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इस अमृत काल में स्नातक करने वाले हमारे राष्ट्र की नियति को आकार देंगे : एलजी
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दीक्षांत समारोह में उपराज्यपाल ने कहा- मानविकी, कला, विज्ञान और प्रौद्योगिकी में प्रगति ने अवसरों के नए क्षेत्र खोले हैं
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू/कटड़ा। दीक्षांत समारोह में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह क्षण छात्रों की यादों में जीवन भर के लिए अंकित रहेगा। इस अमृतकाल में स्नातक करने वाले हमारे राष्ट्र की नियति को आकार देंगे।
एलजी ने कहा, आज वास्तविक दुनिया में कदम रखने वालों के पास राष्ट्र निर्माण का एक अनूठा अवसर है। उन्होंने कहा कि मानविकी, कला, विज्ञान और प्रौद्योगिकी में प्रगति ने अवसरों के नए क्षेत्र खोले हैं और स्नातक छात्रों का ज्ञान और सीख उन्हें सफलता प्राप्त करने में मदद करेगी। उपराज्यपाल ने जोर दिया कि कौशल और ज्ञान लोगों के जीवन को बेहतर बनाने में सहायक होंगे। विज्ञान और प्रौद्योगिकी में भविष्य के अवसरों को भुनाने के लिए हमें अपनी शिक्षण-परामर्श प्रणाली पर नए सिरे से विचार करने की आवश्यकता है, क्योंकि इसका सीधा असर विकसित भारत की यात्रा पर पड़ेगा।
हमारे शिक्षकों और शैक्षणिक संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे अभिनव शैक्षिक कार्यक्रम शुरू करें। आलोचनात्मक सोच, रचनात्मकता, नवाचार को बढ़ावा दें। उन्होंने पदक तालिका में लड़कों से आगे निकलने के लिए छात्राओं को भी बधाई दी।
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू/कटड़ा। दीक्षांत समारोह में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह क्षण छात्रों की यादों में जीवन भर के लिए अंकित रहेगा। इस अमृतकाल में स्नातक करने वाले हमारे राष्ट्र की नियति को आकार देंगे।
एलजी ने कहा, आज वास्तविक दुनिया में कदम रखने वालों के पास राष्ट्र निर्माण का एक अनूठा अवसर है। उन्होंने कहा कि मानविकी, कला, विज्ञान और प्रौद्योगिकी में प्रगति ने अवसरों के नए क्षेत्र खोले हैं और स्नातक छात्रों का ज्ञान और सीख उन्हें सफलता प्राप्त करने में मदद करेगी। उपराज्यपाल ने जोर दिया कि कौशल और ज्ञान लोगों के जीवन को बेहतर बनाने में सहायक होंगे। विज्ञान और प्रौद्योगिकी में भविष्य के अवसरों को भुनाने के लिए हमें अपनी शिक्षण-परामर्श प्रणाली पर नए सिरे से विचार करने की आवश्यकता है, क्योंकि इसका सीधा असर विकसित भारत की यात्रा पर पड़ेगा।
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हमारे शिक्षकों और शैक्षणिक संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे अभिनव शैक्षिक कार्यक्रम शुरू करें। आलोचनात्मक सोच, रचनात्मकता, नवाचार को बढ़ावा दें। उन्होंने पदक तालिका में लड़कों से आगे निकलने के लिए छात्राओं को भी बधाई दी।
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