चुनाव: अनंतनाग-राजोरी सीट पर बाहरी ने ठोकी ताल, मोहाली के बलदेव समेत 25 ने भरा पर्चा, भाजपा मैदान में नहीं
अनंतनाग-राजोरी संसदीय सीट पर शुक्रवार को नामांकन भरने के आखिरी दिन भी भाजपा की ओर से किसी प्रत्याशी का दावा नहीं किया गया। इस सीट पर पीछे हटने के साथ भाजपा ने कश्मीर की दो अन्य सीटों पर भी अपना प्रत्याशी खड़ा नहीं करने के संकेत दे दिए हैं। सूत्रों के अनुसार, अनंतनाग सीट पर कश्मीर केंद्रित एक दल को भाजपा समर्थन दे सकती है।
विस्तार
अनंतनाग-राजोरी संसदीय सीट से नामांकन के अंतिम दिन पंजाब के मोहाली के नया गांव निवासी बलदेव कुमार (67) ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में पर्चा दाखिल किया। अनुच्छेद 370 हटने के बाद यह पहले बाहरी व्यक्ति हैं जो कश्मीर में चुनाव लड़ रहे हैं। इससे पहले 2019 में अनुच्छेद 370 हटने से पहले हुए चुनाव में अनंतनाग से एनसीआर निवासी शम्स ख्वाजा ने ताल ठोका था। तीसरे चरण में होने वाले इस सीट के चुनाव में दो महिला समेत 25 उम्मीदवारों ने पर्चा भर्रा है।
पर्चा भरने के बाद बलदेव ने बताया कि 2014 के बाढ़ में उन्होंने यहां के लोगों के लिए काम किया है। उन्होंने यहां के कई छात्रों के पढ़ाई का खर्च उठाया है। कश्मीर के मरीज जब पंजाब इलाज के लिए जाते हैं तो उन्हें सुविधाएं भी मुहैया कराई जाती है। यहां तक कि उनके लिए एक मकान भी ले रखा है जहां वह रहकर इलाज करा सकें। उन्होंने प्रशासन से पंजाब में इन मरीजों के लिए कश्मीर भवन बनाने की मांग की है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।
मेधा पाटकर को गुजरात सरकार ने 20 एकड़ जमीन दिया है, लेकिन उन्हें मरीजों के कश्मीर भवन के लिए दो एकड़ भी नहीं मिल पा रहा है। लोगों ने उन्हें सुझाव दिया कि सत्ता में आने के बाद ही कश्मीर भवन बनाया जा सकता है। इसके बाद उन्होंने चुनाव लड़ने का फैसला किया। डोमिसाइल सर्टिफिकेट के बारे में पूछे जाने पर कहा कि उनके पास यह नहीं है क्योंकि वह एक स्थान पर नहीं रहते हैं। ज्ञात हो कि 2019 में जब शम्स ख्वाजा ने चुनाव लड़ा था तो आपत्ति उठाई गई थी, लेकिन चुनाव अधिकारियों ने उसे खारिज कर दिया था।
नामांकन के अंतिम दिन डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी (डीपीएपी) के नेता मोहम्मद सलीम पर्रा ने नामांकन पत्र दाखिल किया। डीपीएपी अध्यक्ष गुलाम नबी आजाद और पार्टी के अन्य नेताओं के साथ पर्रा ने नामांकन पत्र दाखिल किया।
इस सीट पर पीडीपी की प्रमुख एवं पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, नेकां के उम्मीदवार मियां अल्ताफ और अपनी पार्टी के जफर इकबाल मन्हास के अलावा मुजफ्फर अहमद शेख (जेकेएनएफ), सुदर्शन सिंह (नेशनल अवामी पार्टी), इम्तियाज अहमद नजर (नेशनल लोकतांत्रिक पार्टी) अर्शिद अहमद लोन (पैंथर्स पार्टी), अब्दुल गनी भट (भारत जोड़ो पार्टी), गुलशना अख्तर, सज्जाद अहमद डार, जावेद अहमद डार, शेख इमरान, दिलीप कुमार पंडिता, सुशील बगरंगी, अली मोहम्मद वानी, रविंदर सिंह, अब्दुल रूफ मलिक, समीर, अब्दुल रूफ नाइक, करमजीत सिंह, मोहम्मद मकबूल, मोहम्मद इलियास कुमार, तौसीफ माजिद राथर (निर्दलीय) ने भी पर्चा भरा है।
अनंतनाग लोस सीट से पीछे हटी भाजपा
अनंतनाग-राजोरी संसदीय सीट पर शुक्रवार को नामांकन भरने के आखिरी दिन भी भाजपा की ओर से किसी प्रत्याशी का दावा नहीं किया गया। इस सीट पर पीछे हटने के साथ भाजपा ने कश्मीर की दो अन्य सीटों पर भी अपना प्रत्याशी खड़ा नहीं करने के संकेत दे दिए हैं। सूत्रों के अनुसार, अनंतनाग सीट पर कश्मीर केंद्रित एक दल को भाजपा समर्थन दे सकती है। डीपीएपी के प्रमुख मंत्री गुलाम नबी आजाद के भी इस सीट से पीछे हटने से पहले ही समीकरण बदल गए थे।
जम्मू में हाल ही में एक चुनावी सभा में गृहमंत्री अमित शाह ने संकेत दिए थे कि वे कश्मीर आधारित सीटों पर प्रत्याशी खड़ा नहीं करेंगे। उन्होंने कहा था कि हमें कोई जल्दी नहीं, जब कश्मीर के लोगों का दिल करेगा, तभी कश्मीर में कमल खिलेगा। हालांकि सूत्रों के अनुसार अनंतनाग सीट के लिए पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने दावेदारी पेश की थी, लेकिन केंद्रीय नेतृत्व ने मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए प्रत्याशी नहीं उतारा है।
सूत्रों के अनुसार, कश्मीर केंद्रित किसी प्रमुख दल को समर्थन देकर जीत की सूरत में उन्हें अपने साथ मिला सकती है, जिससे जम्मू और उधमपुर की सीट आने की सूरत में जम्मू-कश्मीर में भाजपा का जीत का आंकड़ा तीन तक पहुंच सकता है। हालांकि यह चुनावी नतीजों के बाद ही साफ होगा। इसी तरह कश्मीर की श्रीनगर और बारामुला सीट पर भी भाजपा कश्मीर केंद्रित अपने समर्थक दल को समर्थन दे सकती है। अनंतनाग सीट से नेकां को छोड़कर अगर कोई दूसरा दल जीत पाता है तो उसे भाजपा की ओर से केंद्र में बेहतर मौका दिया जा सकता है।