा है। पहले प्रदेशभर में प्रधानमंत्री डेवलपमेंट प्रोग्राम से वर्ष 2015 से लेकर 2019 तक 1200 करोड़ रुपये की राशि बिजली ढांचे पर खर्च की गई। वर्ष 2021 तक दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत 2806 करोड़ रुपये से काम हुआ है। इसमें ग्रामीण और शहरी इलाकों में ट्रांसफार्मरों को अपग्रेड करने से लेकर तार बदलने का काम किया गया। ग्रामीण इलाकों में बिजली के खंभों के अलावा ट्रांसफार्मर स्थापित होने हैं। योजना के तहत तीन साल में काम पूरा किया जाना है।
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इन वार्डों में भी खंभे नहीं लगे
नगर निगम के साथ जुड़े नए वार्डों में भी बिजली ढांचा मजबूत नहीं हो पाया है। वार्ड-72 से 75 के अंतर्गत कई इलाकों में खंभे और ट्रांसफार्मर लगाए जाने हैं। कारपोरेशन के अनुसार काम के लिए टेंडर किए जा रहे हैं। तमाम इलाकों में सुविधा दी जाएगी।
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क्या होगा समाधान
सर्दी से बचने के लिए 150 ट्रांसफार्मर रखे रिजर्व
सर्दी में लोड बढ़ने से ट्रांसफार्मर ज्यादा जलते हैं। ऐसे में अभी तक 150 ट्रांसफार्मरों को रिजर्व रखा गया है। जैसे ही शहर में ट्रांसफार्मर जलेंगे इन्हें छह घंटे के अंदर बदला जाएगा। ज्यादा परेशानी दिसंबर के पहले सप्ताह से आती है। इस दौरान घरों में हीटर, ब्लोअर और अन्य उपकरणों का प्रयोग होता है।
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बिजली ढांचे को मजबूत करने पर काम चल रहा है। ग्रामीण इलाकों में पहले कवर किया जाएगा। अधिकांश कामों के लिए टेंडर किए जा चुके हैं।
- केके थापा, मुख्य अभियंता, बिजली कारपोरेशन
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- ट्रांसफार्मर जलने पर आठ से दस घंटे तक रहता है गांवों में अंधेरा
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। शहर और ग्रामीण इलाकों में बिजली ढांचा अभी भी मजबूत नहीं हुआ है। सर्दी के मौसम में लोग बिजली कटौती का सामना करेंगे। ग्रामीण इलाकों में 30 फीसदी काम शेष बचा है। जम्मू शहर में 10 फीसदी काम बाकी है। यहां पर तारों, खंभों को बदला जा चुका है लेकिन ग्रिड स्टेशनों की क्षमता बढ़ना बाकी है। ग्रामीण इलाकों में हालत यह है कि तार जमीन को छू रही हैं। हवा चलने पर ट्रांसफार्मर जल जाते हैं। सबसे ज्यादा परेशानी सर्दी में आती है। ग्रामीण इलाकों में ट्रांसफार्मर जलने पर आठ से दस घंटे का लंबा इंतजार करना पड़ता है। कई बार तो 24 घंटे बाद समस्या का निदान होता है। बिजली कारपोरेशन के अनुसार काम जारी है। दो साल के अंदर काम पूरा किया जाएगा।
कब किस योजना पर हुआ काम
इंटरग्रेटेड पावर डेवलपमेंट योजना (आईपीडीएस ) के तहत 1600 करोड़ की लागत से काम हो रहा है। पहले प्रदेशभर में प्रधानमंत्री डेवलपमेंट प्रोग्राम से वर्ष 2015 से लेकर 2019 तक 1200 करोड़ रुपये की राशि बिजली ढांचे पर खर्च की गई। वर्ष 2021 तक दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत 2806 करोड़ रुपये से काम हुआ है। इसमें ग्रामीण और शहरी इलाकों में ट्रांसफार्मरों को अपग्रेड करने से लेकर तार बदलने का काम किया गया। ग्रामीण इलाकों में बिजली के खंभों के अलावा ट्रांसफार्मर स्थापित होने हैं। योजना के तहत तीन साल में काम पूरा किया जाना है।
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इन वार्डों में भी खंभे नहीं लगे
नगर निगम के साथ जुड़े नए वार्डों में भी बिजली ढांचा मजबूत नहीं हो पाया है। वार्ड-72 से 75 के अंतर्गत कई इलाकों में खंभे और ट्रांसफार्मर लगाए जाने हैं। कारपोरेशन के अनुसार काम के लिए टेंडर किए जा रहे हैं। तमाम इलाकों में सुविधा दी जाएगी।
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क्या होगा समाधान
सर्दी से बचने के लिए 150 ट्रांसफार्मर रखे रिजर्व
सर्दी में लोड बढ़ने से ट्रांसफार्मर ज्यादा जलते हैं। ऐसे में अभी तक 150 ट्रांसफार्मरों को रिजर्व रखा गया है। जैसे ही शहर में ट्रांसफार्मर जलेंगे इन्हें छह घंटे के अंदर बदला जाएगा। ज्यादा परेशानी दिसंबर के पहले सप्ताह से आती है। इस दौरान घरों में हीटर, ब्लोअर और अन्य उपकरणों का प्रयोग होता है।
बिजली ढांचे को मजबूत करने पर काम चल रहा है। ग्रामीण इलाकों में पहले कवर किया जाएगा। अधिकांश कामों के लिए टेंडर किए जा चुके हैं।
- केके थापा, मुख्य अभियंता, बिजली कारपोरेशन