{"_id":"6140fbb08ebc3e3de744ec08","slug":"education-samba-news-jmu2436542132","type":"story","status":"publish","title_hn":"हिंदी लिखने और बोलने में गर्व महसूस करें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हिंदी लिखने और बोलने में गर्व महसूस करें
विज्ञापन
शिक्षका धीरज कुमारी
- फोटो : SAMBA
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सांबा। राष्ट्रीय हिंदी दिवस पर हिंदी जानने वाले एक दूसरे को बधाइयां दे रहे हैं। वहीं हिंदी को अपनाने पर भी जोर दिया गया। 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने एक मत से निर्णय लिया था कि हिंदी भारत की राजभाषा होगी।
प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इस दिन के महत्व को देखते हुए हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाए जाने का ऐलान किया। पहला हिंदी दिवस 14 सितंबर 1953 को मनाया गया।
------
राष्ट्रीय हिंदी दिवस पर सभी को हिंदी अपनाने को कहूंगा। अफ़सोस से कहना पड़ रहा है कि इस देश में आज भी हिंदी के लिए 2 दबाना पड़ता है। 90 प्रतिशत लोग अंग्रेजी में हस्ताक्षर करते हैं। हिंदी लिखने और बोलने में गर्व महसूस करें।
विज्ञापन
-अभिनाश चौधरी, समाजसेवी
-------
हम अंग्रेजी को अधिक बढ़ावा दे रहे हैं, जबकि अपनी मातृ भाषा को छोड़ रहे हैं। आज छात्रों को हिंदी के बारे में बहुत कम जानकारी है। हिंदी को जोर से अपनाएं, बच्चों को भी हिंदी के बारे में विस्तार से बताएं।
-धीरज कुमारी, हिंदी शिक्षिका
--------
हिंदी दिवस को हम जोर शोर से मना रहे हैं, वहीं आज भी अधिकार काम अंग्रेजी में ही हो रहे हैं। सरकारी कार्यालयों में भी हिंदी में कामकाज हो, हिंदी के बारे में विस्तार से छात्रों को समझाया जाए, वहीं हिंदी को जोर से अपनाया जाए, ताकि अपनी राष्ट्रभाषा का सम्मान किया जा सके।
-प्रवीन लता, सेवानिवृत्त शिक्षका
विज्ञापन
प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इस दिन के महत्व को देखते हुए हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाए जाने का ऐलान किया। पहला हिंदी दिवस 14 सितंबर 1953 को मनाया गया।
विज्ञापन
------
राष्ट्रीय हिंदी दिवस पर सभी को हिंदी अपनाने को कहूंगा। अफ़सोस से कहना पड़ रहा है कि इस देश में आज भी हिंदी के लिए 2 दबाना पड़ता है। 90 प्रतिशत लोग अंग्रेजी में हस्ताक्षर करते हैं। हिंदी लिखने और बोलने में गर्व महसूस करें।
विज्ञापन
-अभिनाश चौधरी, समाजसेवी
-------
हम अंग्रेजी को अधिक बढ़ावा दे रहे हैं, जबकि अपनी मातृ भाषा को छोड़ रहे हैं। आज छात्रों को हिंदी के बारे में बहुत कम जानकारी है। हिंदी को जोर से अपनाएं, बच्चों को भी हिंदी के बारे में विस्तार से बताएं।
-धीरज कुमारी, हिंदी शिक्षिका
--------
हिंदी दिवस को हम जोर शोर से मना रहे हैं, वहीं आज भी अधिकार काम अंग्रेजी में ही हो रहे हैं। सरकारी कार्यालयों में भी हिंदी में कामकाज हो, हिंदी के बारे में विस्तार से छात्रों को समझाया जाए, वहीं हिंदी को जोर से अपनाया जाए, ताकि अपनी राष्ट्रभाषा का सम्मान किया जा सके।
-प्रवीन लता, सेवानिवृत्त शिक्षका