जेकेसीए घोटाले में ईडी ने की फारूक से सात घंटे पूछताछ, 43.69 करोड़ की अनियमितता से जुड़ा है मामला
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जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन के 43.69 करोड़ के घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लांड्रिंग के मामले में सोमवार को एसोसिएशन के तत्कालीन अध्यक्ष और नेशनल कांफ्रेंस के पूर्व अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला से राजबाग स्थित कार्यालय में सात घंटे पूछताछ कर उनके बयान दर्ज किए। मामले में सीबीआई की एफआईआर के आधार पर ईडी ने केस दर्ज किया था।
पूछताछ के बाद ईडी के दफ्तर से निकलते हुए फारूक ने कहा कि वह सभी जांच एजेंसियों के साथ सहयोग करेंगे। इसमें राजनीति को नहीं शामिल किया जाना चाहिए। मैं अनुच्छेद 370 की बहाली के अपने वायदे पर कायम हूं। मैं रहा या न रहूं हर आदमी 370 के मुद्दे पर मेरे साथ खड़ा रहेगा।
इस बीच नवगठित गुपकार अलायंस के कई घटकों ने इसे बदले की कार्रवाई बताया है। ईडी इस मसले में पहले भी फारूक से पूछताछ कर चुकी है। सूत्रों ने बताया कि पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती की नजरबंदी के 14 माह की रिहाई के बाद 15 अक्टूबर को पीपुल्स अलायंस की घोषणा के एक दिन बाद फारूक को यह सम्मन मिला। लोकसभा सांसद और जेकेसीए के पूर्व अध्यक्ष अब्दुल्ला से पिछले साल जुलाई में चंडीगढ़ में इस मामले में पूछताछ की गई थी। उनसे यह जानने की कोशिश हो रही है कि जिस समय एसोसिएशन में कथित धोखाधड़ी हुई उसमें उनकी क्या भूमिका थी।
सीबीआई ने दर्ज किया था केस
सीबीआई ने जेकेसीए के महासचिव मोहम्मद सलीम खान और पूर्व कोषाध्यक्ष एहसान अहमद मिर्जा समेत कई पदाधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज किया था। सीबीआई ने 2002 से 2011 के बकीच बीसीसीआई द्वारा जेकेसीए को दिए गए अनुदान में से 43.69 करोड़ रुपये के गबन के मामले में अब्दुल्ला, सलीम खान और मिर्जा के अलावा मीर मंजूर गजनफर अली, बशीर अहमद मिसगर और गुलजार अहमद बेग के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी। ईडी ने कहा, जांच में पता चला कि जेकेसीए को बीसीसीआई से तीन अलग अलग बैंक खातों में 2005-06 से 2011-12 के बीच 94.06 करोड़ रुपये मिले थे।
उमर ने बताया प्रतिशोध की राजनीति
इस बीच, फारूक अब्दुल्ला के बेटे उमर अब्दुल्ला ने इसे प्रतिशोध की राजनीति बताया है। उमर ने ट्वीट किया, नेशनल कांफ्रेंस ईडी के समन का जवाब देगी। यह कुछ और नहीं बल्कि गुपकर घोषणा के तहत पीपुल्स अलायंस के गठन के बाद की जा रही बदले की राजनीति है। वहीं, पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती ने कहा, फारूक साहब को अचानक समन भेजना दिखाता है कि भारत सरकार जम्मू-कश्मीर की प्रमुख पार्टियों के एकजुट होने से घबरा गई है।
ईडी का सम्मान सरकार की घबराहट: महबूबा
हाल ही में 14 माह की नजरबंदी से मुक्त हुईं पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने इस घटनाक्रम पर ट्विटर पर लिखा कि फारूक साहब को अचानक सम्मन दिया जाना इस बात का संकेत है कि जम्मू-कश्मीर की मुख्य पार्टियों के एक मंच पर आने से विरोधी पार्टियों में जबरदस्त घबराहट है। हम एक होकर संघर्ष करेंगे। इस तरह के राजनीति प्रतिशोध हमारे अधिकारों के लिए लड़ने के हमारे सामूहिक संकल्प को कुंद नहीं कर सकते।
बदले की कार्रवाई: सज्जाद लोन
पीपुल्स कांफ्रेंस के नेता सज्जाद लोन ने भी ईडी की इस कार्रवाई को प्रतिशोध बताया है। कहा,अफसोस की बात है कि डॉक्टर फारूक को ईडी ने इस तरह अपने दफ्तर तलब किया। इस प्रकार की कार्रवाई से जो भी राजनीतिक दल कुछ हासिल करना चाहते हैं उन्हें इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।