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अब मिड-डे मील के लिए स्कूल में उगेंगी सब्जियां
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जम्मू। सरकारी स्कूली में पकने वाले मिड-डे मील की अब न सिर्फ गुणवत्ता सुधरेगी, बल्कि जैविक तरीके से उगाई सब्जियां खाने में बच्चों को परोसी जाएंगी। जम्मू-कश्मीर के सभी स्कूलों में पोषण वाटिका लगाई जा रही है। इसमें फल और सब्जियां उगाई जाएंगी। इसके लिए प्रति स्कूल पांच हजार रुपये का फंड भी सरकार की ओर से दिया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे स्कूल जहां पोषण वाटिका के लिए भूमि नहीं है, उन्हें पंचायतें भूमि मुहैया करवाएंगी। वहीं शहरी क्षेत्र के स्कूलों में गमले, मटके आदि में सब्जियां उगाई जाएंगी। इससे न सिर्फ बच्चों को ताजी सब्जियां मिलेंगी, बल्कि उनमें बागवानी के प्रति रुझान भी बढ़ेगा।
प्रदेश के सभी स्कूलों में इस पहल को शुरू किया जाएगा। इसमें सब्जियों के साथ स्थानीय फल भी उगाए जाएंगे। कई स्कूलों में पोषण वाटिका लगाई जा चुकी है। हालांकि कुछ ऐसे भी स्कूल हैं, जिनके पास इसके लिए भूमि नहीं है। मुख्य सचिव ने स्कूल शिक्षा विभाग को ऐसे मामले पर पंचायतों के साथ समन्वय बनाकर भूमि लेने के लिए कहा है। पोषण वाटिका के रखरखाव की जिम्मेदारी बच्चे और शिक्षक दोनों पर होगी। प्रदेश सरकार ने पोषण वाटिका के लिए स्कूल को फंड भी जारी किया है।
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पंचायत सदस्य करेंगे मिड-डे मील की निगरानी
स्कूलों में मिड-डे मील की गुणवत्ता पर पंचायत सदस्य भी नजर रखेंगे। सरपंच और पंच मिड-डे मील की निगरानी करेंगे। स्कूल शिक्षा विभाग इसमें पंचायतों की भागीदारी बढ़ाएगा, ताकि बच्चों को शुद्ध और पौष्टिक आहार मिल सके। बच्चों को दी जा रही मिड-डे मिल की निगरानी के लिए विभाग ने पोषण एप भी तैयार किया है।
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प्रदेश के सभी स्कूलों में इस पहल को शुरू किया जाएगा। इसमें सब्जियों के साथ स्थानीय फल भी उगाए जाएंगे। कई स्कूलों में पोषण वाटिका लगाई जा चुकी है। हालांकि कुछ ऐसे भी स्कूल हैं, जिनके पास इसके लिए भूमि नहीं है। मुख्य सचिव ने स्कूल शिक्षा विभाग को ऐसे मामले पर पंचायतों के साथ समन्वय बनाकर भूमि लेने के लिए कहा है। पोषण वाटिका के रखरखाव की जिम्मेदारी बच्चे और शिक्षक दोनों पर होगी। प्रदेश सरकार ने पोषण वाटिका के लिए स्कूल को फंड भी जारी किया है।
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पंचायत सदस्य करेंगे मिड-डे मील की निगरानी
स्कूलों में मिड-डे मील की गुणवत्ता पर पंचायत सदस्य भी नजर रखेंगे। सरपंच और पंच मिड-डे मील की निगरानी करेंगे। स्कूल शिक्षा विभाग इसमें पंचायतों की भागीदारी बढ़ाएगा, ताकि बच्चों को शुद्ध और पौष्टिक आहार मिल सके। बच्चों को दी जा रही मिड-डे मिल की निगरानी के लिए विभाग ने पोषण एप भी तैयार किया है।
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