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Jammu News: आर्थिक नुकसान से बचना सिखाती है वित्तीय साक्षरता
Wed, 28 May 2025 01:39 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
Updated Wed, 28 May 2025 01:39 AM IST
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विजयपुर। राजकीय डिग्री कॉलेज (जीडीसी) की एनएसएस इकाई (खिदमत) ने भारतीय रिजर्व बैंक, जम्मू के सहयोग से मंगलवार को वित्तीय साक्षरता पर सेमिनार का आयोजन किया। इसमें वक्ताओं ने बताया कि वित्तीय साक्षरता आर्थिक नुकसान से बचना सिखाती है।
कॉलेज की प्रिंसिपल प्रो. डॉ. आशु वशिष्ठ की देखरेख और मार्गदर्शन में हुई इस गतिविधि में 50 से अधिक कॉलेजों के छात्रों ने उत्साह के साथ भाग लिया। समाजशास्त्र के विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. अनूप कुमार भगत के स्वागत भाषण से कार्यक्रम की शुरुआत हुई।
पहले तकनीकी सत्र में आरबीआई जम्मू के प्रबंधक अमनदीप सिंह ने भारतीय रिजर्व बैंक और इसकी भूमिका बताई। उन्होंने छात्रों को वित्तीय साक्षरता के बारे में बताया।
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अमनदीप ने कहा कि व्यक्तिगत वित्तीय प्रबंधन, बजट, निवेश सहित विभिन्न वित्तीय कौशल को समझने और प्रभावी ढंग से उपयोग करने की क्षमता ही वित्तीय साक्षरता कहलाती है।
यदि कोई वित्तीय रूप से निरक्षर है, तो वह कई नुकसानों का शिकार हो सकता है, जैसे कि खराब खर्च निर्णयों या दीर्घकालिक तैयारी की कमी के कारण अस्थिर ऋण बोझ बढ़ने की आशंका रहती है। इसके परिणामस्वरूप खराब क्रेडिट, दिवालियापन, आवास फौजदारी और अन्य नकारात्मक परिणाम हो सकते हैं।
दूसरे तकनीकी सत्र में आरबीआई जम्मू के सहायक प्रबंधक पीयूष शर्मा ने डिजिटल बैंकिंग का महत्व बताया। उन्होंने छात्रों के साथ बातचीत करके बैंकिंग सुविधाओं और डिजिटल बैंकिंग का महत्व बताया।
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कॉलेज की प्रिंसिपल प्रो. डॉ. आशु वशिष्ठ की देखरेख और मार्गदर्शन में हुई इस गतिविधि में 50 से अधिक कॉलेजों के छात्रों ने उत्साह के साथ भाग लिया। समाजशास्त्र के विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. अनूप कुमार भगत के स्वागत भाषण से कार्यक्रम की शुरुआत हुई।
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पहले तकनीकी सत्र में आरबीआई जम्मू के प्रबंधक अमनदीप सिंह ने भारतीय रिजर्व बैंक और इसकी भूमिका बताई। उन्होंने छात्रों को वित्तीय साक्षरता के बारे में बताया।
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अमनदीप ने कहा कि व्यक्तिगत वित्तीय प्रबंधन, बजट, निवेश सहित विभिन्न वित्तीय कौशल को समझने और प्रभावी ढंग से उपयोग करने की क्षमता ही वित्तीय साक्षरता कहलाती है।
यदि कोई वित्तीय रूप से निरक्षर है, तो वह कई नुकसानों का शिकार हो सकता है, जैसे कि खराब खर्च निर्णयों या दीर्घकालिक तैयारी की कमी के कारण अस्थिर ऋण बोझ बढ़ने की आशंका रहती है। इसके परिणामस्वरूप खराब क्रेडिट, दिवालियापन, आवास फौजदारी और अन्य नकारात्मक परिणाम हो सकते हैं।
दूसरे तकनीकी सत्र में आरबीआई जम्मू के सहायक प्रबंधक पीयूष शर्मा ने डिजिटल बैंकिंग का महत्व बताया। उन्होंने छात्रों के साथ बातचीत करके बैंकिंग सुविधाओं और डिजिटल बैंकिंग का महत्व बताया।