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श्री अमरनाथ यात्रा रद्द: पिट्ठू-पालकी और घोड़ेवाले 25 हजार से ज्यादा लोगों में मायूसी, आर्थिक तंगी से परिवार के सामने बड़ा संकट
Tue, 22 Jun 2021 12:02 AM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Vikas Kumar
Updated Tue, 22 Jun 2021 12:02 AM IST
सार
अमरनाथ यात्रा में हर साल राजोरी, पुंछ, उधमपुर, रियासी, रामबन और कश्मीर जिलों के 15 हजार घोड़े यात्रा के लिए लाए जाते हैं। यात्रा से होने वाली आय से इन घोड़ेवालों का सालभर का खर्च निकलता है। एक तरह से पूरे साल की कमाई यात्रा पर टिकी होती है।
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अमरनाथ यात्रा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
श्री अमरनाथ यात्रा के रद्द होने से प्रदेश के पर्यटन और स्थानीय कारोबार पर बड़ी मार पड़ी है। पिट्ठू, पालकी और घोड़ेवाले करीब 25 हजार लोगों के लिए यात्रा साल भर की कमाई की जरिया है, जिसके रद्द होने से इन लोगों में मायूसी छा गई है। छह हजार टैक्सी चालक और जम्मू व कश्मीर संभागों के पर्यटन कारोबारियों को भी यात्रा रद्द होने से झटका लगा है।
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अमरनाथ यात्रा में हर साल राजोरी, पुंछ, उधमपुर, रियासी, रामबन और कश्मीर जिलों के 15 हजार घोड़े यात्रा के लिए लाए जाते हैं। यात्रा से होने वाली आय से इन घोड़ेवालों का सालभर का खर्च निकलता है। एक तरह से पूरे साल की कमाई यात्रा पर टिकी होती है। 4 से 6 घोड़े भी एक व्यक्ति द्वारा यात्रा में लगाए जाते हैं। इसके अलावा पहलगाम और बालटाल दोनों रूट से 5 से 6 हजार पिट्ठू वाले काम करते हैं। 5 हजार लोग पालकी में भी रहते हैं। कुल मिलाकर पिट्ठू, घोड़ा और पालकी का काम करने वाले 25 हजार लोगों में यात्रा रद्द होने से मायूसी छा गई है।
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वहीं, जम्मू और श्रीनगर की 6 हजार टूरिस्ट टैक्सियां अमरनाथ यात्रा में शामिल होती हैं। यह लोग सालभर यात्रा का इंतजार करते हैं, ताकि कुछ कमाई कर सकें। टूरिस्ट टैक्सी फेडरेशन के प्रधान अंचल सिंह का कहना है कि यात्रा रद्द होने से काफी नुकसान झेलना पड़ रहा है। कोविड की वजह से पहले ही डेढ़ साल से कुछ नहीं कमा पाए। वाहनों की किस्तें निकालना मुश्किल हो गया है। अब यात्रा रद्द होने से टैक्सी सेवा से जुड़े परिवारों के सामने एक और संकट खड़ा हो गया है।
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पीक सीजन की रीढ़ है यात्रा
पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि अमरनाथ यात्रा जम्मू-कश्मीर के पीक सीजन की रीढ़ है। 2 से 3 लाख यात्री भी आते हैं तो इसका प्रदेश की आर्थिकी पर व्यापक असर पड़ता है। पर्यटन सीजन में आने वाले श्रद्धालु प्रदेश के अधिकतर पर्यटन स्थलों में सैलानी के रूप में पहुंचते हैं। वह कश्मीर और जम्मू के अलावा वैष्णो देवी भी जाते हैं। ऐसे में यात्रा हर तरह से पर्यटन से जुड़ी हुई है।
बालटाल रूट पर सुरक्षाकर्मी तैनात
अमरनाथ यात्रा को रद्द कर दिया गया है, लेकिन बालटाल रूट पर कई जगह सुरक्षाकर्मियों को तैनात कर दिया गया है। यह व्यवस्था पवित्र गुफा की सुरक्षा के लिए की गई है।